नेपाल में फिर बाढ़ का कहर… बूढ़ी गंडकी नदी का रौद्र रूप, कई गांव बहे, बिहार-UP पर मंडराया बड़ा खतरा!
भोटोकोशी बाढ़ के डेढ़ महीने बाद ही नेपाल में फिर एक बार बाढ़ से कई गांव और पुल तबाह हो गए. इसमें कई लोग लापता बताए जा रहे हैं.
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Nepal Flood: नेपाल के त्रिशूली नदी में बाढ़ से मची तबाही के निशान अभी मिटे भी नहीं कि बूढ़ी गंडकी नदी ने रौद्र रूप दिखा दिया. यहां पश्चिमी गोरखा में आई भीषण बाढ़ से गांव के गांव बहा दिए. घर मलबे में तब्दील हो गए और कई पुल बह गए.
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने बाढ़ की चेतावनी जारी की थी. यह बाढ़ चीन की सीमा से लगे चुमनुबरी ग्रामीण नगर पालिका क्षेत्र से गुजरने वाली बूढ़ी गंडकी नदी में उफान के बाद आई. जिसमें किनारे पर बसे कई गांव तबाह हो गए.
बाढ़ में बहा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट
बताया जा रहा है बाढ़ का पानी सुबह करीब 4 बजे बस्तियों में घुसा था. इसके बाद जिसके बाद लोगों को घर और सामान छोड़कर अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों पर जाना पड़ा. कई लोग लापता बताए जा रहे हैं.
स्थानीय प्रशासन और डिजास्टर टीम बाढ़ से हुए नुकसान के आकलन में जुटी हैं. इधर बाढ़ से 341 मेगावाट के बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण कैंप और कई मशीनें भी बह गईं.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बाढ़ में कई घर, झूला पुल और एक स्टील पुल बह गए हैं. इसके अलावा एक जलविद्युत परियोजना के निर्माण स्थल को भी नुकसान पहुंचा है.
लैंडस्लाइड के बाद आई बाढ़!
शुरुआती अनुमान के मुताबिक, बाढ़ की वजह लोकपा और चुम्लिंग के बीच हुए भूस्खलन को माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि इस लैंडस्लाइड से स्यार खोला, जो बूढ़ी गंडकी की एक सहायक नदी है, का बहाव रुक गया होगा. हालांकि, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग ने स्थानीय समाचार पोर्टल 'ऑनलाइनखबर' से कहा कि बूढ़ी गंडकी की यह बाढ़ काफी हद तक भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ जैसी लग रही है. उन्होंने कहा कि यह बाढ़ भोटेकोशी की बाढ़ की याद दिलाती है. दर्जनों घर बह गए हैं. फिलहाल नुकसान की सही तस्वीर बताना जल्दबाजी होगी. प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है.
बिहार-UP तक कैसे खतरा?
नेपाल में फिर आई बाढ़ ने भारत में भी खतरा बढ़ा दिया है. क्योंकि बूढ़ी गंडकी नदी आगे जाकर त्रिशूली नदी से मिलती है. दोनों का पानी फिर देवघाट में नारायणी नदी में पहुंचता है. नारायणी नदी भारत में बिहार के कई क्षेत्रों में गंडक नदी के नाम से पहुंचती है और फिर गंगा में मिल जाती है. इस सैलाब का असर गंडक और गंगा किनारे बसे कई जिलों पर होता है.
बिहार में पहले से ही गंगा में कटाव का लगातार जारी है. ऐसे में अगर नेपाल से पानी बिहार की ओर आता है तो हालात बिगड़ सकते हैं. नेपाल की इस बाढ़ से बिहार के पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और वैशाली जैसे जिलों को अलर्ट पर रहने के लिए कहा गया है. बूढ़ी गंडकी नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है, वहीं, बिहार में नदियों का जलस्तचर बढ़ने से UP से सटे इलाको में भी खतरा बढ़ गया है.
डेढ़ महीने पहले नेपाल में बाढ़ ने मचाया था कहर
इससे पहले 26 अगस्त को नेपाल के रासुवा क्षेत्र में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी. उस बाढ़ में करीब 1455 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 5,285 लोग अब भी लापता हैं.
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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा है कि बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान के लिए नेपाली सेना की एक टुकड़ी को हवाई और जमीनी दोनों रास्तों से तैनात किया गया है. उन्होंने बताया कि भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के खतरे वाले जगत क्षेत्र से 6 लोगों को हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाला गया है. बालेन शाह ने कहा कि काठमांडू में तैनात क्विक रिएक्शन टीम को भी हवाई मार्ग से प्रभावित इलाके में भेज दिया गया है, ताकि राहत और बचाव कार्यों को तेजी से अंजाम दिया जा सके.