Advertisement
Enough is Enough… कर्नल सोफिया पर किसने की मंत्री के विवादित कमेंट की पैरवी? उखड़े CJI सूर्यकांत ने लगाई फटकार
ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान तक कड़ा मैसेज पहुंचाने वाली कर्नल सोफिया पर मंत्री की विवादित टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान CJI सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को कड़ी फटकार लगाई
Advertisement
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इंडियन आर्मी की कर्नल सोफिया कुरैशी पर मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने विवादित टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान CJI सूर्यकांत ने कड़ी फटकार लगाई. चीफ जस्टिस ने कहा, कर्नल सोफिया पर मंत्री की ऐसी टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी.
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत का पारा उस वक्त और हाई हो गया, जब मंत्री विजय शाह की पैरवी करते हुए हुए सॉलिसिटर तुषार मेहता ने उनका बचाव किया. एसजे तुषार मेहता ने कहा,
‘शायद मंत्री के बयान को गलत समझा गया और महिला अधिकारी (सोफिया कुरैशी) की तारीफ करना चाहते थे.’
Advertisement
मेहता ने कहा, ‘उन्होंने जो कहा, वह निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण था, हो सकता है कि वे महिला अधिकारी की तारीफ करना चाहते हों लेकिन वे अपनी बात ठीक से कह नहीं पाए और कुछ और ही कह बैठे.’
Advertisement
तुषार मेहता की इस दलील पर CJI सूर्यकांत उखड़ गए और उन्हें कड़ी फटकार लगा दी. CJI ने सख्त लहजे में कहा, यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था.
‘एक राजनेता के तौर पर उन्हें अच्छी तरह पता है कि किसी महिला अधिकारी की प्रशंसा कैसे की जाती है.’
Advertisement
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने SIT की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मंत्री विजय शाह को इस तरह के कमेंट करने की आदत है. CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘Enough Is Enough, अब बस हमारे आदेश का पालन कीजिए बहुत हो गया. सबसे पहले तो उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए थी. उन्होंने ऐसा तब किया, जब कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया. इस मामले को चार हफ़्तों बाद फिर से लिस्ट करें.’
‘मंत्री का माफीनामा महज फॉर्मेलिटी’
मंत्री विजय शाह के वकील मनिंदर सिंह ने शीर्ष अदालत में कहा, विजय शाह ने अपना माफीनामा दाखिल कर दिया है और वह जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं.
Advertisement
सुप्रीम कोर्ट ने इस माफी की ईमानदारी पर ही सवाल उठा दिया. CJI ने कहा, सिर्फ इसलिए कि कोर्ट ने संज्ञान लिया, आपने माफी मांगी. चिट्ठी लिखना माफी नहीं है. यह सिर्फ एक झूठा बचाव करने के लिए था. सबसे पहली चीज तो यह होनी चाहिए थी कि आप हाथ जोड़कर माफी मांगते. इसके बाद एसजी मेहता ने कहा कि शाह ने टेलीविजन पर भी हाथ जोड़कर माफी मांगी थी.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जनवरी में हुई थी. उस वक्त भी चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा था कि अब माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है और इस तरह की माफी स्वीकार्य नहीं हो सकती. कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि माफी किस तरह मांगनी होगी.
कर्नल सोफिया पर क्या थी मंत्री विजय शाह की टिप्पणी?
Advertisement
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के खिलाफ बयान दिया था. जिसमें वह सेना की तारीफ करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी कर दी थी. उन्होंने महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, ‘जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा किया, हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी ही एक बहन को भेजा.’ इस बयान को कर्नल सोफिया कुरैशी के धर्म से जोड़कर देखा गया. दरअसल, कर्नल सोफिया कुरैशी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद मीडिया ब्रीफिंग कर जानकारी दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री कुंवर विजय शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के फैसले में हुई देरी पर नाराजगी जाहिर की. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने राज्य सरकार से सवाल किया कि उसने सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देश का पालन क्यों नहीं किया, जिसमें उसे दो हफ्तों के भीतर मंजूरी देने पर फैसला लेने को कहा गया था.
जब एसजी मेहता ने फिर दोहराया कि शाह से शायद गलती से कुछ निकल गया हो, तो पीठ ने कहा कि राजनेता आम तौर पर अपने सार्वजनिक बयानों में काफी सावधान और अपनी बात कहने में माहिर होते हैं.
Advertisement
सीजेआई कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने आखिरकार राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अपने पिछले आदेश का पालन करे और मंजूरी के मुद्दे पर फैसला ले, साथ ही उसे ‘हालात की पूरी तस्वीर' पर भी विचार करने को कहा.
अब इस मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी. इससे पहले, 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि वह SIT की सीलबंद रिपोर्ट खोलने के बाद, शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के बारे में दो हफ्ते के भीतर फैसला ले. इस रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि जांच पैनल ने मंत्री के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए मंजूरी मांगी थी.
यह भी पढ़ें
शाह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा तब खटखटाया था, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपनी तरफ से शुरू की गई कार्यवाही में, कर्नल कुरैशी को निशाना बनाने वाली उनकी टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था.