Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

'चुनाव निष्पक्ष हों और ब्यूरोक्रेसी ट्रांसपेरेंट हो....', ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच मुरली मनोहर जोशी ने कही बड़ी बात

मुरली मनोहर जोशी ने SIR और CEC के इस्तीफे की मांग पर कहा कि लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार और पारदर्शी ब्यूरोक्रेसी जरूरी है. उन्होंने कहा कि हर फैसला संविधान के दायरे में होना चाहिए और उल्लंघन होने पर सुप्रीम कोर्ट को जांच करनी चाहिए.

Image Source: IANS
Loading Ad...

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने चुनाव प्रक्रिया, लोकतंत्र और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है. गुरुवार को 21वें FICCI हायर एजुकेशन समिट के दौरान पत्रकारों से बातचीत में जोशी ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है, जब चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों और ब्यूरोक्रेसी पारदर्शी तरीके से काम करे.

मुरली मनोहर जोशी ने क्या कहा?

मुरली मनोहर जोशी से जब वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठ रहे सवालों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्ष की मांग पर सवाल किया गया, तो उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि लोगों की, लोगों के लिए और लोगों द्वारा बनाई गई सरकारें खत्म नहीं होंगी, लेकिन इसके लिए चुनाव का निष्पक्ष होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि विपक्ष भी लोकतंत्र का अहम हिस्सा है और उसे जवाबदेह तथा जिम्मेदार तरीके से अपनी भूमिका निभानी चाहिए. हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जोशी ने इस बात पर भी जोर दिया कि हर कार्रवाई संविधान के दायरे में होनी चाहिए. अगर संविधान के उल्लंघन का कोई मामला सामने आता है, तो उसकी जांच सुप्रीम कोर्ट को करनी चाहिए. उनके मुताबिक लोकतंत्र इसी सिद्धांत के आधार पर आगे बढ़ता है.

Loading Ad...

यह भी पढ़े: शशि थरूर को घेरने चले थे सौरव दास, कांग्रेस सांसद ने पलटकर कर दिया पूरा खेल

Loading Ad...

छात्रों के प्रदर्शन पर भी बोले जोशी

मुरली मनोहर जोशी ने छात्रों के प्रदर्शनों को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने साफ कहा कि छात्रों की जायज मांगों को सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए और लाठीचार्ज किसी समस्या का समाधान नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर छात्रों को कोई शिकायत है तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए, क्योंकि वे देश के बच्चे हैं. जोशी ने इसे समझाने के लिए परिवार का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा अपने पिता से शिकायत करता है कि उससे किसी चीज का वादा किया गया था, तो पिता उसकी बात सुनता है और अपनी स्थिति समझाता है. ऐसे में बच्चे को भगा देना समाधान नहीं होता. इसी तरह छात्रों के साथ भी संवेदनशीलता और संवाद के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए.

Loading Ad...

NEP 2020 पर बोले- अभी नतीजे बताना जल्दबाजी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लेकर पूछे गए सवाल पर जोशी ने कहा कि इसे लागू हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है. इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए इस समय इसके अंतिम परिणामों का आकलन करना जल्दबाजी होगी. उन्होंने संकेत दिया कि नीति के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए कुछ और समय का इंतजार करना जरूरी है. जोशी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब शिक्षा और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज है. SIR को लेकर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है. राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन भी जारी है. इससे पहले प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिए जाने का मामला भी सामने आया था. वहीं छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जोशी की टिप्पणी उनके पुराने रुख से भी जुड़ी नजर आती है. उन्होंने पहले भी शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने की जरूरत पर जोर दिया था. NEET से जुड़े विवाद और छात्रों के प्रदर्शनों के संदर्भ में भी उन्होंने चिंता जताई थी.

यह भी पढ़ें

बता दें यह कह सकते हैं कि मुरली मनोहर जोशी की ताजा टिप्पणी में लोकतंत्र, संविधान और शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीन अहम बातें सामने आती हैं. निष्पक्ष चुनाव, पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी हैं. वहीं छात्रों की शिकायतों का समाधान बल प्रयोग के बजाय बातचीत और संवेदनशीलता से किए जाने की जरूरत है. जोशी ने NEP 2020 को लेकर भी यही संकेत दिया कि किसी बड़े बदलाव का सही मूल्यांकन उसके पर्याप्त समय तक लागू होने के बाद ही किया जाना चाहिए.

अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...