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केरल पर इतराने वाली कांग्रेस 4 राज्यों में बुरी पिटी, ‘शहजादे’ के सिर सजा 99वीं हार का सेहरा, अब क्या करेंगे राहुल?

केरल पर फूले नहीं समा रही कांग्रेस का प्रदर्शन 4 अन्य राज्यों में शर्मनाक रहा. हर हार के बाद छोटी-मोटी बैठक होगी, मंथन होगा, लेकिन वही ढाक के तीन पात, बैठक बेनतीजा ही रह जाती है, अगले चुनाव में फिर वही हार, वही ढपली वही राग.

Source- IANS/X/INC
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लोकसभा चुनाव 2024 के बाद कांग्रेस का सूरज फिर से उदय होता हुआ नजर आया था, लेकिन जैसे-जैसे गाड़ी आगे बढ़ी हाथ की पकड़ से वोटर्स छूटते रहे. क्योंकि गाड़ी का स्टीयरिंग राहुल गांधी के हाथ में था, आंकड़े बताते हैं कि राहुल गांधी के नेतृत्व को जनता ने लगातार नकारा है. 

चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के राजनीतिक करियर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से कांग्रेस की राजनीति के केंद्र में रहने के बावजूद राहुल गांधी के खाते में 99 चुनावी हार दर्ज हो चुकी हैं. यह संख्या शतक से महज एक कदम दूर है. 

केरल में कांग्रेस को कितनी सीटें मिली? 

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पांच राज्यों में से कांग्रेस ने केवल केरल में अच्छा प्रदर्शन किया है. हालांकि यहां भी केरल बहुमत के आंकड़े को टच नहीं कर पाई. केरल में कुल 140 सीटें हैं, बहुमत का आंकड़ा 71 है, कांग्रेस के खाते में आई हैं 63 सीट, राज्य में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और कांग्रेस की अगुवाई वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) गठबंधन सरकार बनाएगा. भले ही कांग्रेस इस जीत से गदगद हो रही है लेकिन 4 राज्यों में मिली हार पर उनका चलताऊ रवैया पार्टी को गर्त में ले जाना वाला है.

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केरल के अलावा पश्चिम बंगाल में केवल दो, असम में 19, पुडुचेरी में एक सीटें और तमिलनाडु में पांच सीटें मिली. 

कांग्रेस के लगातार खराब प्रदर्शन पर एक नजर

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लोकसभा चुनाव- 2014, 2019, 2024

विधानसभा चुनाव

  • जम्मू कश्मीर- 2014
  • पंजाब- 2007, 2012, 2022
  • हरियाणा- 2014, 2019, 2024
  • दिल्ली- 2013, 2015, 2020, 2025
  • गुजरात- 2007, 2012, 2017, 2022
  • राजस्थान- 2013, 2023
  • मध्य प्रदेश- 2008, 2013, 2018, 2023
  • महाराष्ट्र- 2014, 2019, 2024
  • गोवा- 2012, 2017, 2022
  • कर्नाटक- 2004, 2008, 2018
  • केरल- 2006, 2016, 2021
  • तेलंगाना- 2014, 2018
  • आंध्र प्रदेश- 2014, 2019, 2024
  • पुडुचेरी- 2011, 2021, 2026
  • तमिलनाडु- 2011, 2016, 2026
  • हिमाचल प्रदेश- 2007, 2017
  • उत्तराखंड- 2007, 2017, 2022
  • सिक्किम- 2004, 2009, 2014, 2019, 2024
  • उत्तर प्रदेश- 2007, 2012, 2017, 2022
  • बिहार- 2005, 2010, 2015, 2020
  • पश्चिम बंगाल- 2006, 2016, 2021, 2026
  • अरुणाचल प्रदेश- 2019, 2024
  • असम- 2016, 2021, 2026
  • नागालैंड- 2008, 2013, 2018, 2023
  • मणिपुर- 2017, 2022
  • मिजोरम- 2018, 2023
  • त्रिपुरा- 2008, 2013, 2018, 2023
  • मेघालय- 2018, 2023
  • झारखंड- 2005, 2009, 2014
  • ओडिशा- 2004, 2009, 2014, 2019, 2024
  • छत्तीसगढ़- 2008, 2013, 2023

केंद्र शासित प्रदेशों से लेकर राज्यों तक में कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिरता रहा. पिछले 10-15 साल में राहुल गांधी कांग्रेस के प्रमुख नेता के तौर पर लगातार सक्रिय रहे हैं. बड़ी बात यह है कि राहुल गांधी ने सितंबर 2022 में 'भारत जोड़ो यात्रा' की शुरुआत की. उनका दावा था कि यह यात्रा देश को जोड़ने और संविधान की रक्षा करने के लिए है, लेकिन, जब इस यात्रा के बाद कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी. यहां तक कि जिन राज्यों से होकर यह यात्रा गुजरी, वहां भी कांग्रेस की लुटिया डूबते देर नहीं लगी. अगर बात लोकसभा चुनाव की करें तो भाजपा की सीट जरूर कम हुई, एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ. 

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इंफो इन डाटा की ओर से जारी एक पोस्टर में राहुल गांधी के 99 चुनावी हार का जिक्र किया गया है. नक्शे में देश के उन राज्यों को चिन्हित किया गया है, जहां कांग्रेस को विभिन्न चुनावों में हार का सामना करना पड़ा. 

अब क्या करेगी कांग्रेस? 

कांग्रेस समर्थक और कार्यकर्ता भी ये ही सवाल पूछ रहे हैं. पार्टी आलाकमान इस हार से क्या सबक लेगा, क्या रणनीति बनाएगा, कमियों खामियों पर क्या काम करेगा? लेकिन हर हार के बाद छोटी-मोटी बैठक होती है, मंथन होता है लेकिन वही ढाक के तीन पात, बैठक बेनतीजा ही रह जाती है, अगले चुनाव में फिर वही हार, वही ढपली वही राग. 

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हार की समीक्षा करने की बजाय राहुल गांधी गायब हो जाते हैं, चुनावों के समय भी वह कुछ ही रैलियों में नजर आए थे. जहां PM मोदी एक दिन में लगातार ताबड़तोड़ रैलियां करते हैं वही राहुल एक जगह एक दो रैली करके केवल खानापूर्ति करते हैं. जब पार्टी के शीर्ष लीडर का ही ये सुस्त रवैया है तो कार्यकर्ताओं में क्या मैसेज जाएगा. 

तमिलनाडु में भी मिटा जनाधार 

महज केरल में जीत से फूले नहीं समाने वाली कांग्रेस तमिलनाडु में अपना जनाधार खो रही है. जबकि राजनीति में डेब्यू करने वाले सुपरस्टार थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़झम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. तमिलनाडु की 234 सीटों पर TVK को 107 सीटों पर जीत मिली है. जबकि स्टालिन की DMK 47 सीटों पर सिमट गई. 

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सरकार बनाने के लिए TVK ने कांग्रेस को ऑफर दिया है, लेकिन कांग्रेस खुद 5 सीटों पर सिमट गई. जबकि कांग्रेस से बेहतर की उम्मीद थी. लेकिन लगता है कांग्रेस किसी चुनाव को सीरियसली लेती ही नहीं है. वहीं, हाल पश्चिम बंगाल में भी हुआ, जहां कांग्रेस महज 2 सीटों पर रह गई, ऐसा लगता है पश्चिम बंगाल में कांग्रेस प्ले ही नहीं कर रही थी, या करना नहीं चाहती थी, ये ही रवैया साल 2021 में भी दिखाया, नतीजा अब सामने है. पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस का खराब प्रदर्शन फिर पार्टी के अंदरुनी कलह, नेतृत्व और संगठन के भीतर की कमजोरी को साफ जाहिर करता है. 

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