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पाकिस्तान के साथ होने वाली थी चीन की बड़ी डील, तभी पड़ोसी देश ने रखी भारत के खिलाफ एक मांग और बिगड़ गई बात
पाकिस्तान चीन के साथ ऐसी डील करने जा रहा था. जिससे चीन को हिंद महासागर में बड़ी रणनीतिक बढ़त मिलती, लेकिन बदले में चीन को तीन शर्तें माननी होती.
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Pakistan China Deal: पाकिस्तान और चीन के बीच एक बड़ी डील होते-होते रह गई. इसकी वजह बना अमेरिका और भारत. चीन पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को स्थायी चीनी सैन्य अड्डे में बदलने के लिए तैयार हो गया था, लेकिन इस डील के बदले पाकिस्तान ने जो मांगे रखी उससे बात बिगड़ गई.
Drop News Site की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने पर्दे के पीछे चीन को संकेत दिया था कि वह ग्वादर को स्थायी चीनी नौसैनिक अड्डा बनने देगा, जिससे चीन को हिंद महासागर में बड़ी रणनीतिक बढ़त मिलती, लेकिन बदले में चीन को तीन शर्तें माननी होगीं.
क्या थी पाकिस्तान की चीन से तीन शर्तें?
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पाकिस्तान चाहता था कि चीन गारंटी दे कि बेस मिलने के बाद अमेरिका की संभावित कार्रवाई से पूरी सुरक्षा मिलेगी. इसमें कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चे शामिल थे.
पाकिस्तान की दूसरी शर्त थी कि चीन उसकी सेना और खुफिया क्षमता को मजबूत करने में मदद करे. इसमें ISI को मजबूत बनाने की मांग थी.
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पाकिस्तान की तीसरी मांग थी कि चीन से उसे समुद्र आधारित परमाणु सेंकंड्री स्ट्राइक की क्षमता मिले. यानी समुद्र में छिपी परमाणु पनडुब्बियों से परमाणु हमला करने की क्षमता. जिससे वह भी भारत की तरह अजेय ताकत बन सके. क्योंकि भारत के साथ सेकंड स्ट्राइक की पावर है.
चीन ने क्या कहकर ठुकराई मांग?
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने पाक की इस मांग को ‘अनुचित’ ठहराते हुए ठुकरा दिया. चीन ने माना कि यह शर्ते सीधे तौर पर परमाणु अप्रसार संधि (NPT) नियमों का उल्लंघन है और चीन इंटरनेशनल नियमों में नहीं फंसना चाहता. ऐसा करने पर चीन को ही भारी प्रतिबंध और कूटनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता था.
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कहा जा रहा है पाकिस्तान की तीसरी मांग ही इस डील के टूटने का कारण बनी. अगर चीन पाकिस्तान की ये बात मानता तो यह भारत के लिए घातक हो सकता था. क्योंकि भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु दौड़ और तेज हो सकती थी. पाकिस्तान समुद्र में छुपकर भारत पर हमले कर सकता था, इससे भारत की समुद्री सुरक्षा में बड़ा खतरा पैदा हो सकता था.