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‘जो तुमने आंख मूंदी है, अंधेरा हो गया गहरा’, CJI का नाम लेकर शशि थरूर ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना, पूछे तीखे सवाल
फॉर्म 6 को लेकर जारी विवाद और CJI सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर चुनाव आयोग पर हमलावर दिखे. उन्होंने बकायदा कविता लिखकर तीखे सवाल पूछे.
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स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े फॉर्म 6 को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ने दावा किया है कि फॉर्म 6 को लेकर बदलाव उनकी मंजूरी से नहीं हुए हैं. CJI के इसी बयान को आधार बनाते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है.
शशि थरूर ने पूरे प्रकरण और फॉर्म 6 में हुए बदलावों को लेकर कविता लिख डाली. जिसे उन्होंने सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया है.
‘जो तुमने आंख मूंदी है, अंधेरा हो गया गहरा
तुम्हारे जागने से ही, तो लगना था यहां पहरा
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बताओ, आजकल मालूम है सबको सियासत फिर,
नहीं दिखता खिलाड़ी कौन है औ’ कौन है मोहरा?
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‘Modified Form 6 has not been approved by us. Let us be very clear.’
उन्होंने CJI सूर्यकांत की इस लाइन को कोट करते हुए BJP और चुनाव आयोग से सवाल पूछा,
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‘जब सर्वोच्च न्यायालय ने संशोधित प्रपत्र 6 को मंज़ूरी नहीं दी, तो इसे किसने बदला? किसके आदेश पर बदला? और किस अधिकार के तहत बदला?’
शशि थरूर ने लिखा, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने आज साफ़ कहा कि अभिलेख सामने आने पर सर्वोच्च न्यायालय यह देखना चाहेगा कि किसने क्या संशोधन किया है?
चुनाव आयोग के दावे पर सवाल
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कांग्रेस सांसद ने चुनाव आयोग को कटघरे में खड़े करते हुए कहा,
‘चुनाव आयोग ने पहले सर्वोच्च न्यायालय के मई के फ़ैसले का हवाला देते हुए इस अतिरिक्त घोषणा को न्यायालय की स्वीकृति प्राप्त बताया था, लेकिन आज सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.’
थरूर ने तीखे शब्दों में कहा, मतदाता सूची कोई प्रयोगशाला नहीं है. फॉर्म 6 कोई मामूली काग़ज़ नहीं है. यह हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार/मताधिकार से जुड़ा दस्तावेज़ है.
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थरूर के चुनाल आयोग से बड़े सवाल
उन्होंने अपने पोस्ट में पूछा, अब देश जानना चाहता है-
- फॉर्म 6 किसने बदला?
- क्यों बदला?
- किसकी अनुमति से बदला?
- सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति का दावा किस आधार पर किया गया?
उन्होंने तीखें अंदाज में कहा, इन सवालों के जवाब चाहिए, साफ़ और सार्वजनिक जवाब.
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क्या है फॉर्म 6 और क्यों हो रहा विवाद?
SIR (Special Intensive Revision) में फॉर्म 6 मतदाता सूची में नया नाम जोड़ने का वैधानिक आवेदन पत्र है. यह Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित है.
यह उन पात्र भारतीय नागरिकों के लिए है जो पहली बार वोटर बनना चाहते हैं (18 साल या उससे अधिक उम्र), या जिनका नाम सूची में नहीं है/हटा दिया गया है और वे फिर से जुड़वाना चाहते हैं.
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इसमें नाम, रिश्तेदार का नाम, जन्म तिथि/आयु प्रमाण, वर्तमान निवास, नागरिकता संबंधी स्व-घोषणा मांगी जाती है. आधार विवरण वैकल्पिक है. सामान्य समय में यह नए मतदाताओं के पंजीकरण का मुख्य फॉर्म है. SIR प्रक्रिया के दौरान भी ड्राफ्ट रोल में नाम न दिखने पर इसे इस्तेमाल किया जाता है.
विवाद मुख्य रूप से ऑनलाइन फॉर्म 6 (ECINET पोर्टल) में SIR से जुड़े एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र (Declaration/Annexure) को जोड़ने को लेकर था, जो जुलाई 2026 के आसपास सामने आया था.
इसमें आवेदक से पूछा गया कि क्या उसका नाम, या माता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछले SIR (मुख्य रूप से 2000 के दशक की शुरुआत वाले) की मतदाता सूची में था.
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विकल्प चुनने पर पुरानी सूची से संबंधित विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर, सीरियल नंबर जैसी डिटेल देनी पड़ सकती थी. हालांकि इसे ‘Mandatory’ नहीं बताया गया, लेकिन ऑनलाइन सबमिशन बिना इसे भरे पूरा नहीं हो पाता था. डाउनलोड वाले ऑफलाइन फॉर्म में यह हिस्सा नहीं था.
चुनाव आयुक्तों के बीच भी असहमति
मुख्य चुनाल आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा अन्य दो चुनाव आयुक्त इसके पक्ष में नहीं थे. सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने इसे ‘अनाधिकृत और अवैध’ बताया. उनका कहना था कि फॉर्म 6 वैधानिक है और नियमों में संशोधन (जो केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में है) के बिना इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता.
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उन्होंने इसे पहली बार वोट देने वालों और युवा वोटर के लिए मुश्किलों वाला बताया था. चुनाव आयोग का पक्ष था कि मूल फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ, बल्कि SIR के लिए अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई है, और सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR मामले में संबंधित घोषणा को बरकरार रखा था. वहीं, पूरे विवाद के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठे. उन्हें हटाने की मांग की गई. फिलहाल मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है. इससे पहले शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है.