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कला या सियासत? रेहान वाड्रा की 'फोटो प्रदर्शनी' से क्यों हटवाई गईं 70 से ज्यादा तस्वीरें? जानें क्या है मामला
दिल्ली के बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी से युवा प्रदर्शनों और तिरंगे की तस्वीरें हटाने के कथित दबाव पर विवाद खड़ा हो गया है. मामले पर प्रियंका गांधी ने भी नाराजगी जताई है.
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दिल्ली के बीकानेर हाउस में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और फोटोग्राफर रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. रेहान का आरोप है कि प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले प्रबंधन ने उनसे हाल के युवा विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी तस्वीरें हटाने को कहा. उन्होंने दावा किया कि भारतीय तिरंगे की दो तस्वीरें हटाने के लिए भी कहा गया, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया. इस मामले पर प्रियंका गांधी ने भी नाराजगी जताई है.
क्या है 'नो आइडिया इज फाइनल' प्रदर्शनी का मामला?
रेहान वाड्रा ने अपनी एकल फोटो प्रदर्शनी का नाम 'नो आइडिया इज फाइनल' रखा है. इसका प्रिव्यू बुधवार को आयोजित किया गया, जबकि गुरुवार से इसे आम लोगों के लिए खोला गया. यह प्रदर्शनी रविवार तक चलने वाली है. इसमें वन्यजीवों की फोटोग्राफी, अमूर्त कलाकृतियों और भारत में युवाओं के हालिया आंदोलनों से जुड़ी तस्वीरों को शामिल किया गया था. रेहान के मुताबिक, प्रदर्शनी के लिए शुरुआत में 100 से अधिक तस्वीरें रखी गई थीं. इनमें से 70 से ज्यादा तस्वीरें हटानी पड़ीं और करीब 40 तस्वीरें ही प्रदर्शित की जा सकीं. उनका कहना है कि हटाई गई तस्वीरें पिछले छह महीनों के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों का दृश्य दस्तावेजीकरण थीं. उनके अनुसार, इन तस्वीरों के जरिए किसी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना या कोई राजनीतिक संदेश देना उद्देश्य नहीं था.
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रेहान ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
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रेहान ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने आरोप लगाया कि बीकानेर हाउस प्रबंधन ने उनकी प्रदर्शनी से अधिकांश कलाकृतियां हटाने के लिए कहा. उनके मुताबिक, यह मांग कार्यक्रम शुरू होने से कुछ घंटे पहले की गई, जबकि प्रदर्शनी का प्रस्ताव और उसका लेआउट पहले ही प्रबंधन के साथ साझा किया जा चुका था. रेहान ने कहा कि एक भारतीय कलाकार के तौर पर उन्हें लगा कि देश में जो कुछ हो रहा है, उसे तस्वीरों के माध्यम से दर्ज करना उनका कर्तव्य है. उन्होंने तस्वीरों को हटाने की मांग पर सवाल उठाते हुए इसे कलाकारों के काम पर रोक लगाने जैसा बताया. उनका दावा है कि प्रबंधन ने मौजूदा राजनीतिक माहौल का हवाला देते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी तस्वीरों को दिखाने का यह सही समय नहीं है. हालांकि, तस्वीरें हटाने के मामले में रेहान के आरोपों और प्रबंधन के आधिकारिक पक्ष को अलग-अलग देखना जरूरी है. उपलब्ध जानकारी में प्रबंधन की ओर से इस फैसले की विस्तृत वजह सामने नहीं आई है.
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तिरंगे की तस्वीरों को लेकर भी विवाद
इस पूरे मामले में भारतीय तिरंगे की दो तस्वीरों का जिक्र भी अहम है. रेहान का आरोप है कि उनसे इन तस्वीरों को हटाने के लिए कहा गया था. उन्होंने ऐसा करने से इनकार करते हुए कहा कि वह भारतीय ध्वज की तस्वीर नहीं हटाएंगे. इस दावे के सामने आने के बाद विवाद ने और ध्यान खींचा है. किसी प्रदर्शनी में तस्वीरों को शामिल करने या हटाने का फैसला किन नियमों के तहत लिया गया, यह जानना भी जरूरी है. खासकर तब, जब कलाकार का कहना हो कि उसकी तस्वीरें किसी राजनीतिक टिप्पणी के बजाय घटनाओं का दृश्य रिकॉर्ड हैं. इस मामले में प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही फैसले के पीछे की परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा.
प्रियंका गांधी ने जताई आपत्ति
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रेहान की मां और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी तस्वीरें हटाए जाने पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी तस्वीरों में न कोई टिप्पणी थी और न ही किसी के खिलाफ अपमानजनक सामग्री. प्रियंका के मुताबिक, ये तस्वीरें केवल विरोध प्रदर्शनों का दृश्य दस्तावेजीकरण थीं. उन्होंने इस कार्रवाई को युवाओं की आवाज दबाने से जोड़ते हुए चिंता जताई कि अगर किसी कलाकार के साथ ऐसा होता है, तो भविष्य में दूसरे कलाकारों के काम पर भी असर पड़ सकता है. उनका बयान इस विवाद को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक संस्थानों में कला के प्रदर्शन से जुड़ी बहस तक ले गया है.
क्या इस विवाद का कोई राजनीतिक पहलू भी है?
रेहान वाड्रा राजनीतिक परिवार से आते हैं और उन्हें कुछ मौकों पर अपनी मां प्रियंका गांधी के साथ भी देखा गया है. ऐसे में उनकी प्रदर्शनी और उसमें विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरों को लेकर राजनीतिक चर्चा होना स्वाभाविक है. हालांकि, यह दावा कि प्रदर्शनी के जरिए किसी राजनीतिक मुद्दे को दोबारा हवा देने की कोशिश की गई या रेहान को राजनीति में लाने की तैयारी है, उपलब्ध जानकारी से साबित नहीं होता. ऐसे निष्कर्ष निकालने के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं.
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बताते चलें कि विवाद के केंद्र में रेहान के आरोप, तस्वीरें हटाए जाने का फैसला और प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया है. यह मामला एक बड़ा सवाल भी उठाता है कि सार्वजनिक स्थानों पर कला के प्रदर्शन से जुड़े फैसले किस आधार पर लिए जाने चाहिए. प्रदर्शनी जारी है, लेकिन तस्वीरों को लेकर उठा विवाद अब कला, अभिव्यक्ति और राजनीति के बीच संबंधों पर नई चर्चा शुरू कर चुका है.