जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

चुनाव आयोग में कथित मतभेद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की बड़ी बैठक, SIR को लेकर हो गया बड़ा फैसला

चुनाव आयोग में कथित विवाद को लेकर आई एक अंग्रेजी अख़बार की रिपोर्ट और विपक्ष के हमले के बीच निर्वाचन सदन में एक बड़ी बैठक हुई. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त भी मौजूद रहे. इस दौरान SIR को लेकर बड़ा फैसला लिया गया.

Author
26 Sep 2026
( Updated: 26 Sep 2026
06:47 PM )
चुनाव आयोग में कथित मतभेद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की बड़ी बैठक, SIR को लेकर हो गया बड़ा फैसला
Image Source: ECI
Advertisement

चुनाव आयोग में कथित विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त-दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच फैसलों को लेकर कथित मतभेद को लेकर मचे विवाद के बीच दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में ECI की बड़ी बैठक हुई. इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे. 

दिल्ली में चुनाव आयोग की बड़ी बैठक!

आपको बता दें कि ये बैठक ऐसे वक्त में हुई है जब एक अंग्रेजी अखबार की एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि कथित तौर पर SIR और नाम कटने से संबंधित फैसलों को लेकर चुनाव आयोग में एकराय नहीं थी और तीन सदस्यीय आयोग में फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले कर रहे हैं, जबकि किसी भी फैसले के लिए सर्वसम्मति या बहुमत का होना जरूरी है. इसी रिपोर्ट के आने के बाद से विपक्ष हमलावर है और CEC ज्ञानेश कुमा के इस्तीफे की मांग कर रहा है. इतना ही नहीं विपक्ष की ओर से महाभियोग प्रस्ताव भी लाने की तैयारी की जा रही है.

जिन्हें SIR का नोटिस जारी किया गया, उन्हें चुनाव आयोग ने दी राहत!

इस सब विवादों के बीच हुई इस बैठक में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए कई अहम फैसले लिए हैं. आयोग की शनिवार को हुई बैठक में तय किया गया कि अनमैप्ड और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के मामलों में नोटिस पाने वाले लोगों को सुनवाई के लिए ईआरओ/एईआरओ कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी. 

Advertisement

यानी कि SIR के दौरान जिन लोगों को नाम मैप नहीं होने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण नोटिस भेजा गया है, BLO उनके घर जाकर जरूरी दस्तावेज जमा करेंगे. आयोग की बैठक 26 सितंबर को दोपहर तीन बजे हुई. 

बैठक में लिए गए फैसलों के अनुसार, ऐसे लोगों के घर जाकर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे. इसके बाद संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) दस्तावेजों के आधार पर फैसला करेंगे.

आयोग ने कहा कि केवल विशेष परिस्थितियों में, ईआरओ के निर्णय के अनुसार, सुनवाई आयोजित की जाएगी और इसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराया जाएगा. यदि सुनवाई की आवश्यकता पड़ती है तो मतदाता अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से अधिकृत कर सकता है. आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को और मजबूत करने का भी फैसला किया है.

जिला निर्वाचन अधिकारी गरीब, बेघर, मजदूरों के लिए हेल्प डेस्क स्थापित करेंगे

जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश दिया गया है कि वे जरूरत के अनुसार पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क स्थापित करें या विशेष शिविर आयोजित करें. इन सुविधाओं का लाभ रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों, बेघर लोगों और अन्य जरूरतमंदों को उपलब्ध कराया जाएगा.

Advertisement

आयोग ने कहा कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. वहीं, एसआईआर अवधि के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन नियम, 1960 के तहत लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा.

आयोग ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुरूप ईसीआईनेट प्रणाली में भूमिका-आधारित पहुंच दी गई है. ईसीआईनेट की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त (डीईसी) की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी. इसमें आईआईटी/आईआईआईटी के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा.

यह समिति यह दोबारा जांच करेगी कि ईसीआईनेट अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी.

Advertisement

आयोग ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेडेशन पहले ही किए जा चुके हैं. यदि फील्ड अधिकारियों को आगे किसी अतिरिक्त लचीलेपन की जरूरत होगी तो उसे भी लागू किया जाएगा. भविष्य में आईटी मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहलों को आयोग की मंजूरी से पहले कमेटी ऑफ ऑफिसर्स (सीओओ) में चर्चा के लिए रखा जाएगा.

महाराष्ट्र में SIR की समय सीमा बढ़ाई गई

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के अनुरोध को देखते हुए आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी है. नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण की अवधि भी बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 कर दी गई है. महाराष्ट्र में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है. महाराष्ट्र में नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण की समयसीमा 10 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है.

आयोग ने तय किया है कि उसकी सभी बैठकों के लिए एजेंडा पहले से प्रसारित किया जाएगा और बैठकों की कार्यवाही के मिनट्स जारी किए जाएंगे. इसके अलावा, सभी अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (अपार) हर वर्ष निर्धारित समयसीमा यानी 31 दिसंबर तक पूरी की जाएगी. अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा. आयोग ने यह भी कहा कि आयोग के आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को जारी सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा.

Advertisement

20 राज्यों में पूरा हुआ SIR?

आयोग ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर पहले ही पूरा हो चुका है. एसआईआर के दौरान या उसके बाद जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में छूट गए हैं, वे संबंधित ईआरओ के पास निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता भी शामिल हैं.

आयोग ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के निर्देश दिए गए हैं. सीईओ, डीईओ और ईआरओ इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए तत्काल विशेष अभियान शुरू करेंगे.

कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र के बारे में चुनाव आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी डिवीजन से संबंधित नहीं था. यह पत्र चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था. आयोग के अनुसार, संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-वितरण आदेशों को दोनों आयुक्तों के आदेश के बाद वास्तव में लागू नहीं किया गया था. साथ ही, आईटी डिवीजन की निगरानी से डीईसी की भूमिका वास्तव में कभी वापस नहीं ली गई.

Advertisement

आयोग ने कहा कि हाल के महीनों में उसने देशभर में एसआईआर समेत कई फैसले लिए हैं. 24 जून 2025 को बिहार से शुरू करते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था. इसके बाद पश्चिम बंगाल और 30 अन्य राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई.

चुनाव आयोग ने SIR पर जारी किया स्पष्टीकरण!

आयोग ने कहा कि एसआईआर के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के आदेश के जरिए बरकरार रखा था. 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का कार्यक्रम 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए कार्यक्रम 14 मई 2026 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया. आयोग ने कहा कि मतदाताओं की अंतिम संख्या तीसरे चरण में शेष 12 राज्यों में अंतिम प्रकाशन के बाद ही सामने आएगी.

Advertisement

गोवा को लेकर भी चुनाव आयोग ने जारी किए निर्देश!

आयोग ने बताया कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बीएलओ को निर्देश दिया है कि वे मतदाता सूची से छूटे मतदाताओं के घर-घर जाकर उनके फॉर्म एकत्र करें. आयोग के अनुसार, 97 में से 81 मतदाता पहले ही नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भर चुके हैं. आयोग ने कहा कि 26 सितंबर 2026 को हुई बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर यह प्रेस नोट जारी किया गया है और इसे पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त है.

जहां तक ज्ञानेश कुमार को हटाने को लेकर महाभियोक प्रस्ताव की कोशिशों की बात है तो इससे पहले भी मार्च 2026 में लोकसभा और राज्यसभा में 130 और 63 सांसदों के हस्ताक्षर वाले नोटिस दिए गए थे. हालांकि इसे 6 अप्रैल को खारिज कर दिया गया था.

ये भी पढ़ें: ‘राहुल गांधी को राजनीति का ज्ञान नहीं…’, CEC ज्ञानेश कुमार पर छिड़ा घमासान, कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा, BJP का पलटवार

Advertisement

क्या है चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्तों के बीच विवाद को लेकर दावा?

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे. 

ये भी पढ़ें: चुनावी माहौल के बीच CM योगी ने PM मोदी से की मुलाकात, करीब एक घंटे चली बैठक, इन मुद्दों पर हुआ मंथन

यह भी पढ़ें

इतना ही नहीं चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कथित तौर पर वोटर रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म 6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया और वोटर लिस्ट डेटाबेस पर सेंट्रलाइज़्ड कंट्रोल से संबंधित कई मुद्दों पर कथित तौर पर आपत्ति जताई थी, जिसका दावा रिपोर्ट में किया गया है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें