Advertisement
कुर्सी वही, पार्टी नई… 4 साल में 111 सांसद-विधायकों ने बदला पाला, 26% BJP में गए, रिपोर्ट में बड़ा दावा
पाला बदलने वालों पर ये चौंकाने वाली रिपोर्ट ADR यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच ने जारी की है. साल 2022 से लेकर 2026 तक 111 जनप्रतिनिधियों ने पार्टी बदली है.
Advertisement
ADR Report on MPs/MLAs Who Changed Political Parties: लोकतंत्र है तो चुनाव है, चुनाव हैं तो चुनावी पार्टियां हैं और जनता ही जनार्दन है, जनप्रतिनिधी पार्टी और नेता दोनों देखकर चुने जाते हैं, लेकिन अब जनप्रतिनिधी जनता के फैसले को नहीं बल्कि अपनी महत्वाकांक्षा को चुनते हैं. जो पार्टी मनचाहा ऑफर दे, उसी तरफ अपना रुख मोड़ दो. पिछले चार साल में 111 सांसदों और विधायकों ने पार्टी बदली है.
पाला बदलने वालों पर ये चौंकाने वाली रिपोर्ट ADR यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच ने जारी की है. जिसमें बताया गया है कि 2022 से 2026 के बीच चुनाव जीतने के बाद 111 सांसदों और विधायकों ने पार्टी बदली है.
राज्यवार पाला बदलने वाले सांसद विधायकों की लिस्ट
Advertisement
Advertisement
इस रिपोर्ट के मुताबिक, दल बदलने वाले सबसे ज्यादा नेता नगालौंड और पश्चिम बंगाल से हैं. हाल ही में हुए बंगाल चुनाव ताजा ही मामला है, जब TMC की हार के बाद कई सांसदों ने दल बदल कर BJP का दामन थाम लिया था.
वहीं नगालैंड में 32 विधायक NPF में शामिल हो गए. जबकि 25 विधायक NDPP के टिकट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. रिपोर्ट के मुताबिक, पाला बदलने वाले करीब 26% सांसद-विधायक BJP में शामिल हुए.
Advertisement
यह भी पढ़ें- कौन हैं मंदीप भंडारी? जो अब संभालेंगे CBSE में अहम जिम्मेदारी, OSM विवाद के बीच तीसरी नियुक्ति
यह भी पढ़ें
कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायक-सांसद 8% हैं. तेलंगाना में 9 MLA कांग्रेस में शामिल हुए, महाराष्ट्र में 6 सासंदों ने शिंदे गुट जॉइन किया. जबकि गोवा में 8 कांग्रेस विधायक BJP में चले गए. ये आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर विधायक और सांसद उस पार्टी में गए जिसकी सत्ता है, क्योंकि रिपोर्ट बताती है कि कई राज्य ऐसे भी हैं, जहां सांसद विधायकों के पाला बदलने से सरकार गिरी है या प्रभावित हुई है. हालांकि सर्वे करने वाले ADR और इलेक्शन वॉच ने रिपोर्ट के आंकड़ों को अंतिम नहीं माना है. संस्था के मुताबिक, नेताओं के पार्टी बदलने का कोई व्यवस्थित और आधिकारिक डेटाबेस नहीं मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक, सांसदों और विधायकों की अयोग्यता, दल बदल से जुड़े कुछ मामले राष्ट्रपति और लोकसभा स्पीकर के पास पेंडिंग भी हैं.