सावधान! किसी भी उम्र में हो सकता है मेनिनजाइटिस, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
मेनिनजाइटिस का संक्रमण किस तरह फैलेगा, यह उसके कारण पर निर्भर करता है। कई बैक्टीरिया नाक और गले में मौजूद हो सकते हैं और सांस की बूंदों या गले के स्राव के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंच सकते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों और लंबे समय तक नजदीकी संपर्क वाली परिस्थितियों में कुछ संक्रमणों के फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।
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मेनिनजाइटिस यानी दिमाग और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली झिल्लियों में होने वाला संक्रमण या सूजन एक गंभीर और खतरनाक चिकित्सीय स्थिति है। WHO के अनुसार ये बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। कुछ मामलों में तो ये तेज़ी से बेहद गंभीर रूप भी ले सकती है। खासकर बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
मेनिनजाइटिस होने के कारण
मेनिनजाइटिस कई कारणों से हो सकता है। इसके लिए बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और कुछ परजीवी जिम्मेदार हो सकते हैं। बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस के प्रमुख कारणों में - मेनिंगोकोकल, न्यूमोकोकस, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा और ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस शामिल हैं। किस उम्र में किस रोगजनक का खतरा अधिक है, यह व्यक्ति की उम्र, प्रतिरक्षा क्षमता और संक्रमण के संपर्क जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
नवजात शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस का खतरा अधिक हो सकता है, जबकि बच्चों और किशोरों में मेनिंगोकोकल, न्यूमोकोकस और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा महत्वपूर्ण कारण हैं।
समय रहते पहचाने इस बीमारी के लक्षण
इस बीमारी के लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। WHO के अनुसार, कुछ सामान्य लक्षण हैं -
तेज बुखार
सिरदर्द
गर्दन में अकड़न
उल्टी
रोशनी के प्रति संवेदनशीलता
भ्रम या मानसिक स्थिति में बदलाव
कुछ गंभीर मामलों में दौरे पड़ना, बेहोशी या हाथ-पैर में कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। हालांकि हर मरीज में सभी लक्षण एक साथ नजर आएं, यह जरूरी नहीं है।
शिशुओं में अलग हो सकते हैं लक्षण
शिशुओं में मेनिनजाइटिस के लक्षण थोड़े अलग हो सकते हैं। बच्चा सामान्य से कम सक्रिय हो सकता है, उसे जगाना मुश्किल हो सकता है, वह लगातार चिड़चिड़ा रह सकता है, ठीक से दूध नहीं पी सकता या लगातार कमजोर आवाज में रो सकता है। कुछ मामलों में सिर के ऊपरी हिस्से का मुलायम स्थान यानी फॉन्टानेल भी उभर सकता है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मेनिनजाइटिस का संक्रमण किस तरह फैलेगा, यह उसके कारण पर निर्भर करता है। कई बैक्टीरिया नाक और गले में मौजूद हो सकते हैं और सांस की बूंदों या गले के स्राव के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंच सकते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों और लंबे समय तक नजदीकी संपर्क वाली परिस्थितियों में कुछ संक्रमणों के फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।
बचाव के तरीके
बचाव की बात करें तो टीकाकरण मेनिनजाइटिस के कुछ सामान्य बैक्टीरियल कारणों से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है। मेनिंगोकोकल, न्यूमोकोकस और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा के खिलाफ टीके उपलब्ध हैं। इसके अलावा हाथों की नियमित सफाई रखना और संक्रमित व्यक्ति के साथ करीबी संपर्क तथा कप, बर्तन या टूथब्रश जैसी व्यक्तिगत चीजें साझा करने से बचना भी जरूरी है। किसी मेनिंगोकोकल संक्रमण वाले व्यक्ति के करीबी संपर्क में आने पर डॉक्टर जरूरत के अनुसार एंटीबायोटिक से बचाव की सलाह दे सकते हैं।
मेनिनजाइटिस हैं मेडिकल इमरजेंसी
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मेनिनजाइटिस को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है। तेज बुखार, गर्दन में अकड़न, तेज सिरदर्द, भ्रम, बार-बार उल्टी, दौरे या तेजी से बिगड़ती हालत जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस में इलाज शुरू करने में देरी, स्थिति को और गंभीर कर सकती है।
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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.