Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

डायबिटीज से लेकर अस्थमा तक, जानिए गोमुखासन के अनगिनत फायदे और इसे करने का तरीका

गोमुखासन का नाम दो शब्दों पर रखा गया है- गऊ और मुख। गऊ यानी गाय और मुख यानी चेहरा। गोमुखासन को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इस आसन में आपके जांघ और पिंडली गाय के चेहरे के समान मुद्रा में होते हैं: पीछे की ओर चौड़ा और सामने की तरफ पतला। इसमें अभ्यासकर्ता को सीधे बैठने की आवश्यकता होती है, साथ ही यह आसन को भी बेहतर बनाता है।

Image Credit: Gemini
Loading Ad...

आजकल लोग ज़्यादातर समय कंप्यूटर या डेस्क के सामने एक ही जगह बैठकर गुजारते हैं। घंटों एक ही पोश्चर में बैठे रहना और असंतुलित खानपान की वजह से कंधे, पीठ और कूल्हों में जकड़न एक आम समस्या बन गई है। ऐसे में 'गोमुखासन' एक ऐसा योगासन है जो न सिर्फ शरीर को लचीला बनाता है, बल्कि मन को शांत करने में भी मदद करता है। अगर आप नियमित रूप से इसका अभ्यास करेंगे तो यह न सिर्फ शरीर की अकड़न दूर करेगा बल्कि आपकी एकाग्रता और संतुलन भी बढ़ाएगा।

कैसे होता है गोमुखासन?

गोमुखासन का नाम दो शब्दों पर रखा गया है- गऊ और मुख। गऊ यानी गाय और मुख यानी चेहरा। गोमुखासन को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इस आसन में आपके जांघ और पिंडली गाय के चेहरे के समान मुद्रा में होते हैं: पीछे की ओर चौड़ा और सामने की तरफ पतला। इसमें अभ्यासकर्ता को सीधे बैठने की आवश्यकता होती है, साथ ही यह आसन को भी बेहतर बनाता है।

Loading Ad...

हालंकि, यह आसन करने में आसान है लेकिन शुरुआती अभ्यासकर्ता इसे किसी विशेषज्ञ की देखरेख में करें। आयुष मंत्रालय के अनुसार, गोमुखासन एक अत्यंत प्रभावशाली बैठकर किया जाने वाला योगासन है। इस आसन में पैरों और घुटनों की आकृति गाय के मुख के समान दिखाई देती है, इसलिए इसे गोमुखासन कहा जाता है। यह आसन छाती को खोलता है, जिससे श्वसन स्वास्थ्य बेहतर होता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है।

Loading Ad...

अस्थमा के मरीज़ों के लिए फायदेमंद 

यह आसन अस्थमा के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना गया है क्योंकि यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है और सांस लेने की प्रक्रिया को सुचारु करता है।

Loading Ad...

डायबिटीज के मरीजों को भी गोमुखासन करने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह योगासन शरीर के अंदरूनी अंगों पर बेहतरीन असर डालता है। इसे करने से ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है और पाचन तंत्र भी बेहतर होता है। इसके साथ ही यह हृदय के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसे करने से तनाव कम होता है, जिससे दिल पर दबाव नहीं पड़ता और ब्लड प्रेशर भी संतुलित रहता है।

गर्भवती महिलाओं को बिना विशेषज्ञ की सलाह के यह आसन नहीं करना चाहिए। यदि किसी भी व्यक्ति के कंधों, गर्दन, घुटनों या कूल्हों में कोई गंभीर चोट या पुराना दर्द है, तो यह आसन न करें।

यह भी पढ़ें

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...