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कहां है बसा सिद्धबली मंदिर, भगवान हनुमान के दरबार से कोई निराश नहीं लौटता, मनोकामना पूरी होने पर भक्त तोड़ते हैं नारियल

मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और बाबा के दरबार से कोई निराश नहीं लौटता. यहां नारियल चढ़ाने और नारियल तोड़ने की विशेष परंपरा है. मंदिर के चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियों की श्रृंखलाएं और शांत प्राकृतिक वातावरण है, जो भक्तों को अलौकिक शांति प्रदान करता है.।

Image Credits: @pushkardhami/X/
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देवभूमि उत्तराखंड अपनी अलौकिक आध्यात्मिक चेतना और प्राकृतिक वैभव के लिए जाना जाता है. इसी पावन धरा पर गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में खोह नदी के तट पर स्थित 'श्री सिद्धबली मंदिर' भगवान हनुमान को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्राचीन सिद्धपीठ है.

 सीएम धामी ने मंदिर के लिए एक खास पोस्ट किया

शिवालिक पहाड़ियों की शांत गोद में बसा यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का भी एक अनुपम स्रोत है. मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर के लिए एक खास पोस्ट किया.

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उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का विशेष वीडियो पोस्ट कर लिखा, "पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित सिद्धबली मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है. यह मंदिर खास तौर पर हनुमान जयंती और दूसरे धार्मिक आयोजनों के मौके पर बड़ी संख्या में भक्तों को अपनी ओर खींचता है. यह पवित्र जगह अपने शानदार माहौल, लगातार हनुमान चालीसा के पाठ और खास रस्मों के लिए मशहूर है."

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बाबा के दरबार से कोई निराश नहीं लौटता

मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और बाबा के दरबार से कोई निराश नहीं लौटता. यहां नारियल चढ़ाने और नारियल तोड़ने की विशेष परंपरा है. मंदिर के चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियों की श्रृंखलाएं और शांत प्राकृतिक वातावरण है, जो भक्तों को अलौकिक शांति प्रदान करता है.

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किसने इस पवित्र स्थल पर लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी

स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी स्थान पर गुरु गोरखनाथ और हनुमान जी महाराज के बीच भेंट व साधना से जुड़े प्रसंग का उल्लेख मिलता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, नाथ संप्रदाय के महान गुरु गुरु गोरखनाथ ने अपने शिष्यों और अनुयायियों के साथ इस पवित्र स्थल पर लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी.

भगवान हनुमान ने किसे यहीं साक्षात दर्शन दिए थे

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कहा जाता है कि उनकी साधना से प्रसन्न होकर भगवान हनुमान ने उन्हें यहीं साक्षात दर्शन दिए थे. इसी कारण इस स्थान का नाम 'सिद्धबली' (सिद्ध यानी तपस्या से पूर्ण और बली यानी बलशाली हनुमानजी) पड़ा. मंदिर के गर्भ गृह में भगवान हनुमान की मूर्ति स्थापित होने से पहले प्राचीन काल से ही 'सिद्ध पिंडियां' विद्यमान हैं, जिनकी पूजा यहां मुख्य रूप से की जाती है.

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