Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

नवरात्र का तीसरा दिन : मां चंद्रघंटा की होगी पूजा-अर्चना; घंटानाद से दुष्ट शक्तियों का होता है नाश, क्या करने से भक्तों पर मां की कृपा बनी रहती है

मां के स्वरूप में चंद्रमा शांति और शीतलता का प्रतीक माना जाता है, जबकि घंटा नाद शक्ति, जागृति और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का संदेश देता है. माता का यह स्वरूप भक्तों को यह प्रेरणा देता है कि जीवन में शांति और धैर्य बनाए रखते हुए अन्याय तथा बुराई के विरुद्ध साहस के साथ खड़ा होना चाहिए.

Image Credits: @ombirlakota/X
Loading Ad...

नवरात्र के पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है. नवरात्र के तीसरे दिन आज मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा की जाएगी.  

मां का नाम चंद्रघंटा कैसे पड़ा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा शांति, साहस, शक्ति और पराक्रम की प्रतीक हैं. उनकी आराधना करने से भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख, शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. माता चंद्रघंटा अपने भक्तों की रक्षा करने वाली और दुष्ट शक्तियों का विनाश करने वाली देवी के रूप में पूजित हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है, जो घंटे के आकार का दिखाई देता है. इसी कारण उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा. उनके हाथों में अस्त्र-शस्त्र के साथ घंटा भी विराजमान है.

Loading Ad...

घंटानाद से दुष्ट शक्तियों का होता है नाश 

Loading Ad...

मां के स्वरूप में चंद्रमा शांति और शीतलता का प्रतीक माना जाता है, जबकि घंटा नाद शक्ति, जागृति और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का संदेश देता है. माता का यह स्वरूप भक्तों को यह प्रेरणा देता है कि जीवन में शांति और धैर्य बनाए रखते हुए अन्याय तथा बुराई के विरुद्ध साहस के साथ खड़ा होना चाहिए. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवासुर संग्राम के दौरान माता चंद्रघंटा के घंटे से निकले दिव्य नाद ने असुरों में भय उत्पन्न कर दिया था. देवी के घंटानाद से अनेक असुर काल के ग्रास बन गए थे.

माता का यह स्वरूप किसका प्रतीक माना जाता है

Loading Ad...

माता का यह स्वरूप बुराई पर अच्छाई की विजय और अधर्म पर धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है. उनकी आराधना से भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होने की मान्यता है. नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. पूजा के दौरान माता को पुष्प, अक्षत, धूप, दीप और फल अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद मां के मंत्रों का जाप और दुर्गा चालीसा का पाठ किया जाता है.

माता को कौनसे वस्त्र और पुष्प अर्पित करना भी शुभ माना जाता है

भक्त मां की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और सुरक्षा की कामना करते हैं. धार्मिक परंपराओं में माता को लाल और पीले रंग के वस्त्र एवं पुष्प अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. माता चंद्रघंटा की उपासना का संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में संतुलन, संयम और निर्भीकता बनाए रखने की प्रेरणा भी देती है. मां का स्वरूप सिखाता है कि शांत स्वभाव के साथ अन्याय के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा होना आवश्यक है.

Loading Ad...

 ‘भक्तों पर मां की कृपा बनी रहती है’

यह भी पढ़ें

नवरात्र के तीसरे दिन मंदिरों में श्रद्धालु मां के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से माता की आराधना करने वाले भक्तों पर मां की कृपा बनी रहती है और उन्हें जीवन की कठिनाइयों का सामना करने का संबल मिलता है.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...