2026 का अद्भुत संगम, दुनिया के तीन सबसे बड़े धर्मों ईसाई, इस्लाम और हिंदू के व्रत एक साथ, जानें क्यों खास है यह साल?
साल 2026 एक दुर्लभ आध्यात्मिक संगम का साक्षी बन रहा है, जहां चैत्र नवरात्रि, माह-ए-रमजान और लेंट के पावन पर्व लगभग एक साथ ही पड़ रहे हैं.
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साल 2026 धार्मिक सद्भाव का गवाह बनने जा रहा है. दुनिया के तीन प्रमुख धर्मों- ईसाई, इस्लाम और हिंदू धर्म के पवित्र उपवास का महीना लगभग एक ही समय पर आ रहे हैं. जी हां, चैत्र नवरात्रि, रमजान का पाक महीना और ईसाई धर्म का ‘लेंट’ काल एक ही साथ होना महज संयोग नहीं, बल्कि एक अद्भुत आध्यात्मिक संगम भी है.
तीनों धर्मों में उपवास की ये हैं तिथियां
तिथि और कैलेंडर के अनुसार, जहां चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से 27 मार्च 2026 तक मनाई जाएगी, वहीं माह-ए-रमजान की शुरुआत भी 19 फरवरी से हो रही है. इसके साथ ही, ईसाई धर्म में भी 18 फरवरी से 40 दिनों का पवित्र उपवास पर्व ‘लेंट’ शुरु हो चुका है. आइए, अब आपको इन तीनों पर्वों के महत्व को बताते हैं.
चैत्र नवरात्रि का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से होने जा रही है. यह पर्व नौ दिनों तक चलेगा और 27 मार्च, दिन शुक्रवार को खत्म हो जाएगा. इन नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरुपों की भक्ति करते हैं. यह समय आत्म-शुद्धि, सात्विक भोजन और मानसिक शांति का होता है.
रमजान के पाक महीने का महत्व
इस्लाम में रमजान के महीने का विशेष महत्व है. इस दौरान पूरी दुनिया के मुसलमान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रोजा (Fasting) रखते हैं. इसके अलावा इस महीने में इबादत करना, विशेष रूप से गरीबों के लिए चैरिटी करना, आत्मसंयम, आध्यात्मिक शुद्धि का बड़ा ही महत्व है. रोजा रखने और इबादत करने के साथ-साथ, इस पूरे महीने में गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना भी इस्लाम में बहुत पूण्य का काम माना जाता है.
त्याग और प्रार्थना का पर्व लेंट
ईसाई धर्म में ईस्टर आने से पहले 40 दिनों तक चलने वाले त्याग और उपवास के समय को ‘लेंट’ (Lent) कहा जाता है. साल 2026 में 18 फरवरी से इसकी शुरूआत हो चुकी है, जो 2 अप्रैल तक जारी रहेगी. यह पर्व प्रभू ईसा मसीह के उन 40 दिनों की याद में मनाया जाता है, जो उन्होंने अपने सार्वजनिक उपदेशों की शुरुआत से पहले जंगल में रहकर प्रार्थना और व्रत में गुजारे थे.
क्यों खास है यह संयोग?
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तीन बड़े धर्मों के प्रमुख उपवास काल का एक साथ आना केवल कैलेंडर का संयोग नहीं बल्कि, इनके मूल सिद्धांतों पर ध्यान दें, तो पता चलता है कि तीनों धर्मों कि संदेश और उद्देश्य एक ही है. आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और मानवता की सेवा. यही मूल सिद्धांत तीनों धर्मों के इन पर्वों को खास बनाता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है.
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