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उत्तराखंड की पहाड़ियों में विराजती हैं मां चिल्ठा देवी, जानें इस पवित्र धाम की महिमा, CM धामी ने भी की दर्शन की अपील
मां चिल्ठा देवी को आदिशक्ति भगवती का ही एक स्वरूप माना जाता है. स्थानीय लोग इन्हें 'छठ की भगवती' के रूप में भी पूजते हैं. मान्यता है कि देवी ने यहां स्थानीय लोगों को बाल रूप में दर्शन दिए थे. मंदिर के आसपास नाग देवता, दूधाधारी देवता, उहाण देवता, वीरंग देवता और भैरव देवता के भी छोटे मंदिर और स्थान बने हुए हैं.
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उत्तराखंड की देवभूमि में आस्था के कई ऐसे धाम हैं, जहां पहुंचकर मन को असीम शांति मिलती है. ऐसा ही एक पवित्र स्थान है बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र में स्थित 'मां चिल्ठा देवी मंदिर'. स्थानीय लोग मां चिल्ठा देवी को 'छठ की भगवती' के रूप में पूजते हैं.
कपकोट की ऊंची पहाड़ी पर विराजती हैं चिल्ठा देवी मंदिर
ऊंची-ऊंची पहाड़ियों, हरी-भरी वादियों और शांत वातावरण के बीच बसा यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा और प्रकृति के अद्भुत संगम का प्रतीक है. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां मां के दर्शन करने और मनोकामना मांगने आते हैं. माना जाता है कि मां चिल्ठा देवी अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं और उनकी कृपा से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.
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CM धामी ने लोगों से की यहाँ आकर दर्शन करने की अपील
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए सभी से मंदिर दर्शन करने कि अपील की. उन्होंने लिखा, "बागेश्वर जिले के कपकोट इलाके की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बसा मां चिल्ठा देवी का पवित्र धाम आस्था, भक्ति और प्रकृति की खूबसूरती का अद्भुत संगम है. देवभूमि की समृद्ध धार्मिक विरासत और उसकी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता को करीब से महसूस करने के लिए बागेश्वर की यात्रा के दौरान मां चिल्ठा देवी के दर्शन जरूर करें."
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यह मंदिर कपकोट तहसील के दूरवर्ती सुपी गांव के ऊपर एक ऊंची पहाड़ी के शिखर के पास स्थित है.
देवी ने यहां स्थानीय लोगों को बाल रूप में दर्शन दिए थे
मां चिल्ठा देवी को आदिशक्ति भगवती का ही एक स्वरूप माना जाता है. स्थानीय लोग इन्हें 'छठ की भगवती' के रूप में भी पूजते हैं. मान्यता है कि देवी ने यहां स्थानीय लोगों को बाल रूप में दर्शन दिए थे. मंदिर के आसपास नाग देवता, दूधाधारी देवता, उहाण देवता, वीरंग देवता और भैरव देवता के भी छोटे मंदिर और स्थान बने हुए हैं.
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मंदिर के चारों ओर बांज और बुरांस के घने जंगल हैं. यहां से मौसम साफ होने पर नंदा देवी, नंदा कोट, पंचाचूली और पिंडारी ग्लेशियर जैसी ऊंची हिमालयी चोटियों के भव्य दर्शन होते हैं. चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना और मेलों का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.