लालबागचा राजा मंडल में 91 वर्षों से पूरी हो रही है हर मन्नत! बप्पा की एक झलक पाने के लिए उमड़ रही भक्तों की भीड़

मुंबई का सबसे अधिक लोकप्रिय सार्वजनिक गणेश मंडल लालबागचा राजा लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है. लालबाग परेल क्षेत्र में स्थित यह पंडाल हर साल गणेश चतुर्थी के दौरान दुनियाभर से भक्तों को अपनी ओर खींचता है.

Author
01 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
01:51 PM )
लालबागचा राजा मंडल में 91 वर्षों से पूरी हो रही है हर मन्नत! बप्पा की एक झलक पाने के लिए उमड़ रही भक्तों की भीड़
Lalbaghcha Raja

हर साल जब गणेश चतुर्थी का त्योहार आता है तो मुंबई की गलियों से लेकर मंदिरों तक एक अलग ही रौनक दिखाई देती है. ढोल-ताशों की गूंज, बप्पा के स्वागत में लगने वाले जयघोष, फूलों से मंडलों की सजावट और उन्हें देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़, ये सब मिलकर इस त्योहार को बेहद खास बना देते हैं. इस बार गणेश चतुर्थी के दौरान भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने के लिए मिल रहा है. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई इस आयोजन में शामिल होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. हर कोई मुंबई में मौजूद लालबागचा राजा के दर्शन करना चाहता है.

क्या सच में लालबागचा राजा करते हैं भक्तों की मनोकामना की पूर्ति?

मुंबई का सबसे अधिक लोकप्रिय सार्वजनिक गणेश मंडल लालबागचा राजा लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है. लालबाग परेल क्षेत्र में स्थित यह पंडाल हर साल गणेश चतुर्थी के दौरान दुनियाभर से भक्तों को अपनी ओर खींचता है. यहां श्रद्धालु न सिर्फ दर्शन के लिए, बल्कि मन की मुरादें पूरी करने की आस लेकर दूर-दूर से आते हैं. ऐसी मान्यता है कि जो भी सच्चे दिल से लालबागचा राजा से प्रार्थना करता है, उसकी हर मुराद जरूर पूरी होती है. इसलिए तो इन्हें 'मन्नतों का राजा' भी कहा जाता है.

लालबागचा राजा की मूर्ति की ऊंचाई कितनी है?

हर साल की तरह बड़ी और मशहूर हस्तियों के साथ-साथ लाखों की संख्या में भक्त यहां बप्पा के दर्शन करने आ रहे हैं. इस बार यहां गणपति की 22 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित की गई, जो तमिलनाडु के रामेश्वरम की पौराणिक कथा से प्रेरित है. लालबागचा राजा मंडल के उपाध्यक्ष सिद्धेश कोरगावकर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "यह लालबाग इलाके का सबसे पुराना गणपति है. इस बार उनकी 22 फीट ऊंची मूर्ति बनाई गई है." उन्होंने कहा कि मूर्ति और इसकी सजावट में रामेश्वरम की थीम को दर्शाया गया है, जिसमें हनुमानजी रामेश्वरम से भगवान शंकर का पिंड लेकर आते हैं.

आखिर कब हुई लालबागचा राजा मंडल की स्थापना?

लालबागचा राजा मंडल की स्थापना साल 1934 में हुई थी. दरअसल, करीब नौ दशक पहले कुछ मछुआरों और दुकानदारों ने मिलकर बप्पा से बाजार के लिए एक पक्की जगह मिलने की मन्नत मांगी थी. जब उनकी यह मन्नत पूरी हुई तो उन्होंने आभार स्वरूप एक छोटी सी गणेश मूर्ति स्थापित की. वहीं से यह परंपरा शुरू हुई और आज 91 साल बाद भी पूरी आस्था के साथ निभाई जा रही है.

लालबागचा राजा के दर्शन के लिए लगती है 2 विशेष लाइनें

लालबागचा राजा के दर्शन के लिए दो मुख्य कतारें होती हैं. एक होती है 'नवसाची लाइन', जिसमें वे लोग लगते हैं जो अपनी किसी विशेष मन्नत लेकर बप्पा के चरणों तक जाना चाहते हैं. इस लाइन में दर्शन के लिए 25 से 40 घंटे तक का समय भी लग सकता है. दूसरी लाइन होती है "मुखदर्शन लाइन", जिसमें भक्त बप्पा को दूर से देख सकते हैं. यह लाइन अपेक्षाकृत छोटी होती है. कई बार यहां 4 से 5 घंटे लग जाते हैं.

भक्तों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम

यह भी पढ़ें

हर बार की तरह इस साल भी गणेश चतुर्थी पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. मंडल द्वारा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. हजारों पुलिसकर्मी और स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. पंडाल के अंदर भी श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल असिस्टेंस, पानी और शौचालय जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.

Tags

Advertisement

टिप्पणियाँ 0

Advertisement
Podcast video
Startup का सच बताकर Abhishek Kar ने दे दिया करोड़पति बनने का गुरु मंत्र!
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें