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पुष्कर में पिंडदान से पितरों को मिलती है शांति? जानिए 52 घाटों से जुड़ी धार्मिक मान्यता
पुष्कर सरोवर के 52 घाट धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इनमें वराह घाट, ब्रह्मा घाट और गौ घाट प्रमुख हैं. श्रद्धालु इन घाटों पर स्नान, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं. पुष्कर झील को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं.
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ब्रह्माजी की नगरी और तीर्थ गुरु के रूप में प्रसिद्ध पुष्कर में पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. पुष्कर सरोवर के 52 घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचते हैं. मान्यताओं के अनुसार, पुष्कर तीर्थ में पितरों के लिए किए गए श्राद्ध और पिंडदान से उन्हें तृप्ति, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण का महत्व
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हिंदू धर्म में 15 दिवसीय पितृ पक्ष को पितरों के स्मरण और उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान और अन्य अनुष्ठान करने का समय माना जाता है. देश के कई तीर्थ स्थलों पर श्राद्ध कर्म किए जाते हैं, लेकिन पुष्कर को तीर्थ गुरु माना जाने के कारण यहां श्राद्ध और पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है. यही वजह है कि पितृ पक्ष में हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों का श्राद्ध करने के लिए पुष्कर पहुंचते हैं. मान्यता है कि पितृ पक्ष या किसी विशेष अवसर पर पुष्कर में श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
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भगवान श्रीराम से जुड़ी है पिंडदान की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ पुष्कर पहुंचकर अपने पिता महाराज दशरथ का श्राद्ध और पिंडदान किया था. श्रीराम ने बालू और जल से पिंड बनाकर महाराज दशरथ का तर्पण और श्राद्ध किया. इसी पौराणिक प्रसंग के कारण पुष्कर सरोवर और इसके 52 घाटों पर पितृ कर्म करने की परंपरा को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है.
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52 घाटों पर होते हैं धार्मिक अनुष्ठान
पुष्कर सरोवर के 52 घाट धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इनमें वराह घाट, ब्रह्मा घाट और गौ घाट प्रमुख हैं. श्रद्धालु इन घाटों पर स्नान, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं. पुष्कर झील को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं. एक मान्यता के अनुसार, इसका पवित्र जल विष्णु की नाभि से निकला था, जबकि दूसरी कथा में कहा गया है कि ब्रह्मा द्वारा कमल का फूल गिराए जाने से पुष्कर सरोवर का अस्तित्व हुआ. इसी धार्मिक महत्व के कारण पुष्कर लंबे समय से हिंदू श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल माना जाता है.
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पिंडदान से जुड़ी है मोक्ष की मान्यता
मान्यता के अनुसार, जन्म और पुनर्जन्म के कर्म चक्र से मुक्ति तथा दिवंगत प्रियजनों और पूर्वजों की आत्मा के कल्याण के लिए पिंडदान किया जाता है. अश्विन माह में पिंडदान का महत्व और अधिक माना गया है.
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पद्म पुराण में भी पुष्कर तीर्थ में किए गए श्राद्ध और पिंडदान को पितरों की तृप्ति और उन्हें उच्च लोक की प्राप्ति से जोड़ा गया है. इसी के चलते पितृ पक्ष में पुष्कर सरोवर के 52 घाटों पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचकर अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं.