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Dhanteras 2026: 6 नवंबर को कब करें लक्ष्मी-धन्वंतरि पूजा? जानें शुभ समय और पंचांग
6 नवंबर को राहुकाल सुबह 10 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 5 मिनट तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल के दौरान कोई नया या मांगलिक काम शुरू करने से बचना चाहिए, हालांकि इस समय पहले से चल रहे नियमित कार्य किए जा सकते हैं.
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हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व होता है. किसी भी शुभ काम, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश या नए काम की शुरुआत करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों से अच्छे परिणाम मिलते हैं.
6 नवंबर का पंचांग
पंचांग के अनुसार, 6 नवंबर को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी, जो सुबह 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगी. इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी. इस दिन धनतेरस पड़ रहा है. इस दिन हस्त नक्षत्र और विष्कुम्भ योग का संयोग रहेगा. वहीं, करण की बात करें तो सुबह 10 बजकर 30 मिनट तक तैतिल करण रहेगा. इसके बाद गर करण लग जाएगा. शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और शुक्र देव को समर्पित माना जाता है. ऐसे में इस दिन पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व रहता है.
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नई दिल्ली के समय के अनुसार, 6 नवंबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 32 मिनट पर होगा. इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में विराजमान रहेंगे. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. पंचांग में इनकी स्थिति के आधार पर ही दिन के शुभ और अशुभ समय की गणना की जाती है.
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अभिजीत मुहूर्त
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शुभ काम करने के लिए अभिजीत मुहूर्त को काफी अच्छा माना जाता है. 6 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा. इस दौरान नए काम की शुरुआत, पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं.
धनतेरस पर पूजा और खरीदारी का विशेष महत्व
वहीं, धनतेरस के अवसर पर पूजा और खरीदारी के लिए प्रदोष काल का विशेष महत्व रहेगा. पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 49 मिनट से रात 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. खास बात यह है कि शाम 6 बजकर 21 मिनट से रात 8 बजकर 14 मिनट तक हस्त नक्षत्र में खरीदारी और पूजा के लिए शुभ संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा करना शुभ माना जाता है.
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6 नवंबर को राहुकाल सुबह 10 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 5 मिनट तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल के दौरान कोई नया या मांगलिक काम शुरू करने से बचना चाहिए, हालांकि इस समय पहले से चल रहे नियमित कार्य किए जा सकते हैं.
इस दिशा में यात्रा करने से बचे
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शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा. मान्यता है कि इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, हालांकि अगर किसी जरूरी काम से यात्रा करनी पड़े तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ पारंपरिक उपाय करके घर से निकल सकते हैं.