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निर्यात में UP की बड़ी छलांग, 10 साल में ढाई गुना बढ़कर 2 लाख करोड़ के पार पहुंचा, कालीन उद्योग बना वैश्विक पहचान

योगी सरकार में UP के निर्यात को पंख लग गए. 2017 के बाद निर्यात मूल्य 2.4 गुना बढ़ गया है. इसमें भदोही-मिर्जापुर-वाराणसी क्लस्टर का बड़ा योगदान है.

Image Source- NMF Input
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को निर्यात के मोर्चे पर नई रफ्तार मिली है. प्रदेश का निर्यात अब पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, खाद्य-डेयरी और अन्य क्षेत्रों के उत्पादों ने भी वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत जगह बनाई है.

इसी बदलती तस्वीर में पूर्वांचल का कालीन उद्योग भी यूपी की निर्यात पहचान को दुनिया के बाजार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है. भदोही में आयोजित 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो इस वैश्विक पहचान का बड़ा मंच बनकर सामने आया है.

निर्यात में UP की बड़ी छलांग

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प्रदेश के निर्यात में बीते वर्षों में आए बदलाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2016-17 में यूपी का निर्यात 84,283 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,01,241 करोड़ रुपये पहुंच गया. यानी निर्यात मूल्य में करीब ढाई गुना वृद्धि दर्ज हुई. इससे पहले 2012-17 के दौरान निर्यात की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत थी, जो 2017 के बाद बढ़कर लगभग 7.3 प्रतिशत हो गई. इस तरह निर्यात वृद्धि की रफ्तार करीब 1.8 गुना तेज हुई है.

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भदोही के कालीन की दुनिया में मजबूत पकड़

उत्तर प्रदेश के कालीन उद्योग की बात हो तो संत रविदास नगर (भदोही) का नाम सबसे आगे आता है. वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश के कुल कालीन निर्यात में अकेले भदोही की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से ज्यादा रही. वहीं भदोही-मीरजापुर-वाराणसी का कालीन क्लस्टर मिलकर यूपी के करीब 88 प्रतिशत कालीन निर्यात में योगदान देता है. राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारत के कुल हस्तनिर्मित कालीन निर्यात में उत्तर प्रदेश (विशेषकर भदोही-मीरजापुर क्लस्टर) की हिस्सेदारी ऐतिहासिक रूप से 55 से 60 प्रतिशत के बीच रही है.

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यह भी पढ़ें- इंडिया कारपेट एक्सपो: कालीन उद्योग के लिए अलग नीति की उठी मांग, CM योगी ने दिया भरोसा, कहा- सरकार जरूर लेगी संज्ञान

2017 से पहले नीतिगत उपेक्षा, बिजली संकट, जटिल टैक्स प्रक्रियाओं और बुनियादी ढांचे के अभाव के कारण यह क्लस्टर भारी मंदी झेल रहा था. उस समय यूपी से विनिर्माण या वैश्विक निर्यात में बड़े उछाल की उम्मीद करना 'कल्पना से परे' माना जाता था. निर्यातक और उद्योग राज्य से पलायन कर रहे थे, जबकि आज अकेले भदोही-मीरजापुर-वाराणसी क्लस्टर से करीब 5,000 करोड़ का कालीन निर्यात वैश्विक बाजारों (यूएस, यूरोप, मिडिल ईस्ट) में हो रहा है. 

करीब पांच लाख श्रमिक, कारीगर और बुनकर जुड़े

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कालीन उद्योग सिर्फ निर्यात का आंकड़ा नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का आधार भी है. भदोही के कालीन उद्योग से करीब पांच लाख श्रमिक, कारीगर और बुनकर जुड़े हैं. हस्तनिर्मित कालीन के क्षेत्र में भारत दुनिया के प्रमुख निर्यातकों में शामिल है और भदोही की पहचान इस वैश्विक कारोबार में खास है. ओडीओपी योजना, टूलकिट वितरण, मुद्रा लोन, आधुनिक लूम और सोलर लूम की व्यवस्था ने स्थानीय कारीगरों/बुनकरों की आय और कार्य परिस्थितियों में बड़ा सुधार किया है. बिचौलियों पर उनकी निर्भरता घटी है और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन से युवाओं का पलायन रुका है. 

बदली UP की एक्सपोर्ट बास्केट

2012-17 के दौरान प्रदेश की निर्यात टोकरी में मात्र चमड़ा, हस्तशिल्प, कालीन-दरी की प्रमुख हिस्सेदारी थी. अब तस्वीर अधिक विविध हो चुकी है. वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक्स 24 प्रतिशत, इंजीनियरिंग 20 प्रतिशत और खाद्य-डेयरी 11 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं. इससे यूपी के निर्यात आधार के विस्तार का भी पता चलता है. 2017 से पहले 

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यूपी के पारंपरिक हस्तशिल्प को कोई वैश्विक 

ब्रांडिंग या संगठित बाजार नहीं मिलता था, जबकि आज देश के हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट में यूपी का हिस्सेदारी 16.56 फीसदी है. 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) और निर्यात प्रोत्साहन नीति के बाद हस्तशिल्प और संबंधित पारंपरिक उत्पादों का निर्यात दोगुने से अधिक स्तर पर पहुंच चुका है. बेहतर कनेक्टिविटी (पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जेवर एयरपोर्ट), निर्बाध बिजली, और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में शीर्ष रैंकिंग ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है उत्तर प्रदेश आज सिर्फ पारंपरिक हस्तशिल्प ही नहीं, बल्कि मोबाइल/इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस कॉरिडोर और टेक्सटाइल का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है.

कारपेट एक्सपो मार्ट से वैश्विक बाजार तक पहुंच

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भदोही में 7.5 एकड़ में विकसित कारपेट एक्सपो मार्ट का उद्घाटन दिसंबर 2020 में किया गया था. इस अत्याधुनिक मंच ने कालीन कारोबार को वैश्विक खरीदारों से सीधे जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है. इसी कड़ी में 4 से 7 अक्टूबर 2026 तक भदोही में 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो आयोजित हो रहा है. इस एक्सपो में लगभग 250 एग्जीबिटर्स और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी बायर्स हिस्सा ले रहे हैं. इनमें ब्रिक्स देशों के 106 बायर्स भी हैं. ऐसे में भदोही के कालीनों के रंग और हुनर को एक बार फिर दुनिया के बाजार में नई चमक मिलने जा रही है. 

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