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ITR Deadlines: बस 2 दिन बाकी.. अब भी चूके तो नहीं मिलेगा दोबारा ये मौका ! Income Tax का है मामला, देरी की तो भरना पड़ेगा जुर्माना
Tax Audit Report Deadline: टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं को मौजूदा समयसीमा को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां पूरी करने की सलाह दी जा रही है. आयकर विभाग के अनुसार, आयकर अधिनियम की धारा 44एबी के तहत आने वाले करदाताओं को 30 सितंबर तक अपना ऑडिट पूरा कराकर ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त करनी होती है..
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Tax Audit Report: वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 तेजी से नजदीक आ रही है. हालांकि, देशभर के कर पेशेवर और विभिन्न उद्योग संगठनों द्वारा इस समयसीमा को आगे बढ़ाने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार या केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से कोई आधिकारिक विस्तार घोषित नहीं किया गया है.
ऐसे में टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं को मौजूदा समयसीमा को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां पूरी करने की सलाह दी जा रही है. आयकर विभाग के अनुसार, आयकर अधिनियम की धारा 44एबी के तहत आने वाले करदाताओं को 30 सितंबर तक अपना ऑडिट पूरा कराकर ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त करनी होती है..
टैक्स ऑडिट की तारीख बढ़ाने की मांग
विभिन्न पेशेवर संगठनों का कहना है कि इस बार ऑडिट, मिलान, खुलासों और अन्य अनुपालन कार्यों में अधिक समय लग रहा है. इसी वजह से कई संगठनों ने समयसीमा बढ़ाने की मांग की है.. मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन (एमपीटीसीए) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर से बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 करने की मांग की है. हालांकि, जब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक 30 सितंबर की समयसीमा ही लागू मानी जाएगी. ऐसे में टैक्सपेयर्स को ये 5 जरूरी काम तुरंत कर लेने चाहिए.
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पहला काम: सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखें
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पहला, करदाताओं को अपने लेखा-जोखा, बिक्री और खरीद रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, बिल, चालान और अन्य आवश्यक दस्तावेज व्यवस्थित रखने चाहिए. अधूरी जानकारी या रिकॉर्ड में विसंगतियां ऑडिट प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं
दूसरा काम: जीएसटी और टैक्स रिकॉर्ड का मिलान करें
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दूसरा, कारोबारियों को जीएसटी टर्नओवर, कर विवरण और अन्य वित्तीय आंकड़ों का पुस्तकों से मिलान करना चाहिए. साथ ही फॉर्म 26एएस, एआईएस (एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट) और टीआईएस (टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी) में उपलब्ध सूचनाओं की भी जांच करनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि या असंगति समय रहते दूर की जा सके.
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तीसरा काम: बड़े लेनदेन की जांच जरूरी
तीसरा, ऋण, स्थायी परिसंपत्तियों (फिक्स्ड एसेट्स), संबंधित पक्षों, वैधानिक देनदारियों और बड़े खर्चों जैसे मामलों की विशेष जांच करनी चाहिए. ऑडिट रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले इन सभी लेनदेन की टैक्स ट्रीटमेंट को लेकर ऑडिटर से चर्चा करना जरूरी है.
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चौथा काम: ऑडिट रिपोर्ट और ITR में आंकड़े मिलाएं
चौथा, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और आयकर रिटर्न (ITR) में दर्ज आंकड़ों का एक-दूसरे से मेल खाना आवश्यक है. टर्नओवर, खर्च, कटौतियां, कर संबंधी खुलासे और आगे ले जाए गए घाटे जैसे आंकड़ों में अंतर होने पर बाद में परेशानी हो सकती है.
पांचवां काम: रिपोर्ट अपलोड होने के बाद अप्रूव करें
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और पांचवां, केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा टैक्स ऑडिट रिपोर्ट अपलोड कर देना पर्याप्त नहीं है. रिपोर्ट अपलोड होने के बाद करदाता को अपने आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन कर उसे स्वीकृत भी करना होता है. इसलिए इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त समय पहले से निकालना जरूरी है.
टैक्स ऑडिट और ITR की डेडलाइन अलग-अलग
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कई करदाता टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (Tax Audit Report) और आयकर रिटर्न (Income Tax) की अंतिम तिथियों को लेकर भ्रमित हो जाते हैं. नियमों के अनुसार, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है, जबकि ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 है. इसलिए दोनों समयसीमाओं को अलग-अलग समझना और उनके अनुसार तैयारी करना आवश्यक है.