न अमेरिका, न ईरान... सिर्फ हिंदुस्तान, खाड़ी के युद्ध में भारत का वो ‘मास्टरप्लान’ जो सुपरपावर को भी सोचने पर मजबूर कर देगा
अमेरिका ने ईरान को चारों तरफ से घेर लिया है. ऐसा लग रहा है कि कभी भी दोनों देशों के बीच जंग शुरु हो सकती है. अगर ऐसा होता है, तो भारत किसकी तरफ जाएगा और उसकी क्या रणनीति होगी? समझिए
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दुनिया इस वक्त युद्ध के मुहाने पर खड़ी है. अमेरिका, ईरान पर हमला करने पर तुला हुआ है. बार-बार समझौता करने की धमकी दे रहा है, लेकिन समझौते में ईरान अमेरिकी शर्तों को मानने को तैयार नहीं है. माहौल इतना गरम हो गया है कि अमेरिका का सबसे खतरनाक वॉर शिप USS अब्राहम लिंकन अब ईरान के बिल्कुल करीब आ चुका है. ईरान को अमेरिका चारों तरफ से घेरने लगा है. वहीं, ईरान भी झुकने को तैयार नहीं और कह रहा है कि अगर अमेरिका चिंगारी लगाता है, तो फिर ईरान उस चिंगारी के बदले आग लगा देगा. ईरान की निडरता को देख ट्रंप भी कन्फ्यूज हो गए हैं. शायद इसलिए हमला करने से पहले सिर्फ भूमिका बांध रहे हैं. या फिर हमले से पहले ईरान के साथ कोई मनोवैज्ञानिक खेल, खेल रहे हैं. खैर, जो भी हो, लेकिन एक बात तय है कि अगर ये युद्ध होता है, तो फिर पूरी दुनिया में कई संकट पैदा हो जाएंगे. वहीं, भारत पर भी इसका असर बुरा पड़ेगा.
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
- तेल पर पड़ेगा बुरा असर: अगर युद्ध छिड़ता है, तो भारत के लिए भी यह किसी झटके से कम नहीं होगा. भारत अपनी जरुरत के लगभग 85 प्रतिशत तेल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है. इस युद्ध से तेल की कीमतों पर बुरा असर पड़ेगा, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें रातों-रात आसमान छू सकती है.
- आर्थिक दबाव: इसके अलावा अमेरिका फिलहाल भारत पर टैरिफ-टैरिफ थोप रहा है. सबसे पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया, उसके बाद इसे 50 प्रतिशत कर दिया, वहीं, अमेरिका ने अभी हाल ही में 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है कि अगर कोई भी देश ईरान के साथ व्यापार करता है तो. इस लिहाज से भारत के बासमती चावल निर्यात और चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर इसका बुरा असर पड़ सकता है.
- 80 लाख भारतीयों की सुरक्षा: जाहिर सी बात है, अगर युद्ध होता है तो पूरा मिडिल ईस्ट जल उठेगा. वहीं, लगभग 80 लाख भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं. ख़ासकर ईरान में ही लगभग 10 हजार भारतीय रहते हैं. ऐसे में भारत के पास उन्हें सुरक्षित घर तक पहुंचाने की भी चुनौती होगी.
युद्ध में किसका साथ देगा भारत?
भारत की विदेश नीति हमेशा रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित रही है. भारत ने कभी भी दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया. साधारण भाषा में समझे तो भारत ने हमेशा से ‘जियो और जीने दो’ का पक्षधर रहा है. ऐसे में सबसे पहले तो भारत न ही पूरी तरह से अमेरिका के साथ जाएगा, और न ही ईरान को पूरी तरह से समर्थन करेगा. भारत हमेशा एक न्यूट्रल रूख अपनाएगा, जो रुस और युक्रेन की युद्ध को लेकर अपनाया हुआ है. इसके अलावा 2026 में भारत BRICS का अध्यक्ष भी है, जहां ईरान भी एक सदस्य देश है, इसलिए भारत पर संतुलन बनाए रखने का भारी दबाव होगा.
क्या होगी भारत की रणनीति?
युद्ध की स्थिति में भारत कई विकल्प की तरफ जा सकता है. सबसे पहले तो भारत इजरायल, अमेरिका और खाड़ी देशों से बात करेगा ताकि युद्ध को टाला जा सके. इसके साथ ही, रूस और चीन के साथ मिलकर एक वैकल्पिक कूटनीतिक रास्ता निकालने की कोशिश करेगा. उदाहरण के लिए अमेरिका के टैरिफ को जवाब देने के लिए भारत ने यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार के नए रास्ते निकाले हैं. इसके अलावा भारत ट्रंप के सामने ये डिमांड रख सकता है कि अमेरिका-ईरान युद्ध में चाबहार पोर्ट को अलग रखा जाए, ताकि व्यापार किसी तरह से प्रभावित न हो.
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