पहाड़ों में बिछा मौत का जाल.., लड़ाकों से क्यों थर-थर कांपती है पाक सेना? आखिर कितना ताकतवर है BLA? जानिए पूरा सच
BLA Fighters: पाक सेना और बलूच लड़ाकों के बीच का संघर्ष दशकों पुराना है, लेकिन क्या वजह है कि मुट्ठी भर बीएलए लड़ाकों के सामने पाक सेना बेबस नजर आती है. आखिर लड़ाके पाक सेना के खिलाफ क्या रणनीति अपनाते हैं? समझिए सब कुछ.
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बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है. बलूच लिबरेशन आर्मी यानी BLA दशकों से पाकिस्तान की संप्रभुता को चुनौती दे रही है. यह संगठन बलूचिस्तान की आजादी के लिए पाक सेना के ख़िलाफ एक जटिल गुरिल्ला युद्ध छेड़े हुए है. पाक सेना और बलूचों के बीच का संघर्ष उतना ही पुराना है, जितना की पाकिस्तान है. बीएलए को पाकिस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है. लेकिन बलूच इसे अपनी आजादी की लड़ाई बताते हैं.
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) कैसे बनी?
बीएलए संगठन कोई अचानक नहीं बना, बल्कि दशकों से राजनीतिक प्रतिरोध और दमन से पनपा एक संगठन है, जो कई चरणों के माध्यम से अपने वजूद में आया. इसकी वैचारिक जड़ें तो 1970 के दशक में ही पनपने लगी थी, जब ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकार को बर्खास्त कर दिया था. उस समय ‘बलूच स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन’ (BSO) के युवा कार्यकर्ताओं ने महसूस किया कि केवल राजनीतिक बातचीत से अधिकार नहीं मिलेंगे. बीएलए ने आधिकारिक तौर पर तब सुर्खियां बटोरी जब संगठन ने साल 2000 में पाकिस्तान में हुए कई बम ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली. साल 2006 में एक सैन्य ऑपरेशन के दौरान बलूच नेता नवाब बुगती की हत्या के बाद इस संगठन ने घातक रुप धारण कर लिया. नतीजनत वर्तमान में ये बीएलए और पाक सेना के बीच हमेशा झड़प होती है. जिसमें कईयों की जान जाती रही है.
बलूचों के पास कितने लड़ाके हैं?
वैसे तो बलूचों के लड़ाके का सटीक जानकारी किसी के पास उपलब्ध नहीं है, लेकिन रक्षा विश्लेषकों के अनुसार बीएलए के पास 3,000 से 6,000 प्रशिक्षित लड़ाके होने का अनुमान है. इसके अलावा बीएलए के कई दूसरे छोटे समूह हैं, अगर उसे मिला दिया जाए यह संख्या 10,000-15,000 तक जा सकती है. अब सवाल ये भी है कि इतनी कम संख्या होने के बावजूद ये सेना पर भारी क्यों पड़ते हैं.
कम संख्या लेकिन पाक सेना पर भारी, कैसे?
बीएलए की सबसे मजबूत ताकत इनकी रणनीति है. ये आम लोगों के बीच रहते हैं, और अपने मकसद को अंजाम देते हैं. ऐसे में इनकी पहचान कर पाना बहुत ही मुश्किल होता है. इन्हें आम लोगों का समर्थन भी प्राप्त होता है, जो इन्हें सुरक्षित महसूस कराते हैं.
पाक सेना से लड़ने के लिए BLA लड़ाके क्या रणनीति अपनाते हैं?
जाहिर सी बात है पाकिस्तानी सेना के पास आधुनिक हथियार, लड़ाकू विमान, टेक्नोलॉजी और बड़ी संख्या में आर्मी हैं. ऐसे में बीएलए लड़ाके सीधी लड़ाई नहीं कर सकते. इसलिए ये एसिमेट्रिक वारफ़ेयर की रणनीति अपनाते हैं. जैसे- गुरिल्ला युद्ध, इसमें हमला करके बीएलए लड़ाके ग़ायब हो जाते हैं, और वे आम शहरियों में शामिल हो जाते हैं. इसके अलावा ये पहाड़ी इलाकों में सेना के काफिलों पर घात लगाकर हमला करते हैं, जिसमें लड़ाके सेना को संभलने तक का मौका नहीं देते हैं. बलोच लड़ाकों की एक और रणनीति होती है कि पाक सेना को आर्थिक रूप से कमजोर किया जाए. इसलिए वे चीन-पाकिस्तान के कई प्रोजेक्ट्स पर हमला करते हैं. रेलवे ट्रैक, गैस पाइपलाइन, बिजली के टॉवर और कोयला खदानों को भी निशाना बनाते हैं. लड़ाकों के लिए इनका खुफिया तंत्र स्थानीय लोग होते हैं. जो इनतक सारी सूचना पहुंचाते हैं.
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