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‘RAM’ और गांधी का संगम.., बजट 2026 में बीजेपी का वो ‘मास्टरस्ट्रोक’, जिसने विपक्ष के हर तीर को कर दिया नाकाम

विपक्ष के ‘गांधी विरोधी’ नैरेटिव की सत्ता पक्ष ने काट निकाल ली है. बजट 2026 में केंद्र ने एक ऐसी योजना लॉन्च की है जिसे बीजेपी का ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है.

केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले ‘मनरेगा’ का नाम बदलकर ‘वीबी-जी राम जी’ कर दिया था. जिसके बाद कांग्रेस ने केंद्र की आलोचना करनी शुरु कर दी. कहने लगे कि केंद्र कोई नई योजना की शुरुआत नहीं कर पा रही है, इसलिए यूपीए सरकार की पुरानी योजनाओं के नाम बदले जा रहे हैं. इसके अलावा विपक्ष ने ये कहकर भी केंद्र को घेरा कि सरकार ने महात्मा गांधी का नाम हटाकर ‘राम जी’ का नाम जोड़ दिया है ताकि राजनीतिक फायदा उठाया जा सके. वहीं, विपक्ष के इस ‘गांधी विरोधी’ होने के आरोप का काट अब सत्ता पक्ष ने निकाल लिया है. जी हां, वित्त मंत्री सीतारमण ने बजट 2026 में ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना’ (MGGSI) का ऐलान कर दिया है. 

आखिर यह योजना क्या है?

सरकार के अनुसार ये योजना सिर्फ दिहाड़ी मजदूरी देने वाला नहीं, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह योजना विशेष रूप से खादी, हैंडलूम और हस्तशिल्प के लिए है. इसका उद्देश्य गांवों में कारीगरों के प्रोडक्ट्स को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंचाना है. 

इस योजना का लाभ कौन उठा सकता है?

जैसा कि पहले ही बताया कि इसका उद्देश्य ग्रामीण कारीगरों की कारीगरी को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है. वो लोग जो पारंपरिक हैंडलूम और हस्तशिल्प में माहिर हैं. ग्रामीण युवा, जो जिनका स्किल डेवलपमेंट अच्छा है, वे लोग जो छोटे-छोटे गांव में खादी के लिए चरखा चलाते हैं, ऐसे तमाम लोगों के लिए ये मील का पत्थर साबित होगा. और ये तमाम लोग इसका फायदा उठा सकते हैं.

बीजेपी के लिए यह एक ‘राजनीतिक हथियार’ कैसे है?

दरअसल, कई मायनों में इस योजना का लाभ सत्ता पक्ष को भी हो सकता है. सबसे पहले तो ये विपक्ष के ‘एंटी गांधी’ के नैरेटिव का तोड़ है. विपक्ष ने आरोप लगाया था कि बीजेपी गांधी जी का नाम मिटा रही है. वहीं, इस योजना से विपक्ष के इस नैरेटिव को सरकार आसानी से तोड़ सकती है. इसके अलावा एक तरफ़ ‘वीबी-जी राम जी’ और दूसरी तरफ़ ‘ग्राम स्वराज’ (MGGSI), यानी हिंदुत्व और गांधीवाद को एक साथ लाकर बीजेपी अपने कोर वोट बैंक और ग्रामीण मतदाताओं को भी साथ साधने की कोशिश की है. 

विपक्ष को कैसे घेरेगा सत्ता पक्ष?

संसद में बजट सत्र चल रहा है. अगर इस सत्र में इस मुद्दे पर बहस होती है या फिर कोई विपक्षी नेता इस मुद्दे पर सरकार को घेरता है तो अब सत्ता पक्ष भी संसद में यह तर्क देगा कि विपक्ष केवल ‘नाम’ की राजनीति कर रहा था, जबकि सरकार ने ग्रामीण भारत को मजदूरी से ऊपर उठाकर ‘ग्लोबल एक्सपोर्टर’ बनाने का रोडमैप तैयार किया है. इसमें विपक्ष के ‘गांधी के अपमान’ भी कमजोर पड़ जाएगा. 

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