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कर्नाटक का रहस्यमयी गुफा मंदिर जहाँ 300 मीटर गहरे पानी में चलकर होते हैं दर्शन
इस मंदिर में भगवान नरसिम्हा का स्वयंभू रूप स्थित है, जिसका अर्थ है कि ये स्वयं प्रकट हुआ है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान नरसिम्हा भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं। इनका आधा शरीर मानव का और आधा सिंह का है। भगवान के इस स्वयंभू रूप को अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी माना जाता है। इसीलिए दूर दूर से भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।
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भारत अनगिनत रहस्यमयी जगहों का भंडार है। यहाँ के हर कोने में आपको चौंकाने वाले कई ऐसे स्थान मिल जाएंगे जो सोचने पर मजबूर कर दे की क्या वाकई ये संभव है? ऐसा ही एक धार्मिक स्थल है कर्नाटक के बीदर में स्थित नरसिम्हा झिरा गुफा मंदिर। ये मंदिर भगवान नरसिम्हा को समर्पित है और अपनी सुंदरता के साथ साथ एक रोमांचक और कठिन दर्शन प्रक्रिया के लिए भी ये देश भर में जाना जाता है।
स्वयंभू रूप में स्थित हैं भगवान नरसिम्हा
इस मंदिर में भगवान नरसिम्हा का स्वयंभू रूप स्थित है, जिसका अर्थ है कि ये स्वयं प्रकट हुआ है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान नरसिम्हा भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं। इनका आधा शरीर मानव का और आधा सिंह का है। भगवान के इस स्वयंभू रूप को अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी माना जाता है। इसीलिए दूर दूर से भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।
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इस मंदिर के दर्शन करना किसी साहसिक यात्रा से कम नहीं
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अगर आपने इस मंदिर के दर्शन अब तक नहीं किए हैं तो आपको बता दें यहाँ दर्शन करना किसी साहसिक यात्रा से कम नहीं है। भगवान नरसिम्हा के दर्शन करने के लिए आपको एक गुफा जैसी सुरंग से होकर गुजरना पड़ता है। इस गुफा में सदियों से बह रही जलधारा है जो लगभग 300 मीटर गहरी है। इसमें चलते हुए आप कमर तक पानी में रहते हैं। इसी तरह से अंधेरी गुफा में पानी के अंदर चलते हुए भगवान की एक झलक पाना एक मंत्रमुग्ध कर देने वाला अनुभव होता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान नरसिम्हा ने अपने भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए हिरण्यकश्यप का वध किया जिसके बाद वो इस गुफा में आए। यहाँ उन्होंने झरासुर या जलसुर नामक एक अन्य विशाल राक्षस का अंत किया जो भगवान शिव का परम भक्त था। मरते समय झरासुर ने भगवान से एक वरदान माँगा कि भगवान हमेशा इसी गुफा में निवास करें और यहाँ आने वाले भक्तों को आशीर्वाद दें। यहाँ भगवान नरसिम्हा की आकृति पत्थर की दीवार पर उकेरी हुई देखी जा सकती है।
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