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BJP ने बंगाल जीतने का तय किया फॉर्मूला, अब टारगेट पर 'दीदी' नहीं; इस सीक्रेट प्लान के साथ होगा TMC पर वार

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गरम है. टीएमसी जहां जीत दोहराने का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी ने इस बार रणनीति बदलते हुए 50 वरिष्ठ नेताओं को प्रचार में उतारा है.

BJP ने बंगाल जीतने का तय किया फॉर्मूला, अब टारगेट पर 'दीदी' नहीं; इस सीक्रेट प्लान के साथ होगा TMC पर वार
Source: X/ @BJP4India
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Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में सियासी सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है. सत्ताधारी टीएमसी एक तरफ पुनः जीत का दावा कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ममता राज को ख़त्म करने के लिए अपने प्रचार अभियान को पहले से ज्यादा रणनीतिक और सटीक बनाने की तैयारी की है. इसके लिए पार्टी ने लगभग 50 वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारने का फैसला किया है, जो पूरे राज्य में अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचार की कमान संभालेंगे. इन नेताओं में केंद्रीय मंत्रियों के साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं, जिससे चुनावी माहौल और गर्म होने की संभावना है.

दरअसल, इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव सिर्फ दो चरणों में कराए जा रहे हैं, जो पिछले चुनाव के आठ चरणों की तुलना में काफी कम हैं. ऐसे में बीजेपी का मानना है कि पिछली बार लंबे चुनावी कार्यक्रम ने उसे नुकसान पहुंचाया था. कोरोना काल के दौरान आखिरी तीन चरणों में पार्टी ने जमीनी प्रचार रोक दिया था, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने अपनी गतिविधियां जारी रखी थीं. इस वजह से बीजेपी को लगा कि चुनावी संतुलन बिगड़ गया था. अब दो चरणों में चुनाव होने से पार्टी को उम्मीद है कि वह अपनी रणनीति को बेहतर तरीके से लागू कर पाएगी.

ममता बनर्जी पर सीधे हमलों से परहेज

इस विधानसभा चुनाव के प्रचार के लिए बीजेपी ने इस बार अपनी भाषा और प्रचार शैली में भी बदलाव किया है. पिछले चुनाव में ममता बनर्जी पर सीधे हमले और ‘दीदी’ जैसे संबोधनों का इस्तेमाल किया गया था, जिससे उन्हें सहानुभूति मिली थी. इस बार पार्टी ने इस गलती से सीख ली है और ममता बनर्जी का नाम सीधे लेने से बच रही है. इसका मकसद यह है कि चुनाव किसी एक चेहरे के इर्द-गिर्द न घूमे, बल्कि मुद्दों पर केंद्रित रहे.

धुरंधर नेताओं की फौज मैदान में

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पार्टी के अभियान का केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बनाया गया है, जिनकी रैलियां चुनावी माहौल को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाएंगी. वहीं गृह मंत्री अमित शाह सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आएंगे और राज्य के अधिकांश जिलों में प्रचार की जिम्मेदारी संभालेंगे. इसके अलावा राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान जैसे दिग्गज नेता भी लगातार दौरे करेंगे. 

BJP उतारेगी मुख्यमंत्रियों की फौज 

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्रियों की एक बड़ी टीम भी रणनीतिक सीटों पर फोकस करेगी. इनमें योगी आदित्यनाथ, हेमंत बिस्व सरमा, देवेंद्र फडणवीस और अन्य नेता शामिल हैं, जो खास इलाकों में जनसभाएं कर माहौल बनाने की कोशिश करेंगे. यह पूरी रणनीति बीजेपी के ‘धुरंधरों की फौज’ के रूप में देखी जा रही है, जो चुनावी समीकरण बदलने का प्रयास करेगी. बीजेपी की नजर खास तौर पर जंगल महल और आदिवासी क्षेत्रों पर है, जहां वह अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. इसके अलावा मतुआ समुदाय वाले क्षेत्रों में भी पार्टी को बड़ी उम्मीदें हैं. नागरिकता संशोधन कानून लागू होने के बाद बीजेपी इस वर्ग में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है, ताकि तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके.

मुस्लिम बहुल सीटों पर नई रणनीति

इसके साथ ही राज्य की मुस्लिम बहुल सीटों पर भी बीजेपी अपनी रणनीति बदलते हुए नजर आ रही है. एसआईआर पुनरीक्षण के बाद आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी बूथ स्तर पर मजबूती और फर्जी मतदान रोकने पर विशेष ध्यान दे रही .

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बताते चलें कि पश्चिम बंगाल का यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि रणनीति और अनुभव की परीक्षा भी बन चुका है. अब देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की यह नई रणनीति कितना असर दिखाती है और क्या वह ममता बनर्जी की मजबूत पकड़ को चुनौती दे पाती है.

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