UGC Act को लेकर सवाल, भीम आर्मी वालों ने भगवान राम और मंदिर पर काटा बवाल, हुआ सवाल तो करने लगे पत्रकार के साथ गुंडई!

UGC के नए एक्ट के समर्थन में उतरे भीम आर्मी के समर्थक विरोध प्रदर्शन करने के लोकतांत्रिक अधिकार को ढाल बनाकर भगवान राम और मंदिरों का विरोध करते-करते गुंडई और महिला पत्रकारों के साथ बद्तमीजी पर उतर आए.

UGC के नए एक्ट पर देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने भले ही रोक लगाई हो, लेकिन इसके बावजूद यूजीसी के नाम पर विरोध प्रदर्शन है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. 11 फरवरी को देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर मैदान में नगीना के सांसद चंद्रशेखर ने यूजीसी का नया एक्ट लागू करने के लिए भारी विरोध प्रदर्शन किया… लेकिन ये विरोध प्रदर्शन यूजीसी के समर्थन में कम ब्राह्मण, राजपूत जैसे अगड़ी बिरादरी वालों के खिलाफ गुस्सा और नफरत का अड्डा ज्यादा नजर आ रहा था. यहां पत्रकारों को सिर्फ इसलिये पीट दिया गया क्योंकि वो भीम आर्मी के समर्थकों से सवाल कर रहे थे.

भीम आर्मी के समर्थकों की भारी भीड़ में घिरी महिला पत्रकार की हालत देख कर आप समझ सकते हैं कि अगर घटना स्थल पर उसके पत्रकार साथी नहीं होते तो उस महिला पत्रकार का क्या अंजाम होता. वो तो भला हो मीडिया कर्मियों का कैमरा चालू था और भीम आर्मी के समर्थकों की सारी करतूत कैमरे में कैद हो गई कैसे जो लोग अगड़ी जाति वालों पर जातिवाद करने के आरोप लगाते थे, आज वही लोग पत्रकारों से सवाल पूछ रहे हैं तुम कौन सी जाति के हो, और जब पत्रकार अपना पूरा नाम बताते हैं तो भीम आर्मी के समर्थक उन्हें गोदी मीडिया कहने लगते हैं.

बात यहीं खत्म नहीं होती, यूजीसी एक्ट के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करने आए भीम आर्मी के समर्थकों का ये प्रदर्शन कम, अराजकता फैलाने का एजेंडा ज्यादा नजर आ रहा था क्योंकि पत्रकारों ने जब उनसे सवाल पूछा तो, जवाब देने की बजाए पत्रकारों के साथ बद्तमीजी पर उतर आए, जिसमें कई पत्रकारों को चोट भी आई.
सवाल उठ रहा है कि यह विरोध प्रदर्शन था या फिर अराजकता फैलाने की कोशिश.

इन भीम आर्मी वाले की बदतमीजी, अराजकता की हद तो देखिए कि वो UCG एक्ट के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन बवाल मंदिर, भगवान राम, सवर्णों और भारतीय संस्कृति पर काट रहे थे.

UGC एक्ट के समर्थन में भीम आर्मी वालों ने प्रदर्शन किया, लेकिन इस विरोध प्रदर्शन को सनातन विरोधियों का अड्डा बना दिया. इस दौरान इन लोगों ने अपनी जाति और राजनीतिक विरोध का बहाना बनाकर कहने लगे कि चढ़ावा बंद होगा तो मंदिर पर ताले लग जाएंगे. वहीं आगे कहा गया कि देश को राम की नहीं बुद्ध की जरूरत है. सवाल ये उठता है कि इन भीम आर्मी वालों को मंदिर और भगवान से नफरत क्यों है? क्या उन्हें भगवान राम, सबरी और केवट राम का प्रसंग और रिश्ता-भक्ति का नहीं पता है.

इसलिए तो जब उनसे सवाल पूछा जाता है तो उनका पारा हाई हो जाता है. इसलिए तो महिला पत्रकार रूचि तिवारी के साथ हुई बदतमीजी के बारे में सवाल किया जाता है तो ये उग्र गुंडे दलित विरोधी, मनुवाद और गोदी मीडिया का आरोप लगाकर NMF News के पत्रकार शिवशंकर उपाध्याय से ही भिड़ जाते हैं और सीधे माइक ही छीनने लगते हैं.

प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारी भगवान राम और मंदिरों को लेकर विवादित बयान देते भी नजर आए. कुछ लोगों ने कहा कि देश को राम की नहीं बुद्ध की जरूरत है. एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि अगर चढ़ावा बंद हो जाएगा तो मंदिरों पर ताले लग जाएंगे. इन बयानों के बाद माहौल और ज्यादा गरमा गया.

स्थानीय लोगों का कहना है कि UGC एक्ट के समर्थन में जुटी भीड़ का फोकस मुद्दे से ज्यादा धार्मिक और जातीय टिप्पणियों पर दिखाई दिया. जब पत्रकारों ने उनसे एक्ट के प्रावधानों पर सवाल पूछे तो कई प्रदर्शनकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके और बहस टकराव में बदल गई.

पूरी घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर मीडिया पर हमला जायज है. क्या प्रदर्शन के दौरान धार्मिक टिप्पणियां माहौल बिगाड़ने का काम नहीं करतीं. जंतर मंतर से सामने आई ये तस्वीरें बता रही हैं कि बहस और असहमति के बीच संवाद की जगह टकराव ने ले ली.

फिलहाल इस मामले में आधिकारिक शिकायत और कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जंतर मंतर से यह ग्राउंड रिपोर्ट दिखाती है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात किस तरह बेकाबू हो गए और सवाल पूछना कुछ लोगों को इतना नागवार गुजरा कि बात हाथापाई तक पहुंच गई.

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