भारत-US के बीच जल्द होने वाली है एक बड़ी डील, ट्रंप के दूत ने सुनाई खुशखबरी; क्रिटिकल मिनरल्स समझौता लगभग तय
भारत और अमेरिका क्रिटिकल मिनरल्स समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं. अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि यह समझौता मैन्युफैक्चरिंग और नई तकनीकों के लिए जरूरी दुर्लभ खनिज की सप्लाई चेन को सुरक्षित करेगा और आने वाले महीनों में इस पर बड़ी घोषणा हो सकती है.
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भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी अब एक नए और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है. दोनों देश क्रिटिकल मिनरल्स यानी दुर्लभ और जरूरी खनिजों से जुड़े एक अहम समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच गए हैं. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को इस बारे में सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि आने वाले कुछ महीनों में इस समझौते की बड़ी घोषणा हो सकती है.
समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी तेज
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका इस समझौते को अंतिम चरण तक पहुंचाने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह समझौता एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, आधुनिक ऊर्जा प्रणालियों और उभरती तकनीकों के लिए बेहद अहम साबित होगा. इसके जरिए दोनों देश उन दुर्लभ खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाएंगे, जो भविष्य की तकनीकी दुनिया की नींव माने जाते हैं.
क्या होते हैं क्रिटिकल मिनरल्स?
क्रिटिकल मिनरल्स में लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे खनिज शामिल होते हैं, जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, सेमीकंडक्टर, मोबाइल फोन और आधुनिक रक्षा तकनीकों में बड़े पैमाने पर किया जाता है. दुनिया भर में इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में इनकी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना हर बड़े देश की प्राथमिकता बन चुका है.
राजनीतिक इच्छाशक्ति से बढ़ी साझेदारी की रफ्तार
सर्जियो गोर ने कहा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब पहुंच चुके हैं. उनके अनुसार आने वाले महीनों में इसके ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका की सरकारों के बीच इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई दे रही है. पहले जहां कई बार रुकावटें देखने को मिलती थीं, अब वहां तेजी से प्रगति हो रही है.
भारत-अमेरिका रिश्तों में तीन बड़े बदलाव
उन्होंने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के रिश्ते अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं. उनके अनुसार दोनों देशों की साझेदारी में तीन बड़े क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है. पहला व्यापार के क्षेत्र में, दूसरा भरोसे और तकनीक के क्षेत्र में और तीसरा रणनीतिक समन्वय के क्षेत्र में. यह तीनों पहलू साफ दिखाते हैं कि दोनों देश अब केवल पारंपरिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भविष्य की तकनीक और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को भी साथ मिलकर आकार देना चाहते हैं.
अंतरिम व्यापार समझौते का भी जिक्र
इस दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का भी जिक्र किया. गोर ने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था का आकार, यहां के लोगों की प्रतिभा और समाज में मौजूद उद्यमशीलता की ऊर्जा यह स्पष्ट संकेत देती है कि सहयोग की संभावनाएं बेहद व्यापक हैं. जरूरत सिर्फ तेज निर्णय और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की थी.
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गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी को एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति जताई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्रिटिकल मिनरल्स समझौता भी जल्द अंतिम रूप ले लेता है, तो यह न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में भी भारत की भूमिका को और मजबूत बना सकता है.
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