BJP के AI वीडियो से असम में सियासी उबाल... CM हिमंत ने किसे किया टारगेट, जिससे भड़क गई कांग्रेस! जानें पूरा मामला

असम विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमाया हुआ है. इसी बीच असम बीजेपी द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक विवादित वीडियो ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया. वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को प्रतीकात्मक रूप से दो लोगों की तस्वीरों पर निशाना साधते दिखाया गया, जिसे पाइंट ब्लैंक शॉट कैप्शन के साथ अपलोड किया गया था.

Himant Biswa Sarma (File Photo)

असम में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति पूरी तरह गरमा चुकी है. राज्य का सियासी पारा इन दिनों आसमान छू रहा है. एक तरफ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अवैध घुसपैठियों पर सख्त कार्रवाई और विकास को अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए फिर से सत्ता में लौटने का दावा कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस बार चुनाव में बीजेपी को घेरने की पूरी तैयारी में नजर आ रहे हैं. इसी बीच असम बीजेपी की ओर से सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. विवाद बढ़ने के बाद भले ही इस वीडियो को डिलीट कर दिया गया हो, लेकिन इसकी गूंज अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही है.

राज्य में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे समय में सामने आए इस वीडियो ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है. वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को एक प्रतीकात्मक अंदाज में दिखाया गया है, जहां वह टोपी पहने दो लोगों की तस्वीरों पर गोली चलाते नजर आते हैं. यह वीडियो एक काउबॉय स्टाइल में तैयार किया गया था, जिसमें बंदूक चलाने के दृश्य और आक्रामक संदेश शामिल थे. वीडियो के आखिर में लिखी पंक्तियां भी काफी विवादास्पद रहीं, जिनमें बांग्लादेशियों पर कोई दया नहीं, तुम पाकिस्तान क्यों गए और विदेशी मुक्त असम जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था.

पाइंट ब्लैंक शॉट कैप्शन ने बढ़ाई हलचल 

बीजेपी की ओर से यह वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पाइंट ब्लैंक शॉट जैसे तीखे कैप्शन के साथ अपलोड किया गया था. इस कैप्शन और वीडियो की भाषा को लेकर ही सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि यह महज राजनीतिक प्रचार नहीं, बल्कि खुले तौर पर नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने वाला कंटेंट है. वीडियो में प्रतीकों के जरिए जिस तरह का संदेश दिया गया, उसने असम ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है. असम लंबे समय से अवैध घुसपैठ और नागरिकता से जुड़े मुद्दों को लेकर संवेदनशील रहा है. एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों ने पहले ही राज्य की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है. ऐसे में चुनाव से पहले इस तरह का वीडियो सामने आना कई सवाल खड़े करता है. क्या यह सिर्फ एक आक्रामक चुनावी रणनीति है, या फिर इसके जरिए एक खास वर्ग को निशाना बनाने की कोशिश की गई है. यही सवाल अब सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं.

कांग्रेस का तीखा पलटवार

बीजेपी के इस वीडियो पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस का कहना है कि इस वीडियो को सामान्य ट्रोल कंटेंट कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. पार्टी के अनुसार, यह बेहद ही घृणित और परेशान करने वाला है और बीजेपी के फासीवादी चेहरे का असली प्रतिबिंब सामने लाता है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि दशकों से नफरत की राजनीति को पाला गया है और पिछले 11 सालों में इसे सामान्य बनाने की कोशिश की गई है. कांग्रेस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है. पार्टी का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों पर भी सीधा हमला है. कांग्रेस ने न्यायपालिका से भी इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है, ताकि भविष्य में इस तरह के कंटेंट को लेकर स्पष्ट संदेश जाए.

सुप्रिया श्रीनेत ने दिया बड़ा बयान 

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस वीडियो को अपने एक्स हैंडल पर शेयर करते हुए बीजेपी पर सीधा हमला बोला. उनके द्वारा शेयर किए गए वीडियो में असम बीजेपी का आधिकारिक एक्स अकाउंट साफ तौर पर नजर आ रहा था. सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा कि यही है असली बीजेपी: सामूहिक हत्यारे. उन्होंने आरोप लगाया कि यह जहर, नफरत और हिंसा की राजनीति है और इसकी जिम्मेदारी सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आती है. सुप्रिया श्रीनेत ने न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि क्या अदालतें और संस्थाएं इस तरह के मामलों पर चुपचाप सोई हुई हैं. उनका कहना था कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रवृत्ति और खतरनाक रूप ले सकती है.

टीएमसी और वाम दलों की प्रतिक्रिया

बीजेपी के इस वीडियो पर तृणमूल कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है. ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने कहा है कि यह वीडियो नरसंहार और सामूहिक हत्या के लिए हरी झंडी देने जैसा है. टीएमसी का आरोप है कि बीजेपी ने अकेले ही भारत की राजनीतिक चर्चा को गटर में घसीट दिया है और देश के संविधान की धर्मनिरपेक्ष और बहुलवादी भावना को धूल में मिला दिया है. वहीं सीपीआईएम ने इस वीडियो को जातीय सफाई और नरसंहार के लिए खुला आह्वान करार दिया है. वाम दलों का कहना है कि इस तरह की भाषा और प्रतीकात्मक हिंसा समाज को और विभाजित करने का काम करती है, जिसका असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है.

चुनाव से पहले बढ़ता तनाव

असम विधानसभा चुनाव से पहले इस वीडियो ने सियासी माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है. जहां बीजेपी इसे अपनी सख्त नीति और अवैध घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई के संदेश के तौर पर पेश कर सकती है, वहीं विपक्ष इसे नफरत और हिंसा की राजनीति बता रहा है. वीडियो को डिलीट कर देना विवाद को खत्म नहीं कर सका है, बल्कि अब यह सवाल और गहरे हो गए हैं कि चुनावी राजनीति में भाषा और प्रतीकों की सीमा क्या होनी चाहिए.

बताते चलें कि आने वाले दिनों में यह विवाद चुनावी बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है. असम की जनता विकास, सुरक्षा और पहचान जैसे मुद्दों पर किस तरह फैसला करती है, यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे. लेकिन इतना तय है कि इस वीडियो ने चुनाव से पहले असम की राजनीति को और ज्यादा गरमा दिया है, और इसका असर आने वाले समय में साफ तौर पर देखने को मिलेगा.

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