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पड़ोसी देशों के खिलाफ आतंकवादी इकोसिस्टम को बनाया हथियार, पाक के खौफनाक प्लान पर चौंकाने वाली रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, आतंकी संगठन ISIS से जुड़ीं हालिया घटनाएं पाक सेना के समर्थन से अंजाम दी गई हैं. ISI आतंकियों को पड़ोसियों के खिलाफ रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है.
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पाकिस्तान में आतंकवाद भले उसी की नींव को खून से रंगे लेकिन पाक आतंकी संगठनों का पालन पोषण नहीं छोड़ेगा. दावा है कि पाकिस्तान का आतंकवादी इकोसिस्टम पड़ोसी देशों के खिलाफ रणनीतिक हथियार की तरह काम करता है.
अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों से समर्थित आतंकवादियों की सीमा पार घुसपैठ की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. इस बीच तालिबान ने एक बार फिर अफगानिस्तान के भीतर अशांति पैदा करने के लिए इस्लामाबाद की कड़ी निंदा की है. काठमांडू स्थित हमराकुरा की एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है.
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
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रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में तालिबान ने कहा कि उसकी सेना ने नूरिस्तान में 41 आतंकवादियों को मार गिराया और 62 अन्य को पकड़ा है, जो ISIS से जुड़े समूहों से संबंधित थे और पाकिस्तानी अधिकारियों से समर्थित थे.
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अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सेना के ‘प्रत्यक्ष मार्गदर्शन और सहयोग’ से अफगानिस्तान में घुसपैठ करने की कोशिश की.
अमेरिका ने भी लगाए गंभीर आरोप
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पाकिस्तान सेना के कर्ता धर्ता आमिस मुनीर भले ही अमेरिका की मान मनुहार में जुट जाएं, लेकिन ट्रंप प्रशासन खुद पाकिस्तानी आंतकियों के नेटवर्क से इंकार नहीं कर सकता.
अमेरिका ने भी पाकिस्तान पर हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) को अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के दौरान हमले करने की अनुमति देने का आरोप लगाया है. तत्कालीन अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स के अध्यक्ष एडमिरल माइक मुलेन ने कहा था, ‘हक्कानी नेटवर्क, एक तरह से, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की एक वास्तविक शाखा के रूप में कार्य करता है.’
भारत ने दिखाया आईना
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भारत वर्षों से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ और देश भर में बम विस्फोटों और हत्याओं को अंजाम देने में मदद करने का आरोप लगाता रहा है. भारत ने कई बार पाकिस्तान के सरकारी तत्वों की सक्रिय संलिप्तता के ठोस सबूत पेश किए हैं. पिछले साल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए थे.
ईरान ने भी पाकिस्तान पर सीमा पार हमले करने वाले ईरान विरोधी तत्वों का समर्थन करने का आरोप लगाया है. तेहरान ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) पर आतंकवादियों का समर्थन करने का भी आरोप लगाया है.
जांच में यूरोप में हुए आतंकवादी हमलों और पाकिस्तान स्थित संगठनों के बीच संबंध का पता चला है. यूरोप ने पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए सुरक्षित पनाहगाह के रूप में मान्यता दी है और यूरोपीय संघ शरण एजेंसी (ईयूएए) ने आईएसआई और एलईटी के बीच ‘मजबूत’ संबंध दर्ज किया है, जिसका उल्लेख हमराकुरा की रिपोर्ट में किया गया है.
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हमराकुरा ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘यह विडंबना है कि पाकिस्तान पर अफगानिस्तान में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने का आरोप लगा है, जिसे वह पहले आतंकवाद का स्रोत कहता था. पाकिस्तान में सरकार ने पड़ोसियों के खिलाफ रणनीतिक साधन के रूप में आतंकवाद का इकोसिस्टम स्थापित किया, हालांकि, वही आतंकवादी इकोसिस्टम पाकिस्तान के ही खिलाफ हो गया. सुरक्षा नीति के साधन के रूप में आतंकवादी नेटवर्कों के संस्थागतकरण ने पाकिस्तान को आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ का स्रोत और निर्यातक बना दिया है.’
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आतंकवाद पर चौतरफा घिरे होने और तमाम रिपोर्ट्स के बाद भी शहबाज शरीफ आंतकी संगठनों को सेना की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. आरोप है कि बलूचिस्तान में उठते विरोध को दबाने के लिए भी आर्मी आतंकियों के साथ मिलकर कार्रवाई करती है. जबकि आतंक के आका पाक की धरती को ही खून से रंग रहे हैं.