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बांग्लादेश के अगले PM होंगे तारिक रहमान... BNP को मिला दो-तिहाई बहुमत, जमात की जमानत जब्त

Bangladesh Election Result 2026: बांग्लादेश में गुरुवार को हुए 13वें संसदीय चुनाव की मतगणना जारी है और इसे हालिया इतिहास का सबसे अहम चुनाव माना जा रहा है. शुरुआती नतीजों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने बहुमत पार करते हुए दो तिहाई बढ़त हासिल कर ली है.

Tariq Rahman (File Photo)

बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव की मतगणना जारी है और शुरुआती नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव तय कर दिया है. गुरुवार को हुए इस ऐतिहासिक चुनाव को हालिया इतिहास का सबसे अहम लोकतांत्रिक मोड़ माना जा रहा है. करीब 18 महीने पहले छात्र आंदोलन की लहर में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी. उसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ था. अब जनता ने नए जनादेश ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को 20 साल बाद सत्ता की वापसी की राह दिखाई है. 

दो मुद्दों पर हुआ मतदान

इस बार का चुनाव कई मायनों में अलग रहा. पहली बार संसदीय चुनाव के साथ जनमत संग्रह भी कराया गया. मतदाताओं ने दो मुद्दों पर वोट डाला. पहला नई संसद के गठन के लिए और दूसरा जुलाई राष्ट्रीय चार्टर के नाम से प्रस्तावित 84 सूत्रीय सुधार पैकेज पर अपनी राय देने के लिए. यही कारण है कि इस चुनाव को सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है.

BNP को ऐतिहासिक बढ़त

शुरुआती रुझानों के मुताबिक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बंपर बढ़त हासिल कर ली है.  रिपोर्ट के अनुसार पार्टी ने 212 सीटों पर जीत दर्ज कर दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. कुल 299 निर्वाचन क्षेत्रों में से 287 में मतगणना पूरी हो चुकी है. अनौपचारिक परिणामों के अनुसार बीएनपी गठबंधन को 212 से अधिक सीटें मिली हैं, जबकि बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगियों को लगभग 59 से 70 सीटों के बीच सफलता मिली है. अन्य दलों के खाते में सीमित सीटें गई हैं.

तारिक रहमान बने जीत के सबसे बड़े चेहरे

बीएनपी की इस जीत का सबसे बड़ा चेहरा बने हैं तारिक रहमान. उन्होंने दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत दर्ज की. अपने गृह जिले बोगुरा से उन्हें 2,16,284 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 97,626 वोट हासिल हुए. पार्टी पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि सत्ता में आने पर तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा. ऐसे में संकेत साफ हैं कि बांग्लादेश को जल्द ही नया प्रधानमंत्री मिल सकता है.

वरिष्ठ नेताओं की जीत ने बदला समीकरण

बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने अपने निर्वाचन क्षेत्र ठाकुरगांव से 2,34,144 वोट पाकर जीत दर्ज की. वहीं जमात के वरिष्ठ नेता मिया गुलाम पोरवार अपने प्रतिद्वंद्वी से मामूली अंतर से हार गए. इन परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार जनता ने बड़े पैमाने पर सत्ता परिवर्तन का मन बना लिया था.

47.91 प्रतिशत मतदान

देश के लगभग 36 हजार मतदान केंद्रों पर 47.91 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. कुछ इलाकों में झड़पों और हिंसा की खबरें भी आईं. एक बीएनपी नेता की मौत और कई कार्यकर्ताओं के घायल होने की सूचना मिली. इसके बावजूद चुनाव आयोग और अंतरिम सरकार ने प्रक्रिया को कुल मिलाकर शांतिपूर्ण बताया है. शाम 4.30 बजे मतदान समाप्त होते ही मतगणना शुरू कर दी गई थी.

पहली बार डाक मतपत्र और जनमत संग्रह

इस चुनाव की एक और खास बात यह रही कि पहली बार डाक मतपत्र की व्यवस्था लागू की गई. साथ ही संसदीय चुनाव के साथ जनमत संग्रह कराना भी लोकतांत्रिक प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है. जुलाई चार्टर के जरिए प्रशासनिक सुधार, न्यायिक पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सुधारों को लागू किया गया तो बांग्लादेश की संस्थागत संरचना में व्यापक बदलाव संभव है.

छात्र नेतृत्व वाली पार्टी को झटका

छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि से उभरी राष्ट्रीय नागरिक पार्टी को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली. इस पार्टी ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ पांच पर जीत दर्ज कर सकी. युवाओं ने इसे दो दलीय राजनीति के विकल्प के रूप में पेश किया था. हालांकि सर्वेक्षणों में पहले ही संकेत मिल रहे थे कि लोकप्रियता को वोट में बदलना आसान नहीं होगा.

अवामी लीग की गैर मौजूदगी ने बदला खेल

इस बार राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदले हुए थे. शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया था, जिससे मुकाबला मुख्य रूप से बीएनपी और जमात के बीच सिमट गया. पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे सजीब वाजेद ने चुनाव को गैर कानूनी बताते हुए बहिष्कार की अपील की. हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया.

मतदाताओं में दिखा उत्साह

मतदाताओं में उत्साह साफ नजर आया. कई वोटरों ने कहा कि वे पिछले 17 या 18 वर्षों से खुलकर मतदान नहीं कर पाए थे और इस बार उन्हें स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद का उम्मीदवार चुनने का अवसर मिला है. सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती ने माहौल को नियंत्रित रखने में मदद की.

बांग्लादेश का बदलेगा राजनीतिक भविष्य

विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव बांग्लादेश की राजनीति में नई दिशा तय करेगा. 17 साल के लंबे अंतराल और निर्वासन के बाद तारिक रहमान की वापसी अब सत्ता के शिखर तक पहुंचती दिखाई दे रही है. यदि अंतिम परिणाम भी इसी रुझान की पुष्टि करते हैं तो मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का अध्याय समाप्त हो जाएगा और बीएनपी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होगा.

बताते चलें कि अब सबकी निगाहें आधिकारिक परिणामों और नई सरकार की प्राथमिकताओं पर टिकी हैं. क्या जुलाई चार्टर के सुधार लागू होंगे. क्या कानून व्यवस्था और रोजगार के वादे जमीन पर उतरेंगे. क्या राजनीतिक ध्रुवीकरण कम होगा. इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में मिलेंगे. फिलहाल इतना तय है कि बांग्लादेश की जनता ने अपने वोट से बदलाव का स्पष्ट संदेश दे दिया है और देश एक नए राजनीतिक दौर की दहलीज पर खड़ा है.

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