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ऑनलाइन जिहादी कोर्स... फिदायीन हमलों के लिए ऐसे तैैयार होती है मसूूद अजहर की महिला ब्रिगेड, खुद किया खुलासा

भारत की सेना ने मई में ऑपरेशन सिंदूर कर पाकिस्तान और कब्जे वाले कश्मीर के 9 जैश ठिकानों को तबाह किया. इसके बावजूद मसूद अजहर ने अपनी महिला विंग जमात-उल-मोमिनात में अब तक 5,000 महिलाओं की भर्ती का दावा किया. इन महिलाओं को कथित तौर पर सुसाइड मिशन की ट्रेनिंग दी जा रही है.

Source: Masood Azhar (NIA Website)/ Canva
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की सेना ने मई महीने में ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई कर पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर के 9 आतंकी ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया था. इस कार्रवाई के बाद जहां जैश-ए-मोहम्मद को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. वहीं अब इसी आतंकी संगठन के सरगना मसूद अजहर ने अपने ही नेटवर्क की महिला विंग को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. अजहर के ताजा बयान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पनप रही नई जिहादी रणनीति की तरफ दुनिया का ध्यान खींच दिया है.

महिला फिदायीन हमलवारों की तैयार हो रही फौज 

मसूद अजहर ने दावा किया है कि जैश की महिला विंग में अब तक 5,000 महिलाओं की भर्ती हो चुकी है. यह वही विंग है जिसे पिछले वर्ष अक्टूबर में जमात-उल-मोमिनात नाम से आधिकारिक रूप दिया गया था. जानकारी के मुताबिक इस ब्रिगेड की कमान मसूद अजहर की बहन सईदा के हाथों में है. अजहर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया है कि जमात-उल-मोमिनात का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले महीनों में इसकी गतिविधियां और भी बड़े स्तर पर फैल सकती हैं. इन सबके बीच सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन महिलाओं को कथित तौर पर सुसाइड मिशन यानी फिदायीन हमलों के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है. अजहर का कहना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई जिलों में तेजी से भर्ती अभियान चलाया गया है. हर जिले में एक महिला प्रमुख, जिसे मुंतजिमा कहा जाएगा, नियुक्त की जा रही है. इन मुंतजिमाओं का काम होगा भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना. ट्रेनिंग की व्यवस्था करना. और विंग की गतिविधियों पर नजर रखना. इस मॉडल के जरिए जैश महिला नेटवर्क को संगठित तरीके से खड़ा करने की कोशिश कर रहा है.

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ऑनलाइन चल रहा जिहादी कोर्स

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जैश-ए-मोहम्मद ने भर्ती के लिए एक ऑनलाइन जिहादी कोर्स ‘तुफात अल-मुमिनात’ भी शुरू किया है. इस कोर्स के लिए 500 रुपये की फीस रखी गई है. पाकिस्तान में चरमपंथी गुट महिलाओं का अकेले बाहर जाना उचित नहीं मानते इसलिए जैश ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को नए हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि जैश का यह कदम आईएसआईएस. हमास और लिट्टे जैसे संगठनों की महिला ब्रिगेड की तर्ज पर नई आतंकी फोर्स तैयार करने की कोशिश है. ऑनलाइन प्रशिक्षण और महिला ब्रिगेड का तेजी से विस्तार क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. भारत पहले ही कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की मांग कर चुका है. ऐसे में मसूद अजहर के नए खुलासे पाकिस्तान की दोहरी नीति को एक बार फिर सामने लाते हैं. जैश की इस नई चाल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस महिला विंग की गतिविधियाँ आतंक के नए चेहरे के रूप में सामने आ सकती हैं.

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बताते चलें कि जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग को लेकर हुए ये खुलासे एक बार फिर साबित करते हैं कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंक की मिट्टी अब नए रूप में तैयार की जा रही है. महिलाओं को सुसाइड मिशन की ट्रेनिंग देना न सिर्फ खतरनाक रणनीति है, बल्कि आने वाले समय में क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर चुनौती भी बन सकता है. भारत की सुरक्षा एजेंसियां पहले से अलर्ट हैं. और विशेषज्ञों का मानना है कि आतंक के इस नए चेहरे पर कड़ी नजर रखना अब बेहद जरूरी हो गया है.

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