Advertisement
‘सीजफायर नहीं, अब होगा निर्णायक वार...’, डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दो टूक चेतावनी, बोले- अब बातचीत का समय निकल चुका
मिडिल ईस्ट में बीते कई दिनों से चल रही जंग अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर साफ दिख रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम से इनकार करते हुए साफ कहा है कि फिलहाल सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी.
Advertisement
Midil East War Update: बीते कई दिनों से मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है जहां कूटनीति और सैन्य कार्रवाई के बीच की दूरी लगभग खत्म होती दिख रही है. एक तरफ अमेरिका आक्रामक रुख अपनाए हुए है, तो दूसरी तरफ कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा भी इस समय दांव पर लगी हुई है. मौजूदा समय में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह प्रभावित हो गया है.
ट्रंप का दो टूक संदेश, नहीं होगा युद्धविराम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ किसी भी तरह के युद्धविराम की फिलहाल कोई संभावना नहीं है. वाइट हाउस से रवाना होते समय उन्होंने कहा कि बातचीत हो सकती है, लेकिन युद्ध रोकने का कोई इरादा नहीं है. उनका कहना था कि जब विरोधी को पूरी तरह हमलावर हो, तब युद्धविराम का सवाल ही नहीं उठता. इस बयान से यह संकेत साफ मिल रहा है कि अमेरिका इस बार ईरान की सैन्य क्षमता को निर्णायक रूप से खत्म करने के इरादे से आगे बढ़ रहा है. ट्रंप ने यह भी कहा कि जैसे ही अमेरिका अपनी कार्रवाई पूरी करेगा, इजरायल भी संघर्ष समाप्त करने पर विचार कर सकता है. जानकारी देते चलें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक दिन पहले ही 2200 से अधिक सैनिकों के साथ सबसे खतरनाक युद्धपोत को मिडिल ईस्ट की तरफ़ रवाना किया है.
Advertisement
खार्ग द्वीप पर हमले को लेकर सस्पेंस
Advertisement
ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर संभावित हमले को लेकर ट्रंप ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि योजना हो भी सकती है और नहीं भी. इस बयान ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक बाजारों में चिंता का माहौल बना हुआ है.
होर्मुज पर सख्ती से बढ़ी वैश्विक चिंता
Advertisement
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई होती है, लेकिन युद्ध के चलते यह मार्ग लगभग ठप हो चुका है. ट्रंप ने नाटो और अन्य सहयोगी देशों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस संकट में कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है. उन्होंने नाटो के साथ-साथ चीन और जापान जैसे देशों को भी इस जलमार्ग को खुलवाने के लिए आगे आने की सलाह दी. इसके अलावा ब्रिटेन से भी उन्होंने अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा जताई.
भारत के 22 जहाज फंसे
इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत पर भी साफ नजर आ रहा है. फारस की खाड़ी में भारत के करीब 22 जहाज अब भी फंसे हुए हैं. लेकिन ताजा ख़बरों के मुताबिक ईरान ने भारत के फ़िलहाल दो LPG टैंकर को गुज़रने की अनुमति दे दिया है. फ़िलहाल सरकार इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बैक-चैनल कूटनीति का सहारा ले रही है. जानकारों का मानना है कि अगर यह तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति और महंगी हो सकती है. साथ ही तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा. जहां अमेरिका इस मुद्दे में चीन को शामिल करने की बात कर रहा है, वहीं भारत इस मामले में काफी सतर्क नजर आ रहा है. भारत नहीं चाहता कि चीन का प्रभाव हिंद महासागर क्षेत्र में और बढ़े.
Advertisement
यह भी पढ़ें
बताते चलें कि मौजूदा हालात यह साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. एक तरफ सैन्य कार्रवाई तेज हो रही है, तो दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संकट जल्द थमेगा या और गहराएगा.