Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

डांडिया खेला, फोटो खिंचवाई और फिर ड्रेस रिटर्न! सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देख भड़के लोग, बोले- 'हद बेशर्मी है

नवरात्रि और डांडिया के बाद कपड़ों के ऑनलाइन रिटर्न को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. एक्स पर निशांत चांट नाम के यूजर ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें रिहायशी परिसर में बड़ी संख्या में पार्सल जमा दिखाई दे रहे हैं.

Image Source: Screengrab
Loading Ad...

नवरात्रि का त्योहार हो और डांडिया की धूम न हो, ऐसा भला कैसे हो सकता है. रंग-बिरंगे लहंगे, खूबसूरत चनिया-चोली, ट्रेडिशनल कुर्ते और नए फैशन के कपड़े त्योहार की रौनक बढ़ा देते हैं. इन दिनों बाजारों से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म तक, हर जगह त्योहार की तैयारी देखने को मिलती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि त्योहार के लिए खरीदे गए कपड़ों का इस्तेमाल करने के बाद कुछ लोग उन्हें वापस भी कर सकते हैं? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने इसी सवाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

वीडियो में एक रिहायशी परिसर में ऑनलाइन शॉपिंग के ढेर सारे पार्सल जमा दिखाई दे रहे हैं. पैकेटों की संख्या इतनी ज्यादा है कि उन्हें देखकर लोग हैरान हैं. सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे नवरात्रि और डांडिया के बाद कपड़े लौटाने की कथित आदत से जोड़ रहे हैं. हालांकि, इन पार्सलों में वास्तव में क्या सामान है और इन्हें वापस करने की वजह क्या है, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ कपड़ों के रिटर्न का वीडियो

Loading Ad...

दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निशांत चांट नाम के एक यूजर ने यह वीडियो शेयर किया है. वीडियो में एक रिहायशी परिसर के भीतर ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े कई पार्सल इकट्ठा दिखाई देते हैं. एक जगह शटर के नीचे पैकेटों का बड़ा ढेर लगा है, जबकि परिसर के खुले हिस्सों में भी कई पार्सल बिखरे हुए नजर आते हैं. इन पैकेटों पर शिपिंग लेबल और बारकोड लगे दिखाई देते हैं. इससे पता चलता है कि पार्सल किसी ऑनलाइन डिलीवरी या लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया का हिस्सा हैं. वीडियो में एक बड़ा गुलाबी बैग भी नजर आता है, जिसके अंदर कई पैकेट रखे हुए हैं. इसके अलावा, सफेद बोरियों में पैक सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हुए भी दिखाया गया है. बिल्डिंग के आसपास के रास्तों पर भी सीलबंद पार्सलों के ढेर दिखाई देते हैं. सामान की इतनी बड़ी संख्या देखकर सोशल मीडिया पर लोगों ने तरह-तरह के सवाल उठाने शुरू कर दिए. 

Loading Ad...

डांडिया खत्म होते ही अब कपड़ों की वापसी

Loading Ad...

इस वीडियो के साथ शेयर किए गए कैप्शन में लिखा गया, 'डांडिया खत्म… ड्रेस रिटर्न. बेशर्म पीढ़ी.' इसी कॉमेंट ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा. इसके बाद ऑनलाइन शॉपिंग, कपड़ों के इस्तेमाल और रिटर्न की आदतों को लेकर बहस शुरू हो गई. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस कथित चलन पर नाराजगी जाहिर की. उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति केवल एक या दो कार्यक्रमों में पहनने के लिए महंगे कपड़े खरीदता है और इस्तेमाल करने के बाद उन्हें वापस कर देता है, तो इससे विक्रेताओं को नुकसान हो सकता है. खासकर छोटे कारोबारियों के लिए ऐसे रिटर्न को संभालना एक्स्ट्रा खर्च और मेहनत का कारण बन सकता है. कुछ लोगों ने इसे दिखावे से भी जोड़कर देखा. उनका तर्क है कि त्योहारों के दौरान नए कपड़े पहनना खुशी की बात है, लेकिन केवल कुछ घंटों के इस्तेमाल के लिए कपड़े खरीदना और फिर उन्हें लौटाने की योजना बनाना सही व्यवहार नहीं माना जा सकता. हालांकि, सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की आलोचना करने से पहले यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि हर रिटर्न के पीछे एक ही वजह नहीं होती.

यह भी पढ़े: घूमने-फिरने का शौक है तो मिल सकती है 95 लाख की सैलरी! Richard Branson की कंपनी दे रही अनोखी नौकरी

क्या ऑनलाइन खरीदे गए कपड़े पहनकर वापस करना सही है?

Loading Ad...

यह सवाल केवल खरीदारी की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राहक की जिम्मेदारी से भी जुड़ा है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रिटर्न की सुविधा का उद्देश्य ग्राहकों को गलत, खराब या अनुपयुक्त उत्पाद से राहत देना है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर उत्पाद को इस्तेमाल करने के बाद वापस करना उचित है. अगर कोई कपड़ा केवल साइज या गुणवत्ता की समस्या के कारण लौटाया जा रहा है, तो यह सामान्य और जायज वजह हो सकती है. लेकिन यदि किसी ग्राहक ने जानबूझकर किसी कार्यक्रम में पहनने के लिए कपड़ा खरीदा और उसे इस्तेमाल करने के बाद लौटाने की योजना बनाई, तो यह विक्रेता की रिटर्न नीति और उत्पाद की स्थिति के आधार पर अनुचित माना जा सकता है. यहां एक जरूरी बात समझनी चाहिए कि हर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के नियम अलग हो सकते हैं. कुछ उत्पादों पर रिटर्न की सुविधा उपलब्ध होती है, जबकि कुछ पर केवल एक्सचेंज या सीमित अवधि के भीतर ही वापसी की अनुमति मिलती है. कपड़ों की श्रेणी, उत्पाद की स्थिति और विक्रेता की शर्तों के अनुसार भी नियम बदल सकते हैं.

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

यह भी पढ़ें

वीडियो सामने आने के बाद कई यूजर्स ने कथित तौर पर त्योहारों में कपड़े पहनकर लौटाने की आदत पर सवाल उठाए. कुछ लोगों का मानना है कि ऐसी गतिविधियों से छोटे दुकानदारों और ऑनलाइन विक्रेताओं की मेहनत की अनदेखी होती है. उनके अनुसार, किसी उत्पाद को ग्राहक तक पहुंचाने में केवल कपड़े की कीमत ही नहीं, बल्कि पैकिंग, परिवहन और अन्य परिचालन खर्च भी शामिल होते हैं. कुछ यूजर्स ने इस मुद्दे को आर्थिक असमानता से जोड़ते हुए कहा कि कई परिवार त्योहारों पर नए कपड़े खरीदने के लिए बजट बनाते हैं, जबकि कुछ लोग केवल एक कार्यक्रम में पहनने के लिए महंगे कपड़े खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं. हालांकि, किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति या खरीदारी की वजह का अनुमान केवल इस तरह की सोशल मीडिया चर्चा के आधार पर नहीं लगाया जा सकता. वहीं, कुछ कॉमेंट में यह तंज भी किया गया कि ग्राहकों की कथित गलत आदतों के कारण कंपनियां रिटर्न की समय-सीमा और शर्तें सख्त कर सकती हैं. लेकिन यह कहना कि रिटर्न की छोटी समय-सीमा केवल इसी वजह से तय की जा रही है, पर्याप्त तथ्यों के बिना सही नहीं होगा. कंपनियां अपनी नीतियां बनाते समय लागत, उत्पाद की श्रेणी, ग्राहकों के अनुभव और कारोबार से जुड़े कई पहलुओं पर विचार करती हैं

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...