जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

UP में जमीन के रिकॉर्ड का बड़ा अपडेट! 99.86% रियल टाइम खतौनी व्यवस्था पूरी, 65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज

UP: सपा सरकार में वर्ष 2017 से पहले जहां खतौनी का निर्माण छह वर्ष के रोस्टर के अनुसार होता था, वहीं अब प्रदेश में रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू हो चुकी है.

Author
20 Oct 2026
( Updated: 20 Oct 2026
09:07 AM )
UP में जमीन के रिकॉर्ड का बड़ा अपडेट! 99.86% रियल टाइम खतौनी व्यवस्था पूरी,  65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज
Image Source: UP Information Department
Advertisement

CM Yogi: उत्तर प्रदेश में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में योगी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. सपा सरकार में वर्ष 2017 से पहले जहां खतौनी का निर्माण छह वर्ष के रोस्टर के अनुसार होता था, वहीं अब प्रदेश में रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू हो चुकी है. इस व्यवस्था का 99.86 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. ऑनलाइन वरासत, डिजिटल भू नक्शे और अंश निर्धारण जैसे कार्यों में भी बड़े स्तर पर प्रगति दर्ज की गई है.

सपा सरकार के समय राजस्व विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाएं ऑफलाइन प्रक्रियाओं पर निर्भर थीं. वरासत दर्ज कराने के लिए लोगों को पारंपरिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जबकि खसरा निर्माण भी ऑफलाइन होता था. भूमि अभिलेखों में बदलाव और उनके अद्यतन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के कारण नागरिकों को समय और श्रम खर्च करना पड़ता था. भू-नक्शों की ऑनलाइन उपलब्धता का भी अभाव था. योगी सरकार ने इन व्यवस्थाओं को बदलते हुए राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण को प्राथमिकता दी है.

‘नारी गरिमा से खिलवाड़ स्वीकार नहीं’, महानवमी पर CM योगी का कड़ा संदेश, गोरखनाथ मंदिर में किया कन्या पूजन

खतौनी में तकनीक, रिकॉर्ड में पारदर्शिता

Advertisement

राजस्व विभाग के मुताबिक रियल टाइम खतौनी व्यवस्था के साथ क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर युक्त खतौनी तैयार करने की पहल की गई है. इससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच और भूमि संबंधी रिकॉर्ड के सत्यापन को आसान बनाने में मदद मिल सकती है. छह वर्ष के रोस्टर पर निर्भर पुरानी व्यवस्था की तुलना में यह बदलाव भूमि अभिलेखों को अधिक नया (अपडेट) रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है.

वरासत के लिए ऑनलाइन सुविधा

भूमि स्वामी की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया ह.  राजस्व विभाग के मुताबिक अब तक 65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं. पहले यह प्रक्रिया ऑफलाइन थी और इसमें लंबा व अनिश्चित समय लगने की शिकायतें रहती थीं.

Advertisement

नक्शे और जमीन के हिस्से का रिकॉर्ड भी हुआ बेहतर

भूमि संबंधी रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के लिए अंश निर्धारण में तेजी लाई गई है.विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 85 प्रतिशत से अधिक गाटों में अंश निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है.  उपलब्ध भू नक्शों और शजरों (विस्तृत भू नक्शों) का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण हो चुका है. वहीं 98 प्रतिशत भू नक्शों को खतौनी से लिंक किया जा चुका है. इससे जमीन के रिकॉर्ड और नक्शे के बीच डिजिटल संबंध स्थापित करने में मदद मिली है.

यह भी पढ़ें

वहीं, वर्ष 2021 से ई-खसरा पड़ताल ऐप के माध्यम से डिजिटल खसरा तैयार करने का कार्य भी किया जा रहा है. इससे खेतों से संबंधित विवरण को डिजिटल रूप में दर्ज करने की व्यवस्था विकसित हुई है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें