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TVK ने खेला मास्टरस्ट्रोक, पुडुचेरी की 30 सीटों पर उतारे प्रत्याशी, बदल सकते हैं समीकरण
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी दलों ने प्रचार तेज कर दिया है. इसी बीच तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने सूबे के सभी 30 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है.
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पुडुचेरी में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा चुका है. सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतर चुके हैं और चुनाव प्रचार ने रफ्तार पकड़ ली है. इसी बीच तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने बड़ा दांव खेलते हुए केंद्र शासित प्रदेश की सभी 30 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. इस कदम को पुडुचेरी की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.
TVK की एंट्री से बदले समीकरण
दरअसल, TVK अब तक मुख्य रूप से तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय रही है, लेकिन इस बार उसने पुडुचेरी में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने का फैसला किया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TVK की एंट्री से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं और पारंपरिक दलों के लिए चुनौती बढ़ सकती है.
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अन्नाद्रमुक ने भी खोले पत्ते
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इधर, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने भी अपनी तैयारी को तेज करते हुए दो उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. एनडीए गठबंधन के तहत अन्नाद्रमुक को ऊप्पलम और ओरलियनपेट सीटें मिली हैं. पार्टी के राज्य सचिव और पूर्व विधायक अंबलगन को ऊप्पलम से उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि ए. गांधी को ओरलियनपेट सीट से मैदान में उतारा गया है.
गठबंधन की रणनीति साफ
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सीट बंटवारे के समझौते के अनुसार, मुख्यमंत्री एन रंगासामी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस 16 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं भाजपा को 14 सीटें मिली हैं. भाजपा ने अपने कोटे में से दो-दो सीटें अन्नाद्रमुक और नवगठित लक्ष्य जननायक काची को दी हैं.
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बताते चलें कि चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में आयोजित होंगे, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी. इस बीच बीजेपी, कांग्रेस, डीएमके और एनआर कांग्रेस जैसे बड़े दल भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा और रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं. पुडुचेरी का यह चुनाव इस बार काफी दिलचस्प और बहुकोणीय मुकाबला बनता जा रहा है. नए दलों की एंट्री, गठबंधन की रणनीति और उम्मीदवारों की घोषणा ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है. अब देखना यह होगा कि जनता किस पर भरोसा जताती है और किसके सिर पर जीत का ताज सजता है.