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हरियाणा के हजारों NHM कर्मचारियों को बड़ी राहत, सभी कच्चे कर्मियों को मिलेगा सर्विस बाय-लॉज का लाभ

Haryana: नायब सैनी सरकार ने फैसला लिया है कि अब सभी NHM कर्मचारियों को “सर्विस बाय-लॉज” यानी सेवा उपनियमों के दायरे में लाया जाएगा. इस फैसले के बाद कर्मचारियों में खुशी का माहौल है, क्योंकि अब उन्हें पहले से ज्यादा सुरक्षा और नियमबद्ध सुविधाएं मिल सकेंगी.

Image Source: Nayab Saini Tweet
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Haryana: हरियाणा में राष्टीय स्वास्थ्य मिशन (NHM ) के तहत काम कर रहे हजारों सविंदा यानी कच्चे कर्मचारियों के लिए आज का दिन बेहद खास माना जा रहा है, लंबे समय से अपनी सेवा सुरक्षा और समान अधिकारों की मांग कर रहे कर्मचारियों को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है. नायब सैनी सरकार ने फैसला लिया है कि अब सभी NHM कर्मचारियों को “सर्विस बाय-लॉज” यानी सेवा उपनियमों के दायरे में लाया जाएगा. इस फैसले के बाद कर्मचारियों में खुशी का माहौल है, क्योंकि अब उन्हें पहले से ज्यादा सुरक्षा और नियमबद्ध सुविधाएं मिल सकेंगी.

हाई कोर्ट के फैसले के बाद सरकार का बड़ा कदम

इस पूरे फैसले की शुरुआत पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एक अहम आदेश से हुई थी. यह फैसला डॉ. नेहा बंसल बनाम हरियाणा राज्य मामले में 17 नवंबर 2025 को आया था. शुरुआत में माना जा रहा था कि इस फैसले का फायदा सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. लेकिन अब हरियाणा सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए इसे प्रदेश के सभी एनएचएम कर्मचारियों पर लागू कर दिया है.
सरकार को वित्त विभाग से भी मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद मिशन निदेशक कार्यालय ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। इससे लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति खत्म हो गई है.

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सभी जिलों के अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

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सरकार ने सिर्फ घोषणा ही नहीं की, बल्कि इसके पालन को लेकर भी सख्ती दिखाई है. मिशन निदेशक ने प्रदेश के सभी जिलों के सिविल सर्जनों को पत्र भेजकर साफ निर्देश दिए हैं कि इस आदेश को तुरंत लागू किया जाए.
आदेश में कहा गया है कि किसी भी पात्र कर्मचारी को सेवा सुरक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं का लाभ देने में देरी नहीं होनी चाहिए. सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और स्वास्थ्य सेवाएं भी पहले से ज्यादा मजबूत होंगी। अब कर्मचारी ज्यादा सुरक्षित माहौल में काम कर पाएंगे.

लंबे संघर्ष के बाद मिली जीत

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एनएचएम कर्मचारी संगठन कई वर्षों से “समान काम-समान नियम” की मांग कर रहे थे. कर्मचारियों का कहना था कि जो लोग कोर्ट गए और जो नहीं गए, उनके बीच भेदभाव करना गलत है. सरकार के इस फैसले को कर्मचारियों के संघर्ष की बड़ी जीत माना जा रहा है. इससे उन हजारों कर्मचारियों को राहत मिली है जो गांवों और शहरों में लगातार स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं. कर्मचारियों को उम्मीद है कि अब उनकी नौकरी और भविष्य पहले से ज्यादा सुरक्षित होगा.

फिलहाल कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा आदेश

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हालांकि सरकार ने यह लाभ लागू कर दिए हैं, लेकिन आदेश में यह भी साफ किया गया है कि यह फैसला फिलहाल हाई कोर्ट में लंबित जनहित याचिका (PIL) के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा. यानी आगे कोर्ट जो अंतिम फैसला देगा, उसी के अनुसार स्थिति तय होगी.
फिर भी मौजूदा समय में इसे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. खासकर उन कर्मचारियों के लिए, जो लंबे समय से अस्थायी नौकरी और अनिश्चित भविष्य के दबाव में काम कर रहे थे.

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