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परिवार संग फरारी काट रही थी TCS कांड की आरोपी निदा खान, पुलिस ने संभाजीनगर से किया गिरफ्तार; अब होंगे बड़े खुलासे

महाराष्ट्र के नासिक में TCS धर्मांतरण और उत्पीड़न मामले में फरार निदा खान को पुलिस ने छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया है. वह नारेगांव के एक फ्लैट में परिवार के साथ छिपकर रह रही थी. पुलिस ने देर रात कोर्ट में पेश कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.

Image Source: IANS
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Nasik TCS Case: महाराष्ट्र के नासिक जिले में सामने आए चर्चित TCS धर्मांतरण और उत्पीड़न मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. लंबे समय से फरार चल रही महिला आरोपी निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी छत्रपति संभाजीनगर के नारेगांव इलाके से हुई, जहां वह अपने परिवार के साथ एक फ्लैट में छिपकर रह रही थी. इस कार्रवाई को नासिक क्राइम ब्रांच और छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया. गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले ने एक बार फिर राज्यभर में चर्चा तेज कर दी है.

25 दिनों से चल रही थी तलाश

पुलिस के मुताबिक, निदा खान बीते 25 मार्च से फरार थी और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपनी लोकेशन बदल रही थी, ताकि जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके. उसकी तलाश में नासिक पुलिस की दो विशेष टीमें लगातार जुटी हुई थीं. आखिरकार गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने नारेगांव स्थित कैसर कॉलोनी के एक फ्लैट पर दबिश दी और उसे हिरासत में ले लिया. बताया जा रहा है कि उस फ्लैट में निदा खान के साथ उसकी मां, पिता, भाई और मौसी भी मौजूद थे. देर रात उसे अदालत में पेश किया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई.

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धर्मांतरण और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप

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इस पूरे मामले ने इसलिए ज्यादा गंभीर रूप ले लिया है, क्योंकि आरोप केवल जबरन धर्मांतरण तक सीमित नहीं हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि पीड़िता को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, धार्मिक दबाव बनाया गया और उसके साथ यौन शोषण की कोशिशें भी हुईं. SIT और पीड़िता के वकीलों ने अदालत में कई ऐसे तथ्य रखे, जिन्होंने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया. अभियोजन पक्ष के अनुसार, निदा खान पर आरोप है कि उसने पीड़िता को बुर्का दिया, धार्मिक किताबें उपलब्ध कराईं और उसके मोबाइल में इस्लामिक धार्मिक एप्लिकेशन इंस्टॉल करवाए. इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि पीड़िता का नाम बदलकर 'हानिया' रखने की तैयारी की जा रही थी और उसे मलेशिया भेजने की कथित योजना बनाई गई थी. अदालत ने भी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते समय कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला सुनियोजित ब्रेनवॉशिंग और दबाव का प्रतीत होता है.

अग्रिम जमानत याचिका भी हुई खारिज

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दरअसल, गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी. उसने गर्भावस्था का हवाला देते हुए राहत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने साफ कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में बाधा नहीं आनी चाहिए. इसके बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी थी.

मुख्य आरोपियों पर क्या हैं आरोप?

मामले में मुख्य आरोपी दानिश शेख पर शादी का झांसा देकर रेप करने का आरोप लगाया गया है. वहीं तौसीफ बिलाल अत्तार पर पीड़िता को ब्लैकमेल कर यौन संबंध बनाने का दबाव डालने और छेड़छाड़ करने के आरोप हैं. पीड़िता की ओर से पेश अधिवक्ताओं एम जी कुरकुटे और नितिन पंडित ने अदालत में दावा किया कि आरोपियों ने कंपनी में अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए पीड़िता पर धर्म बदलने का दबाव बनाया. साथ ही उसे मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की गई. पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि उसे जबरन मांसाहारी भोजन खाने के लिए मजबूर किया गया और कार्यालय में उसकी जाति को लेकर अपमानित किया गया. इन आरोपों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है. पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं इस पूरे नेटवर्क के तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह से तो नहीं जुड़े हैं.

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18 मई तक न्यायिक हिरासत

इसी मामले में नासिक की अदालत ने चार मुख्य आरोपियों रजा रफीक मेमन, तौसीफ बिलाल अत्तार, दानिश शेख और शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी को 18 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. SIT ने इन सभी को भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था. अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और कई अहम सबूत जुटाए जा रहे हैं. अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी. फिलहाल SIT इस पूरे मामले में दर्ज 9 अलग-अलग शिकायतों की जांच कर रही है. अब तक एक महिला ऑपरेशन मैनेजर समेत कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं.

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बताते चलें कि देश की बड़ी IT कंपनी TCS ने भी मामले पर सख्त रुख अपनाया है. कंपनी ने साफ कहा है कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का उत्पीड़न, दबाव या जबरदस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मामले में नाम सामने आने के बाद आरोपी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. साथ ही कंपनी ने जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग देने की बात कही है. इस पूरे मामले ने कॉर्पोरेट सेक्टर में कार्यस्थल की सुरक्षा, मानसिक उत्पीड़न और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है. अब सभी की नजर पुलिस जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है.

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