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‘नमाज की छूट, पंडाल के लिए कोर्ट?’ बंगाल में नितिन नबीन का ममता सरकार पर तीखा हमला
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सियासत तेज हो गई है. नितिन नबीन ने ममता बनर्जी सरकार पर धार्मिक मामलों में दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया. उनके बयान और गतिविधियों ने राज्य की राजनीति को और गर्मा दिया है.
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का ऐलान होते ही सियासत अपने चरम पर पहुंच गई है. हर दिन नए आरोप-प्रत्यारोप और रणनीतियों के साथ राजनीतिक दल चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. इसी बीच बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) का बंगाल दौरा चर्चा का केंद्र बन गया है. उनके बयान और गतिविधियों ने राज्य की राजनीति को और गर्मा दिया है.
ममता सरकार पर दोहरी नीति का आरोप
बुधवार को बंगाल पहुंचे नितिन नबीन ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में धार्मिक मामलों को लेकर दोहरी नीति अपनाई जा रही है. उनका कहना था कि एक तरफ नमाज पढ़ने की खुली छूट दी जाती है, जबकि दूसरी तरफ पूजा पंडाल लगाने के लिए लोगों को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है. उन्होंने इसे राज्य की सांस्कृतिक परंपरा के खिलाफ बताया.
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दक्षिणेश्वर मंदिर से दिया संदेश
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दक्षिणेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद नितिन नबीन ने कहा कि उन्होंने मां काली से बंगाल के विकास और शांति की कामना की है. उन्होंने यह भी कहा कि जिस बंगाल की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत रही है, आज वहीं कुछ ऐसी स्थितियां बन रही हैं जो उस पहचान को नुकसान पहुंचा रही हैं. उनके इस बयान ने साफ संकेत दिया कि बीजेपी इस बार चुनाव में सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दों को प्रमुखता देने वाली है.
रणनीति को धार देने में जुटी बीजेपी
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दरअसल, नितिन नबीन का यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं माना जा रहा. पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह यात्रा आगामी चुनावों के लिए रणनीति को अंतिम रूप देने का हिस्सा है. उन्होंने राज्य के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई अहम बैठकों में हिस्सा लिया. इन बैठकों में बूथ स्तर से लेकर बड़े स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया. बीजेपी इस बार हर बूथ पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, ताकि चुनावी नतीजों पर सीधा असर डाला जा सके.
‘चक्रव्यूह’ रणनीति पर फोकस
सूत्र बताते हैं कि इस बार बीजेपी ‘चक्रव्यूह’ रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है. इसका मतलब है कि पार्टी सिर्फ बड़े मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि हर छोटे स्तर पर भी अपनी पकड़ मजबूत करेगी. डिजिटल कैंपेन, सोशल मीडिया और जमीनी कार्यकर्ताओं के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की योजना बनाई जा रही है. खास बात यह है कि स्थानीय मुद्दों को भी इस बार चुनावी एजेंडा में प्रमुखता दी जा रही है.
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मुकाबला होगा बेहद दिलचस्प
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी इस बार बंगाल में पूरी ताकत झोंकने के मूड में है. वहीं नितिन नबीन की अगुवाई वाली टीएमसी भी अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है. ऐसे में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है.
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बताते चलें कि बंगाल का यह चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति और जनसमर्थन की असली परीक्षा बनने जा रहा है. अब देखना यह होगा कि किसकी रणनीति जनता के दिल तक पहुंचती है और कौन इस सियासी जंग में बाजी मारता है.