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कभी सुनने पड़ते थे ताने, आज 3,000 महिलाओं की बनीं मददगार; जानें कौन हैं अलीगढ़ की आशा कार्यकर्ता राजबाला देवी, जिन्हें मिला राष्ट्रीय सम्मान

नवरात्र में जहां देश देवी के नौ रूपों की आराधना करता है, वहीं अलीगढ़ की आशा कार्यकर्ता राजबाला देवी भी समाज के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं. वर्ष 2006 में काम शुरू करने के दौरान उन्हें ताने और परिवार के कम सहयोग जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आज अपनी मेहनत और समर्पण से वह हजारों महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं.

Image Source: UP Information Department
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नवरात्र में जब पूरा देश शक्ति स्वरूपा देवी के नौ रूपों की आराधना करता है, तब समाज में ऐसी कई ‘जीवित शक्तियां’ भी हैं जो बिना किसी शोर-शराबे के लोगों का जीवन संवार रही हैं. अलीगढ़ की आशा कार्यकर्ता राजबाला देवी ऐसी ही एक शक्ति हैं. कभी घर-घर जाकर महिलाओं को स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरूक करने पर ताने सुनने वालीं राजबाला आज हजारों महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की अहम कड़ी बन चुकी हैं. राजबाला ने मुश्किल परिस्थितियों और लोगों की बातों को पीछे छोड़कर अपने काम से ऐसी पहचान बनाई कि आज वही लोग उन्हें सम्मान की नजर से देखते हैं, जो कभी उनके काम पर सवाल उठाते थे.

राजबाला बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 2006 में आशा कार्यकर्ता के रूप में काम शुरू किया था. उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका और स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर जागरूकता कम थी. ऐसे में घर-घर जाकर महिलाओं को योजनाओं की जानकारी देने पर कई बार ताने सुनने पड़ते थे. परिवार का सहयोग भी कम था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. नवरात्र के नौ दिनों की तरह उनकी साधना भी निरंतर चलती रही. लगातार मेहनत और समर्पण से उन्होंने धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जीता.

3,000 से अधिक महिलाओं को दिलाया योजनाओं का लाभ

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राजबाला देवी अब तक 3,000 से अधिक महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिला चुकी हैं. संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने गांव की महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराने के फायदे समझाए। उनका प्रयास रहा कि गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें और जच्चा-बच्चा दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। मातृत्व और शिशु की रक्षा के उनके इस संकल्प में मां के रक्षक स्वरूप की झलक मिलती है।

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टीकाकरण से आयुष्मान कार्ड तक, घर-घर पहुंचाईं योजनाएं

आशा कार्यकर्ता के रूप में राजबाला देवी ने मिशन टीकाकरण, परिवार कल्याण, आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड से जुड़ी गतिविधियों में भी अहम भूमिका निभाई. उन्होंने घर-घर जाकर बच्चों का टीकाकरण कराया और परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाई. गरीब परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनवाकर उन्हें पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा से जोड़ने में भी मदद की.

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जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक मिला सम्मान

राजबाला देवी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए जिले से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक सम्मानित किया जा चुका है. जिले में उन्हें 'अलीगढ़ रत्न' सम्मान मिला, जबकि प्रदेश स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सम्मानित किया गया. उनके कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। 26 जनवरी 2025 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से उन्हें उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया. यह उपलब्धि राजबाला देवी के साथ-साथ पूरे जिले के लिए भी गर्व का विषय है.

बढ़े मानदेय और प्रोत्साहन राशि से मिली आर्थिक मजबूती

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राजबाला देवी के मुताबिक, शुरुआती दौर में आशा कार्यकर्ताओं को मिलने वाला मानदेय काफी कम था. योगी सरकार की ओर से मानदेय और प्रोत्साहन राशि बढ़ाए जाने से आशा कार्यकर्ताओं को आर्थिक मजबूती मिली है. इससे परिवार का खर्च चलाने में भी पहले की तुलना में सहूलियत हुई है. नवरात्र का संदेश है कि नारी शक्ति का सम्मान ही समाज की सच्ची आराधना है. राजबाला देवी जैसी आशा कार्यकर्ता इसी शक्ति का प्रतीक हैं, जो हर दिन गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य की रक्षा का दायित्व निभा रही हैं.

आशा कार्यकर्ताओं की प्रमुख जिम्मेदारियां
- मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं में सहयोग
- टीकाकरण और पोषण के प्रति जागरूकता
- परिवार नियोजन की जानकारी देना
- बीमारियों और महामारी की रोकथाम में सहयोग
- संचारी रोग नियंत्रण अभियान में भागीदारी
- स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना

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बताते चलें कि राजबाला देवी की कहानी साबित करती है कि सच्ची सेवा के लिए बड़े पद या पहचान की जरूरत नहीं होती. घर-घर जाकर महिलाओं और बच्चों की सेहत की चिंता करने वाली राजबाला आज समाज के लिए प्रेरणा बन गई हैं. नवरात्र में उनकी मेहनत और समर्पण यही संदेश देते हैं कि नारी शक्ति केवल पूजनीय ही नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाली भी है.

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