Advertisement
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, केरन सेक्टर में दो आतंकवादी ढेर, सर्च ऑपरेशन जारी
सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया.
Advertisement
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में शनिवार को नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सुरक्षा बलों ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया. आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि सुरक्षा बलों ने शनिवार सुबह कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर के जुमगुंड इलाके में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की एक कोशिश को नाकाम कर दिया. जिसमे अब तक दो आतंकी मारे गए हैं.
एलओसी पर सुरक्षा बलों ने घुसपैठ की कोशिश नाकाम की
सूत्रों ने बताया, "केरन सेक्टर के जुमगुंड इलाके में एलओसी के पास संदिग्ध गतिविधि देखने के बाद सतर्क जवानों ने घुसपैठियों को चुनौती दी, जिसके बाद दोनों तरफ से कुछ देर तक गोलीबारी हुई." सूत्रों ने कहा, "फिलहाल इलाके में एक अभियान चल रहा है. अभी और जानकारी का इंतजार है." इस घटना की आधिकारिक पुष्टि का भी इंतजार है.
Advertisement
जम्मू-कश्मीर में लगभग 740 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा (एलओसी) है. यह घाटी के कुपवाड़ा, बांदीपोरा और बारामूला जिलों के साथ-साथ जम्मू संभाग के राजौरी, पुंछ और जम्मू जिले के कुछ हिस्सों से होकर गुजरती है.
Advertisement
एलओसी पर भारतीय सेना रखती है कड़ी नज़र
भारतीय सेना एलओसी की सुरक्षा करती है. यहां घुसपैठ रोकने के लिए कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था है, जिसमें लगभग 550 किलोमीटर लंबी बाड़ भी शामिल है. इस बाड़ की कड़ी निगरानी की जाती है, ताकि सीमा पार से होने वाली गतिविधियों, तस्करी और आतंकवादियों की हरकतों पर नजर रखी जा सके.
Advertisement
राजौरी, पुंछ, बारामूला और कुपवाड़ा जैसे एलओसी सेक्टरों में सेना पूरी तरह सतर्क रहती है. पुंछ जैसे गेट चेकपॉइंट्स पर आधारित डिजिटल बॉर्डर क्रॉसिंग सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि स्थानीय निवासियों की आवाजाही को सुव्यवस्थित किया जा सके.
जम्मू-कश्मीर में लगभग 200 किलोमीटर लंबी है अंतरराष्ट्रीय सीमा
एलओसी के अलावा, जम्मू-कश्मीर में लगभग 200 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा भी है, जो जम्मू संभाग के जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में पड़ती है. इसकी सुरक्षा (बीएसएफ) करती है.
Advertisement
यह भी पढ़ें
सीमा पार से आतंकवादियों द्वारा की जाने वाली घुसपैठ, तस्करी और ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए सेना और बीएसएफ तैनात हैं. इन ड्रोनों का इस्तेमाल हथियार, गोला-बारूद, नकदी और नशीले पदार्थ गिराने के लिए किया जाता है.