जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

प्रयागराज में CM योगी का राहुल गांधी पर तंज, बोले- आजादी के लिए नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी भी जेल गए

सीएम योगी ने बताया कि मसुरियादीन जी 1946 में यूपी विधानसभा के सदस्य बने, फिर स्वतंत्र भारत में 1952 से 1972 तक चार बार चुनकर संसद गए. 1952 में जब एक सीट पर दो सांसद चुने जाते थे तो पं. नेहरू व मसुरियादीन जी एक साथ चुनकर गए थे. उन्होंने काले कानून के खिलाफ 1952 में ही आवाज उठाई थी.

Author
15 Oct 2026
( Updated: 15 Oct 2026
03:45 PM )
प्रयागराज में CM योगी का राहुल गांधी पर तंज, बोले- आजादी के लिए नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी भी जेल गए
Image Credit: IANS
Advertisement

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को तेलियरगंज चौराहे पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, ब्रिटिश जरायम पेशा कानून को समाप्त कराने वाले संविधान सभा के सदस्य एवं पूर्व सांसद महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया. मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी नोट कर लें कि देश की आजादी के लिए केवल नेहरू जी ही नहीं, बल्कि मसुरियादीन जी भी जेल गए थे. इनकी आयु 66-67 वर्ष रही, जिसमें 9 वर्ष (1932-1944) वह आजादी की अलख जगाने के लिए जेल में रहे. रिहा होने पर भी वह जन-जागरण करते रहे थे.  

CM योगी का अखिलेश यादव पर तंज, बोले- माफिया की जगह मिट्टी में, अब गरीबों के बनेंगे बड़े-बड़े घर

चौराहे का नामकरण होगा, संस्था में भी लगेगी भव्य प्रतिमा

Advertisement

सीएम योगी ने महापौर से प्रस्ताव मांगा और कहा कि जहां मसुरियादीन जी की प्रतिमा लगी है, वह चौराहा उनके नाम पर बनेगा. प्रयागराज की किसी एक अच्छी संस्था का नाम भी महाशय मसुरियादीन के नाम पर किया जाएगा. वहां भी उनकी भव्य प्रतिमा लगेगी, क्योंकि महापुरुषों को सम्मान देकर ही समाज आगे बढ़ सकता है. भूत को सम्मान देकर वर्तमान संवर सकता है और वर्तमान के संवरने से ही भविष्य उज्ज्वल होगा. महाशय का सम्मान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान है, इसमें कोई कमी नहीं आने दी जाएगी. 

उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर 1911 को महाशय मसुरियादीन पासी का भी जन्म हुआ था. इतिहास के कालचक्र ने इन्हें विस्मृत कर दिया था, लेकिन विकास व विरासत पर विश्वास करने वाली भाजपा सरकार महापुरुषों को विस्मृत नहीं करती. हमने उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रतिमा का अनावरण किया है. 

चार बार सांसद बने थे महाशय मसुरियादीन पासी

Advertisement

सीएम योगी ने बताया कि मसुरियादीन जी 1946 में यूपी विधानसभा के सदस्य बने, फिर स्वतंत्र भारत में 1952 से 1972 तक चार बार चुनकर संसद गए. 1952 में जब एक सीट पर दो सांसद चुने जाते थे तो पं. नेहरू व मसुरियादीन जी एक साथ चुनकर गए थे. उन्होंने काले कानून के खिलाफ 1952 में ही आवाज उठाई थी. 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर में मुंह की खाने के बाद अंग्रेजों ने 1871 में जरायम पेशा कानून बनाकर पासी समेत तमाम जातियों को अपमानित किया था. बाबा साहेब व मसुरियादीन जी ने उस कानून के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अंततः उसे समाप्त कर पासी, सोनकर, वंचित, दलित समाज को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़कर सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया. 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पासी समाज के शौर्य व पराक्रम की गाथा को हर कोई जानता है. महाराजा बिजली पासी ने 12वीं सदी में लखनऊ व आसपास के क्षेत्र में 12 किले बनाए थे. विदेशी आक्रांताओं से लड़ने के लिए इसे रणनीति का हिस्सा बनाया था. वीर मक्का पासी आजादी की लड़ाई लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए तो उनकी पत्नी वीरांगना ऊदा देवी ने मोर्चा संभालते हुए अंग्रेजों के छुक्के छुड़ाए. अंततः उनका भी बलिदान हो गया. 

योगी सरकार का बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर, ड्रोन से एंटी लार्वा छिड़काव

महाराजा बिजली पासी के किले का कराया पुनरुद्धार

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने लखनऊ स्थित महाराजा बिजली पासी के किले का पुनरुद्धार किया. डबल इंजन सरकार लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी के नाम पर पीएसी बटालियन गठित कर रही है. वहां भी उनकी अश्वारोही भव्य प्रतिमा लगाई जा रही है. सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं है. जिन्होंने दलितों, वंचितों की आवाज को आगे बढ़ाया और देश-समाज के लिए जीवन समर्पित किया, उन्हें सम्मान मिलना चाहिए. 

Advertisement

यह भी पढ़ें

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें