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आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता तक... योगी सरकार की पहल से 1.29 लाख बेटियां होंगी जागरूक, सीखेंगी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेना

त्तर प्रदेश में सेल्फ एस्टीम कार्यक्रम के तहत 1,29,227 बालिकाओं को आत्मसम्मान, व्यक्तित्व विकास और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी गई.

आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता तक... योगी सरकार की पहल से 1.29 लाख बेटियां होंगी जागरूक, सीखेंगी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेना
Image Source: UP Information Department
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बालिकाओं को आत्मविश्वास से भरने, उनमें आत्मसम्मान की भावना विकसित करने और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण पहल की गई है. प्रदेश के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) की 1,29,227 बालिकाओं ने सेल्फ एस्टीम कार्यक्रम पर आधारित प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया. कार्यक्रम के तहत छात्राओं को आत्मसम्मान और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी जानकारी देने के साथ सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने की व्यावहारिक प्रक्रिया भी समझाई गई.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बालिकाओं की शिक्षा और उनके समग्र विकास को लेकर किए जा रहे प्रयासों के क्रम में यह कार्यक्रम छात्राओं को जीवनोपयोगी जानकारी से जोड़ने की दिशा में अहम है. बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के निर्देशन में संचालित विभागीय गतिविधियों के तहत बालिकाओं को शिक्षा के साथ अपने स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जरूरतों के प्रति जागरूक बनाने पर जोर दिया जा रहा है.

आत्मसम्मान और आत्मविश्वास विकसित करने पर जोर

सेल्फ एस्टीम कार्यक्रम का केंद्र बालिकाओं में आत्मसम्मान की भावना को प्रोत्साहित करना और उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित करना है. प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राओं को स्वयं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने और दैनिक जीवन में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के महत्व से परिचित कराया गया. इस तरह की गतिविधियां बालिकाओं को केवल शैक्षिक ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक जीवन की आवश्यकताओं के प्रति भी जागरूक बनाने का अवसर प्रदान करती हैं.

अस्पताल भ्रमण से समझीं स्वास्थ्य सेवाओं की प्रक्रिया

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कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता बालिकाओं को सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली से परिचित कराना रही. छात्राओं को अस्पताल भ्रमण के दौरान पर्चा बनवाने, संबंधित डॉक्टर को दिखाने और विभिन्न प्रकार की चिकित्सकीय जांच करवाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई. इस गतिविधि के जरिए बालिकाओं को समझाया गया कि स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकता होने पर सरकारी अस्पताल में किस प्रकार पंजीकरण कराया जाता है, चिकित्सक से परामर्श कैसे लिया जाता है और जांच की प्रक्रिया किस तरह पूरी होती है. स्वास्थ्य सेवाओं की यह व्यावहारिक जानकारी छात्राओं को जरूरत पड़ने पर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचने की प्रक्रिया समझने में मदद कर सकती है.

1.29 लाख से अधिक बालिकाओं की भागीदारी

प्रदेश के विभिन्न प्रकार के विद्यालयों की 1,29,227 बालिकाओं की सहभागिता कार्यक्रम के व्यापक दायरे को दर्शाती है. प्राथमिक से लेकर उच्च प्राथमिक और कम्पोजिट विद्यालयों के साथ केजीबीवी की छात्राओं को शामिल कर प्रशिक्षण को विभिन्न शैक्षिक स्तरों तक पहुंचाया गया. बालिकाओं में आत्मसम्मान, स्वास्थ्य जागरूकता और व्यावहारिक जीवन कौशल को बढ़ावा देने वाली ऐसी पहलें शिक्षा को जीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. सेल्फ एस्टीम प्रशिक्षण और अस्पताल भ्रमण के माध्यम से छात्राओं को स्वयं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की प्रक्रिया समझने का अवसर मिला. यह पहल बालिकाओं के व्यक्तित्व विकास और उन्हें अधिक जागरूक बनाने की दिशा में उपयोगी कदम है.

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मंत्री संदीप सिंह और महानिदेशक मोनिका रानी ने क्या कहा?

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  संदीप सिंह ने कहा है कि बालिकाओं में आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करना हमारी प्राथमिकता है. सेल्फ एस्टीम कार्यक्रम उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक जागरूक और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. स्कूल शिक्षा के महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा कि  1,29,227 बालिकाओं की सहभागिता वाले इस कार्यक्रम में छात्राओं को आत्मसम्मान के साथ सरकारी अस्पतालों में पंजीकरण, चिकित्सकीय परामर्श और विभिन्न जांचों की प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी गई, ताकि वे स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक बन सकें.

बताते चलें कि सेल्फ एस्टीम कार्यक्रम के जरिए बालिकाओं को आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी से जोड़ने का प्रयास किया गया है. इस तरह की पहल छात्राओं को न केवल पढ़ाई, बल्कि रोजमर्रा की चुनौतियों का सामना करने और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए भी जागरूक बनाने में मददगार हो सकती है.

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