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सलीम वास्तिक से बदायूं डबल मर्डर केस तक… योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ का वो दौर, जिसने बदल दी इंसाफ की परिभाषा

सलीम वास्तिक प्रकरण, बदायूं कांड और एलपीजी (LPG) की अवैध जमाखोरी के विरुद्ध योगी सरकार के कड़े रुख ने उपद्रवियों और जमाखोरों में दहशत पैदा कर दी है, और इंसाफ की एक नई परिभाषा को लिखा है.

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16 Mar 2026
( Updated: 16 Mar 2026
07:51 PM )
सलीम वास्तिक से बदायूं डबल मर्डर केस तक… योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ का वो दौर, जिसने बदल दी इंसाफ की परिभाषा
फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश की शासन व्यवस्था और राजनीतिक परिदृश्य में हाल के वर्षों में एक व्यापक बदलाव देखने को मिला है. कभी प्रशासनिक सुस्ती और लचर कानून व्यवस्था के लिए चर्चित रहा उत्तर प्रदेश अब 'जीरो टॉलरेंस' और ‘क्विक’ एक्शन’ के लिए जाना जाने लगा है. पिछले एक महीने की घटनाओं बाद योगी सरकार ने जिस तरह से ताबड़तोड़ कार्यवाई की है, इसने कार्यशैली को और अधिक स्पष्ट कर दिया है. बात चाहे सलीम वास्तिक के मामले की हो या बदायूं की कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौती की हो या फिर एलपीजी (LPG) कालाबाजारी पर अंकुश लगाने की- योगी सरकार ने इन सब घटनाओं में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए प्रदेश में कानून-व्यवस्था के लिए मिसाल पेश की है.  

सलीम वास्तिक मामला: कानून के शासन का सख्त संदेश

सलीम वास्तिक प्रकरण ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की थी. इस मामले में पुलिस द्वारा अपनाई गई ततपरता ने साफ संदेश दिया कि प्रदेश में अराजक तत्वों के लिए कोई जगह नहीं है.  एनकाउंटर, तेज जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई ने आम जनता में यह विश्वास जगाया है कि अब फाइलें लंबी अवधि के लिए लंबित नहीं रहतीं, बल्कि उन पर तुरंत निर्णय लिए जाते हैं. 

एलपीजी कालाबाजारी: आम आदमी की रसोई पर पहरा

कालाबाजारी और जमाखोरी, सीधे तौर पर आम आदमी की रसोई के बजट को प्रभावित करते हैं. हाल ही में राज्य के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों की अवैध बिक्री और जमाखोरी के खिलाफ जो अभियान चलाया गया, उसने इन गैर-कानूनी गतिविधियों पर गहरा चोट किया है. इस दौरान केवल छापेमारी ही नहीं हुई, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित की गई. सीएम योगी का स्पष्ट निर्देश है कि आमजन की आवश्यक जरूरतों के साथ खिलवाड़ करने वालों के प्रति कोई रियायत न बरती जाए. 

बदायूं डबल मर्डर केस में प्रशासन का ‘क्विक एक्शन’

बदायूं की दुखद घटना ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था के सामने गंभीर प्रश्न खड़े किए. हालांकि, सरकार के कड़े रुख और पुलिस की सक्रियता के चलते आरोपी को 24 घंटे से भी कम समय में गिरफ्तार कर लिया. इसी के साथ, मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया गया. आरोपी की संपत्तियों पर कार्रवाई और शस्त्र लाइसेंस रद्द करने जैसे कदमों से सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराध के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

योगी शासन का मूल मंत्र- 'जीरो टॉलरेंस'

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आपको बता दें कि योगी सरकार की सफलता का आधार उनकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति ही है, जो केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर भी इसका असर दिखता है. अधिकारियों को स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा या प्रशासनिक कामों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी. पुलिस की कार्रवाई से लेकर सख्त प्रशासनिक फैसलों तक, उत्तर प्रदेश ने एक ऐसा मॉडल विकसित किया है जहां अपराध और अपराधियों का फैसला ‘ऑन द स्पॉट’ हो जाता है. यही कारण है कि दूसरे राज्य भी अब अपराध नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश के इस मॉडल का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं.

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