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क्या ‘दीदी’ लगाएंगी हैट्रिक या BJP रचेगी इतिहास? इस एक सीट पर नहीं आएगा नतीजा, 21 मई को फिर होगी वोटिंग
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे 4 मई सुबह 8 बजे से आने शुरू होंगे, लेकिन इस बार तस्वीर पूरी नहीं होगी. 294 में से सिर्फ 293 सीटों के ही नतीजे आएंगे. इस चुनाव में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ममता बनर्जी अपनी जीत की हैट्रिक पूरी करेंगी, या बीजेपी पहली बार राज्य की सत्ता तक पहुंचकर इतिहास रचेगी.
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों का इंतजार अब खत्म होने वाला है. 4 मई यानी सोमवार की सुबह 8 बजे जैसे ही ईवीएम खुलेंगी, पूरे देश की नजरें बंगाल पर टिक जाएंगी. सवाल वही पुराना लेकिन इस बार और भी दिलचस्प है, क्या ममता बनर्जी अपनी जीत की हैट्रिक पूरी करेंगी, या बीजेपी पहली बार राज्य की सत्ता तक पहुंचकर इतिहास रचेगी. लेकिन इस बार नतीजों की तस्वीर पूरी नहीं होगी. 294 सीटों वाले इस राज्य में सिर्फ 293 सीटों के ही परिणाम सामने आएंगे. एक सीट ऐसी है, जहां फिलहाल चुनाव का फैसला टल गया है और वहां सन्नाटा पसरा रहेगा.
फालता सीट क्यों बनी चर्चा का केंद्र?
दक्षिण 24 परगना जिले की फालता विधानसभा सीट इस चुनाव में सबसे अलग कहानी बयां कर रही है. चुनाव आयोग ने यहां हुए मतदान को रद्द कर दिया है. वजह बेहद गंभीर बताई गई है. आयोग के अनुसार, 29 अप्रैल को मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां और चुनावी नियमों का उल्लंघन हुआ. स्थिति को देखते हुए आयोग ने अभूतपूर्व फैसला लेते हुए पूरे क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है. अब फालता के सभी 285 बूथों पर 21 मई को फिर से वोट डाले जाएंगे. इसके बाद 24 मई को यहां का परिणाम घोषित होगा. यानी जब पूरा बंगाल 4 मई को जश्न या समीक्षा में डूबा होगा, फालता के लोग अभी इंतजार में रहेंगे.
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ये चुनाव दिशा तय करने वाली लड़ाई
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इस बार का मुकाबला सिर्फ सत्ता हासिल करने तक सीमित नहीं है. यह बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला चुनाव माना जा रहा है. एक तरफ तृणमूल कांग्रेस है, जो लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है. दूसरी तरफ भाजपा है, जो पिछले चुनाव में मजबूत प्रदर्शन के बाद अब सरकार बनाने का दावा कर रही है. कांग्रेस और वाम दल भी इस बार चुनावी मैदान में हैं. कई जगहों पर मुकाबला त्रिकोणीय और यहां तक कि चतुष्कोणीय भी बन गया है. इससे नतीजों को लेकर अनिश्चितता और भी बढ़ गई है.
मुख्य चेहरे और सियासी दांव
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इस चुनाव में कुछ बड़े चेहरे पूरे अभियान की धुरी बने हुए हैं.
- ममता बनर्जी. तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत और राज्य की मौजूदा मुख्यमंत्री.
- सुकांत मजूमदार. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष, जो पार्टी के विस्तार का चेहरा बने हुए हैं.
- मल्लिकार्जुन खड़गे. कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय स्तर का नेतृत्व.
- सीताराम येचुरी. वाम राजनीति का प्रमुख चेहरा, जो बंगाल में अपनी जमीन वापस पाने की कोशिश में हैं.
इन नेताओं की रणनीति और जनसभाओं ने चुनावी माहौल को लगातार गर्म बनाए रखा.
इन 10 सीटों पर टिकी सबसे ज्यादा नजर
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पूरे राज्य में कुछ सीटें ऐसी हैं, जहां मुकाबला बेहद हाई-प्रोफाइल हो गया है. इन्हीं सीटों के नतीजे चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं. भवानीपुर, नंदीग्राम, डायमंड हार्बर, पानीहाटी, खड़गपुर सदर, हिंगलगंज, डोमकल, बहरामपुर, सेमसेरगंज और कोलकाता पोर्ट, ये वो सीटें हैं, जहां हर अपडेट पर सबकी नजर रहेगी. सबसे ज्यादा चर्चा भवानीपुर सीट की है. यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मैदान में हैं. उनके सामने बीजेपी ने सुवेंदु अधिकारी को उतारा है. सुवेंदु वही नेता हैं, जिन्होंने 2021 में नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया था. ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ सीट का नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है.
क्या कहती है जनता की नब्ज?
चुनाव प्रचार के दौरान कहीं विकास के मुद्दे हावी रहे, तो कहीं पहचान और राजनीतिक ध्रुवीकरण की चर्चा ज्यादा दिखी. ग्रामीण इलाकों में स्थानीय मुद्दे निर्णायक नजर आए, जबकि शहरी क्षेत्रों में रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सवाल ज्यादा उठे.
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बताते चलें कि आज जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ेगी, तस्वीर साफ होती जाएगी. हर राउंड के साथ सस्पेंस बढ़ेगा. कहीं जश्न होगा, तो कहीं सियासी समीकरणों की नई गणित शुरू होगी. ग़ौरतलब है कि राज्य में दो चरण में मतदान हुए थे. पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग हुई थी. फिलहाल पूरा बंगाल एक ही सवाल के जवाब का इंतजार कर रहा है, क्या ‘दीदी’ का जादू कायम रहेगा या ‘परिवर्तन’ की आहट सच साबित होगी.