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तमिलनाडु में सरकार गठन पर ग्रहण! विजय की शपथ से पहले फर्जी समर्थन पत्र पर मचा सियासी बवाल, जानें पूरा मामला
तमिलनाडु में विजय के शपथ ग्रहण से पहले सियासी विवाद शुरू हो गया है. एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने टीवीके पर फर्जी समर्थन पत्र भेजने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का समर्थन एनडीए और एआईएडीएमके को है, न कि विजय की पार्टी को.
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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जहां अभिनेता से नेता बने विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी में हैं, वहीं सरकार गठन से पहले ही राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. एएमएमके (AMMK) महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने टीवीके (TVK) की ओर से पेश किए गए समर्थन पत्र को फर्जी बताते हुए पूरे मामले में आपराधिक शिकायत दर्ज कराने थाने पहुँचे. इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल और भी तेज कर दी है.
दरअसल, शनिवार को विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ प्रस्तावित है, लेकिन उससे पहले समर्थन जुटाने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. दिनाकरन ने राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर को पत्र सौंपकर दावा किया कि टीवीके ने उनके विधायक कामराज एस. के नाम से जाली समर्थन पत्र भेजा है. उन्होंने साफ कहा कि एएमएमके का समर्थन टीवीके को नहीं बल्कि एनडीए और एआईएडीएमके गठबंधन को है.
समर्थन पत्र को लेकर बढ़ा विवाद
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टीटीवी दिनाकरन ने कहा कि उन्होंने पहले ही एआईएडीएमके महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के समर्थन में एक आधिकारिक पत्र राज्यपाल को भेज दिया था. इस पत्र पर एएमएमके विधायक कामराज एस. के हस्ताक्षर भी थे. उनका कहना है कि इसके बावजूद टीवी चैनलों पर यह खबर चलने लगी कि उनकी पार्टी ने विजय को समर्थन दे दिया है. यह देखकर वह खुद हैरान रह गए. दिनाकरन ने आरोप लगाया कि यह मामला सिर्फ राजनीतिक भ्रम फैलाने का नहीं बल्कि लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ का है. उन्होंने कहा कि अगर किसी विधायक के नाम से फर्जी पत्र तैयार किया गया है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने राज्यपाल से पूरे मामले की जांच कराने की मांग भी की है.
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पलानीस्वामी को बताया मुख्यमंत्री पद का दावेदार
एएमएमके प्रमुख ने एक बार फिर साफ किया कि उनकी पार्टी एआईएडीएमके और एनडीए गठबंधन के साथ मजबूती से खड़ी है. उन्होंने एडप्पाडी के. पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री पद का सही उम्मीदवार बताते हुए कहा कि एएमएमके का हर विधायक उसी रुख का समर्थन करेगा. दिनाकरन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त और जालसाजी जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि कामराज एस. ने शुक्रवार शाम करीब साढ़े छह बजे आधिकारिक पत्र पर हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद जब टीवी पर अलग तरह की खबरें चलीं तो उन्होंने तुरंत राज्यपाल से मुलाकात का समय मांगा.
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विजय के लिए लगातार बढ़ रही मुश्किलें
राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो विजय की पार्टी टीवीके के लिए सरकार बनाना अभी पूरी तरह आसान नहीं माना जा रहा है. चुनाव में दो सीटों से जीत दर्ज करने के बाद उनका प्रभावी बहुमत घटकर 117 तक पहुंच गया. कांग्रेस ने डीएमके गठबंधन से अलग होकर अपने पांच विधायकों के साथ विजय को समर्थन देने का फैसला किया है. वहीं सीपीआई और सीपीआई(एम) ने भी बाहर से समर्थन देने का ऐलान किया है. हालांकि आईयूएमएल के डीएमके गठबंधन के साथ बने रहने के फैसले ने विजय की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ऐसे में बहुमत का आंकड़ा लगातार बदलता दिखाई दे रहा है. कभी यह 118 तक पहुंचता नजर आता है तो कभी 116 पर अटक जाता है. फिलहाल विजय को स्थिर बहुमत के लिए अब भी अतिरिक्त समर्थन की जरूरत मानी जा रही है.
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बहरहाल, तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और बड़ा मोड़ ले सकता है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्यपाल किस दावे को ज्यादा मजबूत मानते हैं और आखिरकार सरकार गठन की तस्वीर किस दिशा में जाती है.