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‘मियां’ पर मचा बवाल तो असम CM हिमंत ने दिया जवाब, 30 साल से ये मुस्लिम शख्स निभा रहा खास रोल
Assam Election: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर विपक्ष मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाता है. मियां मुसलमानों के लिए उनके बयानों को आधार बनाया जाता है, लेकिन एक मुस्लिम शख्स ही उनकी लाइफ में खास रोल निभा रहा है, जानें कौन है वो शख्स.
‘BJP को अगले दस साल तक मियां लोगों के वोट की जरूरत नहीं है’, ये बयान कोई और नहीं असम की सत्ता संभाल रहे BJP के फायरब्रांड नेता और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने साल 2023 में दिया था. जिसके बाद उन पर मुस्लिम विरोधी होने के आरोप लगने लगे, क्योंकि आजाद भारत में शायद वो देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो डंके की चोट पर ये ऐलान कर रहे हैं कि हमें मियां वोट की जरूरत नहीं हैं. मियां मुसलमानों पर उनके कई ऐसे बयान हैं जिनके बाद उनके खिलाफ मुस्लिम विरोधी एजेंडा चलाया गया, लेकिन क्या सच में CM हिमंत मुस्लिम विरोधी हैं? क्या वाकई में उनको हिंदू वोट नहीं चाहिए? अब इन सवालों का जवाब खुद हिमंत बिस्वा सरमा ने दिया है और खोला है एक बड़ा राज.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की जिंदगी में एक मुस्लिम शख्स बेहद अहम रोल निभाता है. जिसका खुलासा उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में किया था. ये शख्स कोई और नहीं बल्कि हिमंत बिस्वा सरमा का ड्राइवर है.
30 साल से साथ है मुस्लिम ड्राइवर
हिमंत बिस्वा सरमा का ये ड्राइवर उनके साथ आज से नहीं बल्कि 30 साल से साथ है. हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया, मेरी गाड़ी का ड्राइवर 30 साल से मुसलमान है, मेरा रसोइयां मुसलमान है, लेकिन वो मियां नहीं है, मेरा विरोध उन लोगों से है जो असम की डेमोग्राफी को बदलने की कोशिश कर रहे हैं और जो अवैध प्रवासी हैं.
मियां मुसलमानों पर CM हिमंत के बयानों पर विवाद
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मिया मुसलमानों पर दिए गए बयानों पर काफी विवाद भी रहा है. कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था, जब तक वह सत्ता में रहेंगे, मियां मुसलमानों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. CM हिमंत ने दावा किया कि 'मियां' लोग अवैध बांग्लादेशी हैं और उन्हें असम में काम करने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए.
इससे पहले CM हिमंत ने कहा था, अगर मियां मुसलमान रिक्शा चालक हैं और वो 5 रुपये मांगें, तो 4 रुपये ही दो. इस तरह के छोटे-छोटे काम से परेशानी होने पर ही वो राज्य छोड़ेंगे. हालांकि मियां मुसलमानों से CM हिमंत का मतलब बांग्लादेशी मुसलमानों से था. जिसे वह खदेड़ने का दावा कर चुके हैं. आगामी चुनाव के लिए भी BJP घुसपैठियों के मुद्दे को जोर शोर से उठा रही है. CM हिमंत साफ कर चुके हैं कि राज्य में बांग्लादेशियों के लिए कोई जगह नहीं है.
कौन हैं मियां मुसलमान?
दरअसल, असम में मियां मुसलमानों को बांग्लादेशियों से जोड़ा जाता है. ये गैर बंगाली भाषी होते हैं जिन्हें बंगाली या असमिया नहीं माना जाता. पिछले कुछ साल में असम में ये शब्द काफी चर्चा में रहा.
जब CM हिमंत ने मुस्लिम दोस्त को दिया खास तोहफा
CM हिमंत की छवि को मुस्लिम विरोधी के तौर पर पेश किया जाता है लेकिन मुस्लिमों के लिए उनके अच्छे कामों की चर्चा नहीं होती. एक रैली में हिमंत बिस्वा सरमा को उनके पुराने दोस्त अब्दुल मिले. जिन्हें देख हिमंत बिस्वा सरमा खुदको रोक नहीं पाए और उनसे भीड़ के बीच जाकर मिले. CM हिमंत का ये खास दोस्त विकलांग था इसलिए उन्होंने ऑटोमेटिक व्हील चेयर भी गिफ्ट की.
जिस मुख्यमंत्री का ड्राइवर एक मुसलमान हो, यहां तक कि खाना बनाने वाला रसोइया भी मुसलमान हो, क्या वो मुख्यमंत्री मुस्लिम विरोधी हो सकता है? अगर वाकई सीएम हिमंता मुस्लिम विरोधी होते तो ड्राइवर और रसोइया जैसे अहम पदों पर मुसलमान को नहीं रखते, लेकिन विपक्ष उन्हें मुस्लिम विरोधी के तौर पर पेश करता है.
मियां मुसलमानों के खिलाफ असम सरकार के अभियान पर जो लोग सवाल उठा रहे हैं, उन्हें CM हिमंत ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए समझा दिया कि मियां का मतलब है बांग्लादेशी घुसपैठिया. जिनके खिलाफ सरकार जबरदस्त अभियान चला कर अब तक डेढ़ लाख बीघा जमीन से घुसपैठियों से मुक्त करवा लिया है और ये अभियान अभी रुकने वाला नहीं है. खुद CM हिमंता ने असम की जनता से वादा किया है कि अगर सत्ता में लौटे तो इस बार पांच लाख बीघा जमीन घुसपैठियों से मुक्त करवाएंगे.
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दरअसल, असम के साथ बांग्लादेश की करीब 263 किलोमीटर लंबी सीमा ना सिर्फ भूगोल का हिस्सा है, बल्कि ये सुरक्षा और घुसपैठ की राजनीति का भी एक ऐसा संवेदनशील मुद्दा रहा है. जिस पर राज्य की पूरी सियासत टिकी है.
असम में कब हैं चुनाव?
15 मार्च को चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में चुनाव का ऐलान किया था. असम में 9 अप्रैल को एक चरण में चुनाव होंगे. जबकि 4 मई को नतीजे घोषित होंगे.