कौन हैं पार्थ यादव और मणि मुंजाल? जिन्होंने UGC के नए नियमों को SC में दी थी चुनौती, खुद को बताया ‘हिंदुत्व फाइटर्स’

एडवोकेट पार्थ यादव और एडवोकेट मणि मुंजाल ने UGC याचिका को ड्राफ्ट किया था. जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने इसकी समीक्षा की.

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30 Jan 2026
( Updated: 30 Jan 2026
07:53 PM )
कौन हैं पार्थ यादव और मणि मुंजाल? जिन्होंने UGC के नए नियमों को SC में दी थी चुनौती, खुद को बताया ‘हिंदुत्व फाइटर्स’

भारी विरोध के बाद UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. कोर्ट ने नए नोटिफिकेशन को पहली नजर में अस्पष्ट माना है. अदालत के इस फैसले के बाद सामान्य वर्ग में खुशी की लहर है. 

वैसे तो UGC के नए रेगुलेशन के खिलाफ कई लोगों ने याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट में इसे सुनवाई तक पहुंचाने में दो युवाओं का बड़ा हाथ है. नाम है पार्थ यादव और मणि मुंजाल. दो युवा वकील पार्थ यादव और मणि मुंजाल ने UGC के नए नोटिफिकेशन के खिलाफ याचिका को ड्राफ्ट किया था. जिसकी समीक्षा वरिष्ठ वकील हरिशंकर जैन ने की और विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में अभ्यर्थियों का पक्ष रखा. अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पार्थ और मणि मुजाल ने इसे हिंदुत्व की बड़ी जीत माना.

पार्थ यादव और मणि मुंजाल ने क्या कहा? 

पार्थ यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर लिखा, दुनिया में कहीं भी हिंदू के साथ अन्याय होगा तो हम उसका निवारण करेंगे. पार्थ यादव ने लिखा, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यूजीसी विनियम, 2026 के असंवैधानिक प्रावधानों को चुनौती देने वाली मेरी याचिका पर रोक लगा दी है. यह हिंदुत्व के लिए एक बड़ी जीत है. कई लोगों ने इस मुद्दे को सवर्ण या ब्राह्मण बनाम अन्य के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया है. यह याचिका मैंने दायर की है और मैंने राहुल दीवान, संजय दीक्षित, रूबल पाडलिया और अनुभव का प्रतिनिधित्व किया है. हम सभी हिंदुत्व सेनानी हैं. 

‘जाति धर्म के आधार पर हिंदू के साथ अन्याय’

पार्थ यादव का मानना है कि UGC का नया नियम हिंदुओं पर अन्याय था. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए लिखा, हिंदू समाज के प्रति यह एक शुद्ध सेवा है, जिसका स्पष्ट संदेश है- जाति के आधार पर किसी भी हिंदू के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा. पार्थ यादव ने कहा कि यह हमारे अपने लोगों की रक्षा के लिए एक शुद्ध और व्यापक हिंदू प्रयास है. जैसा कि वीर सावरकर कहते थे, हिंदू स्वयं में एक जाती है क्योंकि जाती का अर्थ Latin 'casta/caste' नहीं किंतु अंग्रेज़ी में 'species' है. 

‘हिंदुओं को भड़काने वाले दिन बीत गए’

पार्थ यादव ने कहा, हमारे प्रयास हिंदू अधिकारों की रक्षा के लिए हैं. जाति, क्षेत्र, भाषा और यहां तक कि राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना सभी हिंदू हमारे भाई-बहन हैं. दुनिया में कहीं भी किसी भी हिंदू को नुकसान पहुंचाने या अन्याय करने के प्रयास को रोकना और उसका निवारण करना हमारा कर्तव्य है. यह सदी और आने वाले 100 साल हिंदू पुनर्जागरण के हैं और हिंदू सभ्यता को पुनर्जीवित करने और उसे मजबूत बनाने और हमारी भारत माता की मुक्ति के हैं. धर्म की स्थापना की दिशा में, वे दिन बीत गए जब गैर-हिंदुओं ने हस्तक्षेप किया और हमें एक-दूसरे के खिलाफ भड़काया. 

पार्थ और मणि मुंजाल ने UGC के नए नियमों को न केवल अभ्यर्थियों के साथ अन्याय माना. बल्कि इसे जाति के नाम पर हिंदुओं को बांटने वाला नियम भी करार दिया था. 

कौन हैं पार्थ यादव और मणि मुंजाल? 

पार्थ यादव और महिला अधिवक्ता मणि मुंजाल दोनों ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में सक्रिय अधिवक्ता (advocates) हैं. इन्होंने UGC (University Grants Commission) के नए रेगुलेशन्स 2026 के खिलाफ दायर याचिका (writ petition) को ड्राफ्ट किया था. यह याचिका UGC के उन प्रावधानों को चुनौती देती थी जो कथित तौर पर असंवैधानिक माने गए थे खासकर कास्ट के आधार पर जो नियम बनाए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए UGC 2026 रेगुलेशन्स पर स्टे (interim stay) लगा दिया और पुराने 2012 के रेगुलेशन्स को फिलहाल बहाल रखा. 

याचिका में मुख्य याचिकाकर्ता मृत्युंजय तिवारी और वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने इसकी कानूनी समीक्षा की थी. पार्थ यादव Advocate-on-Record (AOR) और मणि मुंजाल अधिवक्ता के तौर पर शामिल थे. दोनों युवा वकील हैं और अक्सर संवैधानिक, सामाजिक न्याय और हिंदू/रिफ्यूजी से जुड़े मामलों में काम करते दिखते हैं. दोनों दिल्ली हाई कोर्ट/सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं और कई PIL/महत्वपूर्ण केसों में दिखे हैं. 

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