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कहां गए Modi के दो ख़ास नेता, जो योगी को बदनाम करने के चक्कर में नेपथ्य में चले गए

कहां गए मोदी के दो ख़ास नेता, जो योगी को बदनाम करने के चक्कर में नेपथ्य में चले गए ।

लंबे वक़्त बाद 2017 में बीजेपी को यूपी में बहुमत मिला, जिसके बाद मुख्यमंत्री बनने और बनाने की होड़ मची। मनोज सिन्हा, केशव मौर्य, लक्ष्मीकांत वाजपेयी, केशव मौर्य, महेश शर्मा, राजनाथ सिंह जैसे तमाम चेहरों में से किसी एक को पद पर बैठाने की बात यूपी की सियासत में गूंज रही थी। लेकिन फिर एक और नाम कि एंट्री हुई, गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ की। बस फिर क्या था पूरी कहानी पलट गई और उत्तर प्रदेश को अपना नया मुख्यमंत्री मिल गया। इसके बाद कैबिनेट गठन की बारी आई तो एक से बढ़कर एक नामों को योगी की पहली कैबिनेट में जगह मिली।

बड़े मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी उन चेहरों को सौंपी गई, जो थोड़ा अनुभवी थे या फिर जिनपर केंद्र का हाथ था। जैसे केशव मौर्य को PWD मंत्रालय दिया गया। श्रीकांत शर्मा को ऊर्जा मंत्रातल दिया गया, सिद्धार्थ नाथ सिंह को चिकित्सा और स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। कहते हैं कि, श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थ नाथ सिंह केंद्र के बेहद करीबी रहे, यही वजह थी कि योगी सरकार के पहले कार्यकाल में दोनों का रुतबा था। लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि 2022 में बीजेपी के जीतते और योगी के दूसरी बार सीएम बनने के साथ 2017 योगी मंत्रिमंडल के इन दो मंत्रियों का पत्ता साफ़ कर दिया गया। जबकि चुनाव हारने वाले केशव प्रसाद मौर्य को उपमुख्यमंत्री बना कर रखा गया, ऐसे में सवाल उठता है ।

सिद्धार्थ नाथ सिंह से क्या गलती हुई ?श्रीकांत शर्मा से को क्यों मंत्री नहीं बनाया ? तो अब इन्हीं सवालों पर कुछ जवाब मिले है, हालांकि इन जवाबों की पुष्टि NMF NEWS नहीं करता।क्योंकि कांग्रेस नेता की तरफ से ये दावा किया गया है कि, योगी सरकार के पहले कार्यकाल में ऊर्जा मंत्रालय और स्वास्थ मंत्रालय में घोटाला हुआ था।जिसकी वजह से उन्हें नजरअंदाज किया गया औऱ योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जगह नहीं दी गई ।

बता दें कि, NMF NEWS के डिबेट शो ‘बात मुद्दे की’ में कांग्रेस नेता संदीप त्रिपाठी ने वरिष्ठ पत्रकार पंकज प्रसून के एक बयान के जवाब में ये दावा किया कि, योगी सरकार के पहले कार्यकाल में दो विभागों में घोटाला हुआ हालांकि जांच नहीं हुई, लेकिन इन दोनों मंत्रियों को दरकिनार जरुर कर दिया गया। 

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