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जिस NDTV से निकला 'गोदी मीडिया' शब्द, उसी की पत्रकार को कहा गया गोदी मीडिया तो बौखलाए मोदी विरोधी !
वो कहते हैं ना लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है, और ये बात आखिर सच साबित हो गई. जब जिस NDTV संस्थान से गोदी मीडिया शब्द निकला था. राजधानी दिल्ली की सड़कों पर उसी NDTV संस्थान की महिला पत्रकार को सरेआम गोदी मीडिया बोल कर टारगेट किया जाने लगा तो देखिये क्या बोले अजित अंजुम और राजदीप सरदेसाई जैसे वरिष्ठ पत्रकार.
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गोदी मीडिया ये शब्द तो आपने जरूर कभी ना कभी सुना होगा. खासकर साल 2014 के बाद क्योंकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटी और नरेंद्र मोदी ने देश की सत्ता संभाली. ये ऐसा दौर था जब एक तरफ जहां दशकों तक देश पर राज करने वाली कांग्रेस का बुरा वक्त शुरू हो रहा था. तो वहीं दूसरी तरफ दशकों तक विपक्ष में रही बीजेपी के लिए सुनहरा दौर शुरू हो रहा था क्योंकि उसके पास मोदी जैसा ब्रांड था. जिसके दम पर बीजेपी चुनाव दर चुनाव जीतती जा रही थी. इसी दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब कांग्रेस के साथ-साथ रवीश कुमार जैसे वरिष्ठ पत्रकार भी मोदी सरकार के खिलाफ खड़े हो गये और उन पर मोदी विरोधी होने का आरोप लगने लगा. इसी मोदी विरोध में उन्होंने स्टूडियो में बैठ कर एक शब्द गढ़ा गोदी मीडिया जो धीरे-धीरे फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों के लिए घातक साबित होने लगा. इतना घातक की गोदी मीडिया अब एक गाली की तरह बन गया और विपक्षी पार्टियों के समर्थक इसी शब्द का इस्तेमाल करके फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों को टारगेट करने लगे. यकीन नहीं तो कॉकरोचों के विरोध प्रदर्शन के दौरान की ये तस्वीरें देख लीजिये.
गोदी मीडिया कहकर पत्रकारों को निशाना बनाने का आरोप
राष्ट्रवादी पत्रकारिता करने वालों को इसी तरह से गोदी मीडिया बोलकर दौड़ाया जाता है. उन्हें लिंच करने की कोशिश की जाती है. जिसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि पत्रकार का काम है सवाल पूछना लेकिन अगर वो सवाल मोदी विरोधियों के मन मुताबिक नहीं होता तो या फिर उसका जवाब नहीं पता होता है तो गोदी मीडिया गोदी मीडिया बोल कर चिल्लाने लगते हैं.
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NDTV की महिला पत्रकार को भीड़ ने घेरा
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वो कहते हैं ना लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है और ये बात आखिर सच साबित हो गई. जब जिस NDTV संस्थान से गोदी मीडिया शब्द निकला था… राजधानी दिल्ली की सड़कों पर उसी NDTV संस्थान की महिला पत्रकार को सरेआम गोदी मीडिया बोल कर टारगेट किया जाने लगा. एक तरफ गोदी मीडिया गोदी मीडिया चिल्लाती कांग्रेस समर्थकों की ये भीड़ और दूसरी तरफ उस भीड़ में घिरी एक अकेली महिला पत्रकार जरा सोचिये उस वक्त क्या हालात रहे होंगे. ये तस्वीर बता रही है NDTV के जिस एसी वाले स्टूडियो में बैठ कर रवीश कुमार ने कभी गोदी मीडिया जैसा शब्द गढ़ा था. आज उसी NDTV की महिला पत्रकार को फील्ड में गोदी मीडिया गोदी मीडिया जैसे नारों का सामना करना पड़ रहा है. इसी बात से समझ सकते हैं कि फील्ड में रिपोर्टर किस हालात में काम कर रहे हैं और ये सिर्फ एक पत्रकार के साथ नहीं हो रहा है. ऐसा कई पत्रकारों के साथ होता है. लेकिन ये महिला पत्रकार NDTV जैसे बड़े संस्थान से जुड़ी हैं. शायद इसीलिये अजित अंजुम जैसे वरिष्ठ पत्रकार ने भी इस घटना के खिलाफ आवाज उठाते हुए सोशल मीडिया पर लिखा.
अजित अंजुम ने पत्रकार के समर्थन में क्या लिखा?
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NDTV का माइक देख कर कुछ लोग वसुधा वेणुगोपाल को गोदी मीडिया, गोदी मीडिया कह कर टारगेट कर रहे हैं, जो लोग भी ऐसा कर रहे हैं बिल्कुल गलत कर रहे हैं, किसी रिपोर्टर को इस तरह से घेरकर उसके साथ बदसलूकी करना गलत है, प्रोटेस्ट करना आपका अधिकार है लेकिन किसी भी सूरत में फील्ड रिपोर्टर के साथ ये सलूक ठीक नहीं है, गलत है, अपराध है, हर चैनल में बहुत अच्छा काम करने वाले पत्रकार भी होते हैं, वसुधा भी अच्छी रिपोर्टर हैं, आप किसी चैनल का माइक देख कर किसी भी फील्ड रिपोर्टर के साथ ऐसा नहीं कर सकते, वो भी एक महिला रिपोर्टर के साथ, आप ये लिहाज भी भूल रहे हैं, हालांकि इस वीडियो में कुछ लोग भीड़ को समझाते हुए भी दिख रहे हैं, किसी चैनल से आपकी नाराजगी है तो उसकी खीझ हर फील्ड रिपोर्टर पर मत उतारिये, जुलाई में CJP प्रोटेस्ट के दौरान भी कुछ रिपोर्टर के साथ मारपीट तक की गई थी, ये अपराध है.
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राजदीप सरदेसाई ने भी पत्रकारों को निशाना बनाने पर जताई आपत्ति
महिला पत्रकार के साथ हो रही बदसलूकी के खिलाफ अजित अंजुम जैसे वरिष्ठ पत्रकार ने आवाज उठाई. ये अच्छी बात है लेकिन अगर इसी तरह से गोदी मीडिया शब्द आने के बाद से ही उसका विरोध किया जाता तो शायद आज ये नौबत नहीं आती. अजित अंजुम की तरह एक और वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी एक लंबे चौड़े पोस्ट में लिखा 'यह बिल्कुल गलत है, पत्रकारों को इस तरह निशाना क्यों बनाया जाना चाहिए? अगर आपको सच में कोई समस्या है, तो मालिक या एडिटर से सवाल पूछें, मैं वसुधा के साथ पूरी तरह खड़ा हूं, कल प्रेस क्लब की मीटिंग में भी मैंने यही कहा था, पत्रकारों को लेबल लगाना और उनमें फूट डालना बंद करें, कुछ बुरे लोगों की वजह से पूरे पेशे को गलत न समझें, ज्यादातर पत्रकार मुश्किल समय में भी निष्पक्ष और अच्छा काम करते हैं और उन्हें हमारे सामूहिक समर्थन की जरूरत है.'
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रवीश कुमार की चुप्पी पर भी उठे सवाल
अजित अंजुम और राजदीप जैसे कई वरिष्ठ पत्रकारों ने NDTV की पत्रकार को निशाना बनाये जाने का विरोध किया. मगर हैरानी की बात ये है कि गोदी मीडिया जैसे शब्द गढ़ने वाले रवीश कुमार ने इस पत्रकार के लिए एक शब्द तक नहीं कहा. जिसकी वजह से फील्ड के पत्रकारों को इसी तरह के हालात का सामना करना पड़ता है. बहरहाल देर से ही सही कम से कम अजित अंजुम और राजदीप सरदेसाई जैसे वरिष्ठ पत्रकारों ने गोदी मीडिया बोल कर पत्रकारों को टारगेट किये जाने के खिलाफ आवाज तो उठाई. तो वहीं इस घटना के बावजूद चुप्पी साधे हुए रवीश कुमार के बारे में लोगो की अलग-अलग राय है.
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बताते चलें कि पत्रकारिता में किसी चैनल या पत्रकार की विचारधारा और रिपोर्टिंग पर सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी रिपोर्टर को भीड़ में घेरना या अपमानित करना जायज नहीं ठहराया जा सकता. असहमति जताने का अधिकार हर किसी को है, मगर उसका इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए. आखिरकार, किसी एक संस्थान से नाराजगी के आधार पर हर पत्रकार को निशाना बनाना न सिर्फ उनकी सुरक्षा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता के माहौल के लिए भी गंभीर सवाल खड़े करता है.