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सौरव दास और रांका के तिहाड़ जेल से बाहर आते ही CJP का अगला कदम क्या? ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन पर बड़ा अपडेट
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद तिहाड़ जेल से रिहा हो गए हैं. जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन के आरोप में गिरफ्तार दोनों नेताओं को SEM के सामने लिखित आश्वासन और निर्धारित शर्तों के बाद रिहाई मिली. अब पार्टी की अगली रणनीति पर नजर है.
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दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के लिए बड़ी खबर सामने आई है. पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद तिहाड़ जेल से रिहा हो गए हैं. दोनों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने लिखित आश्वासन देने और निर्धारित शर्तों को पूरा करने के बाद रिहाई मिली है. हालांकि, इस घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या CJP का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी रणनीति किस तरह तैयार करेगी.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर क्यों हुई गिरफ्तारी?
अक्टूबर की शुरुआत में राजधानी दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हुई थी. कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी, लेकिन पार्टी को वहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली. इसके बावजूद प्रदर्शन करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने पार्टी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को गिरफ्तार कर लिया था. इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वे तिहाड़ जेल में रहे. इस मामले ने राजनीतिक विरोध, सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया. पार्टी ने हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि पुलिस ने सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका को अपनी कार्रवाई का आधार बताया.
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हाईकोर्ट से नहीं मिली तत्काल राहत
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दोनों नेताओं की रिहाई का रास्ता आसान नहीं रहा. मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को उनकी न्यायिक हिरासत में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था. अदालत ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के फैसले का इंतजार करने को कहा. इसके बाद SEM की अदालत ने लिखित आश्वासन और निर्धारित शर्तों के आधार पर दोनों को रिहा करने का आदेश दिया. रिहाई के लिए सौरव दास और आशुतोष रांका को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और जमानत बांड जमा करने पड़े. साथ ही, दोनों ने लिखित रूप में भरोसा दिया कि वे शांति बनाए रखेंगे और जंतर-मंतर पर तब तक विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे, जब तक संबंधित स्थल को कानून के अनुसार अधिसूचना से मुक्त नहीं कर दिया जाता. बता दें कि इसमें ध्यान देने वाली बात है कि रिहाई का मतलब यह नहीं है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति अपने आप मिल गई है. दोनों नेताओं को तय शर्तों का पालन करना होगा. उनके लिखित बयान में यह भी कहा गया कि भविष्य में कोई भी विरोध प्रदर्शन संविधान और कानून की सीमाओं के भीतर किया जाएगा.
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पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग क्यों की थी?
दिल्ली पुलिस ने अदालत से दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी. पुलिस का तर्क था कि उनके बाद के बयानों और आचरण को देखते हुए सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका बनी हुई है. पुलिस ने यह भी कहा था कि नेताओं ने अपनी गतिविधियों को लेकर अदालत और मीडिया के सामने अलग-अलग रुख अपनाया. हालांकि, SEM की अदालत ने माना कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 135(3) के तहत शांति भंग होने से रोकने के लिए लिखित वचनपत्र के जरिए आवश्यक आश्वासन प्राप्त किया जा सकता है. इसी आधार पर अदालत ने रिहाई का आदेश दिया. इस फैसले के बाद दोनों नेता जेल से बाहर आ गए हैं.
अभिजीत दिपके ने क्या कहा?
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सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई से पहले CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी थी. उन्होंने कहा था कि दोनों नेताओं के बाहर आने के बाद पार्टी दोबारा बैठक करेगी और आगे की रणनीति पर विचार करेगी. दिपके ने हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि लोगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेकर डराने की कोशिश की जा रही है. यह उनका आरोप है, जिसकी पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों और न्यायिक निष्कर्षों को अलग से देखना जरूरी है. अब देखने होगा कि पार्टी ने अपने अगले कदम को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है. इससे पहले CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन करने की बात कही थी. बाद में कनॉट प्लेस के पास सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की घोषणा भी की गई थी. अब नेताओं की रिहाई के बाद पार्टी की अगली बैठक और उसके फैसले पर सबकी नजर रहेगी.
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बताते चलें कि दोनों नेताओं की रिहाई के बाद CJP ने संकेत दिए हैं कि उसका विरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. हालांकि, आंदोलन का अगला चरण कब और कहां होगा, इस बारे में अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. पार्टी के सामने एक तरफ अपने राजनीतिक विरोध को आगे बढ़ाने का सवाल है, तो दूसरी तरफ अदालत के सामने दिए गए लिखित आश्वासन और लागू कानूनी शर्तों का पालन करना भी जरूरी है. अब देखना होगा कि अभिजीत दिपके और उनकी पार्टी आगे किस तरह की रणनीति अपनाते हैं. फिलहाल, इतना स्पष्ट है कि सौरव दास और आशुतोष रांका जेल से बाहर आ चुके हैं, लेकिन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP की मुहिम का अगला अध्याय अभी बाकी है.